
अजंता गुफाएँ
अजन्ता गुफाएँ महाराष्ट्र, भारत में स्थित तकरीबन 29 चट्टानों को काटकर बनी बौद्ध स्मारक गुफाएँ जो द्वितीय शताब्दी ई॰पू॰ की हैं। यहाँ बौद्ध धर्म से सम्बन्धित चित्रण एवम् शिल्पकारी के उत्कृष्ट नमूने मिलते हैं। [1] इनके साथ ही सजीव चित्रण [2] भी मिलते हैं। यह गुफाएँ अजन्ता नामक गाँव के सन्निकट ही स्थित है, जो कि महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में है। (निर्देशांक: 20° 30’ उ० 75° 40’ पू॰) अजन्ता गुफाएँ सन् 1983 से युनेस्को की विश्व धरोहर स्थल घोषित है।" [3]
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चारमीनार
चारमीनार ("चार मीनार"), 1591 में निर्मित, भारत के हैदराबाद, तेलंगाना में स्थित एक स्मारक और मस्जिद है। [1] यह विश्व स्तर पर हैदराबाद के प्रतीक के रूप में जाना जाता है और भारत में सबसे अधिक मान्यता प्राप्त संरचनाओं में सूचीबद्ध है। चारमीनार के लंबे इतिहास में 400 से अधिक वर्षों के लिए इसकी शीर्ष मंजिल पर एक मस्जिद का अस्तित्व शामिल है। ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण, यह संरचना के आसपास के लोकप्रिय और व्यस्त स्थानीय बाजारों के लिए भी जाना जाता है, और हैदराबाद में सबसे अधिक बार आने वाले पर्यटक आकर्षणों में से एक बन गया है। चारमीनार कई त्योहार समारोह की एक साइट है, जैसे कि ईद-उल-अधा और ई…
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गोलकोण्डा
गोलकोंडा किला या गोलकोण्डा दक्षिणी भारत में, हैदराबाद नगर से पाँच मील पश्चिम स्थित एक दुर्ग तथा ध्वस्त नगर है। [1] पूर्वकाल में यह कुतबशाही राज्य में मिलनेवाले हीरे-जवाहरातों के लिये प्रसिद्ध था। [2]
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चित्तौड़गढ़ दुर्ग
चित्तौड़गढ़ दुर्ग भारत का सबसे विशाल दुर्ग है। यह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है चित्तौड़ गढ़ के किले को मौर्य राजवंश के सम्राट चित्रांगद मौर्य ने बनवाया था। यह एक विश्व विरासत स्थल है। चित्तौड़ मेवाड़ की राजधानी थी। [1]
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मेहरानगढ़
मेहरानगढ़ एक ऐतिहासिक किला है जो जोधपुर, राजस्थान, भारत में स्थित है। यह एक पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है, जो आसपास के मैदानों से लगभग 122 मीटर (400 फीट) ऊपर उठता है, और इसका परिसर लगभग 1,200 एकड़ (486 हेक्टेयर) में फैला हुआ है। [1] इसकी स्थापना लगभग 1459 में राठौड़ वंश के शासक राव जोधा द्वारा की गई थी, [2] हालांकि इसका अधिकांश वर्तमान स्वरूप 17वीं शताब्दी में उनके उत्तराधिकारियों द्वारा बनाया गया था। मेहरानगढ़ किला विशाल दीवारों द्वारा संरक्षित है। इस किले का प्रवेश द्वार एक पहाड़ी के ऊपर है जो बेहद शाही है। किले में सात द्वार हैं जिनमें विक्ट्री गेट, फतेह गेट, भैरों गेट, डेढ़ कामग्रा गेट, …
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आमेर दुर्ग
आमेर दुर्ग (जिसे आमेर का किला या आंबेर का किला नाम से भी जाना जाता है) भारत के राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर के आमेर क्षेत्र में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित एक पर्वतीय दुर्ग है। यह जयपुर नगर का प्रधान पर्यटक आकर्षण है। आमेर के बसने से पहले इस जगह मीणा जनजाति के लोग रहते थे , जिन्हे कच्छवाह राजपूतो ने अपने अधीन कर लिया। [3] यह दुर्ग व महल अपने कलात्मक विशुद्ध हिन्दू वास्तु शैली के घटकों के लिये भी जाना जाता है। दुर्ग की विशाल प्राचीरों, द्वारों की शृंखलाओं एवं पत्थर के बने रास्तों से भरा ये दुर्ग पहाड़ी के ठीक नीचे बने मावठा सरोवर को देखता हुआ प्रतीत होता है।
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गेटवे ऑफ़ इन्डिया
गेटवे ऑफ़ इन्डिया (भारत का प्रवेशद्वार) भारत के मुम्बई शहर के दक्षिण में समुद्र तट पर स्थित एक स्मारक है। स्मारक को दिसंबर 1911 में अपोलो बंडर, मुंबई (तब बॉम्बे) में ब्रिटिश सम्राट राजा-सम्राट जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी के प्रथम आगमन की याद में बनाया गया था। शाही यात्रा के समय, प्रवेशद्वार का निर्माण नहीं हुआ था, और सम्राट को एक कार्डबोर्ड संरचना के द्वारा बधाई दी गयी थी।
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क़ुतुब मीनार
क़ुतुब मीनार [3] भारत में दक्षिण दिल्ली शहर के महरौली भाग में स्थित, ईंट से बनी विश्व की सबसे ऊँची मीनार है। यह दिल्ली का एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। इसकी ऊँचाई 73 मीटर (239.5 फीट) और व्यास १४.३ मीटर है, जो ऊपर जाकर शिखर पर 2.75 मीटर (9.02 फीट) हो जाता है। इसमें ३७९ सीढियाँ हैं। [4] मीनार के चारों ओर बने अहाते में भारतीय कला के कई उत्कृष्ट नमूने हैं, जिनमें से अनेक इसके निर्माण काल सन 1199 के हैं। यह परिसर युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के रूप में स्वीकृत किया गया है। कुतुब मीनार परिसर में एक कुतुब स्तंभ भी है जिसपर जंग नही लगती है। इसे आप नीचे फोटो मे देख सकते है।
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लाल क़िला
लाल क़िला भारत की राजधानी दिल्ली के पुरानी दिल्ली इलाक़े में स्थित एक ऐतिहासिक मुग़ल क़िला है। इसे सम्राट शाहजहाँ ने सन् 1638 में अपनी नई राजधानी शाहजहानाबाद के निर्माण के साथ बनवाना शुरू कराया। इसका निर्माण 1648 में पूरा हुआ।
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ताजमहल
ताजमहल भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में स्थित एक विश्व धरोहर मक़बरा , और विश्व के ७ अजूबों में से एक है। इसका निर्माण १७वीं सदी में मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था। [1]
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जामा मस्जिद, दिल्ली
मस्जिद-ए-जहाँनुमा , जिसे आमतौर से जामा मस्जिद के नाम से जाना जाता है, पुरानी दिल्ली में स्थित भारत के सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। [1] इसे 1644 और 1656 के बीच मुग़ल सम्राट शाह जहाँ द्वारा निर्मित किया गया था तथा इसके पहले इमाम अब्दुल ग़फूर शाह बुख़ारी थे। मुग़ल राजधानी शाहजहानाबाद में स्थित, यह मुग़ल सम्राटों की शाही मस्जिद होती थी। जामा मस्जिद भारत पर मुग़ल सत्ता को दर्शाता था। यह ब्रिटिश काल के दौरान भी एक महत्तवपूर्ण स्थल था। मस्जिद आज तक सक्रिय है और यह दिल्ली के सबसे विख्यात स्थलों में से एक है। इसे राष्ट्रीय महत्तव के स्मारकों की सूची में शामिल किया गया है। [2]
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हरिमन्दिर साहिब
हरिमंदिर साहिब (पंजाबी: ਹਰਿਮੰਦਰ ਸਾਹਿਬ, अंग्रेज़ी: Golden Temple) सिख धर्मावलंबियों का सबसे पावन धार्मिक स्थल या सबसे प्रमुख गुरुद्वारा है जिसे दरबार साहिब या स्वर्ण मन्दिर भी कहा जाता है। यह भारत के राज्य पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित है और यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण है। पूरा अमृतसर शहर स्वर्ण मंदिर के चारों तरफ बसा हुआ है। स्वर्ण मंदिर में हजारों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। अमृतसर का नाम वास्तव में उस सरोवर के नाम पर रखा गया है जिसका निर्माण गुरु राम दास ने स्वयं अपने हाथों से किया था। यह गुरुद्वारा इसी सरोवर के बीचोबीच स्थित है। इस गुरुद्वारे का बाहरी हिस्सा सोने का बना हुआ है, इसलिए इसे '…
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कामाख्या मन्दिर
कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से ८ किलोमीटर दूर कामाख्या में है। कामाख्या से भी १० किलोमीटर दूर नीलाचल पव॑त पर स्थित है। यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है। [3] यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है [4] व इसका महत् तांत्रिक महत्व है। प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र सिद्धि का सर्वोच्च स्थल है। पूर्वोत्तर के मुख्य द्वार कहे जाने वाले असम राज्य की राजधानी दिसपुर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नीलांचल अथवा नीलशैल पर्वतमालाओं पर स्थित मां भगवती कामाख्या का सिद्ध शक्तिपीठ सती के इक्यावन शक्तिपीठों में सर्वोच्च स्थान रखता है। यहीं भगवती की महामुद्रा (योनि-…
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मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर
मीनाक्षी सुन्दरेश्वरर मन्दिर या मीनाक्षी अम्मां मन्दिर या केवल मीनाक्षी मन्दिर (तमिल: மீனாக்ஷி அம்மன் கோவில் ) भारत के तमिल नाडु राज्य के मदुरई नगर, में स्थित एक ऐतिहासिक मन्दिर है। यह हिन्दू देवता शिव (“‘सुन्दरेश्वरर”’ या सुन्दर ईश्वर के रूप में) एवं उनकी भार्या देवी पार्वती ( मीनाक्षी या मछली के आकार की आंख वाली देवी के रूप में) दोनो को समर्पित है। यह ध्यान योग्य बात है कि मछली पांड्य राजाओं का राजचिह्न था। यह मन्दिर तमिल भाषा के गृहस्थान 2500 वर्ष पुराने मदुरई नगर [1] , की जीवनरेखा है।
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रामेश्वरम तीर्थ
रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है। यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। यह तीर्थ हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। इसके अलावा यहां स्थापित शिवलिंग बारह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। [क] भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है। रामेश्वरम चेन्नई से लगभग सवा चार सौ मील दक्षिण-पूर्व में है। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख आकार द्वीप है। बहुत पहले यह द्वीप भारत की मुख्य भूमि के साथ जुड़ा हुआ था, परन्तु बाद में सागर की लहरों ने इस मिलाने वाली कड़ी को काट डाला, जिससे वह चारों ओर पानी से घिरकर टाप…
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सोमनाथ मन्दिर
सोमनाथ मन्दिर भूमण्डल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष के पश्चिमी छोर पर गुजरात नामक प्रदेश स्थित, अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक शिव मन्दिर का नाम है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है। इसे आज भी भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बन्दरगाह में स्थित इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट है। लोककथाओं के अनुसार यहीं श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था। इस कारण इस क्षेत्र का और भी महत्त्व बढ़ गया।
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कोणार्क सूर्य मंदिर
कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के ओडिशा राज्य के पुरी जिले में समुद्र तट पर, पुरी शहर से लगभग 35 किलोमीटर (22 मील) उत्तर-पूर्व में स्थित कोणार्क कस्बे में एक 13वीं शताब्दी (लगभग 1250 ई.) का ऐतिहासिक सूर्य मंदिर है। [1] इस मंदिर के निर्माण का श्रेय पूर्वी गंगवंश के शासक प्रथम नरसिंह देव को दिया जाता है। सन् 1984 में यूनेस्को ने इसके स्थापत्य और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी थी।
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जगन्नाथ मन्दिर, पुरी
पुरी का श्री जगन्नाथ मन्दिर एक हिन्दू मन्दिर है, जो भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है। यह भारत के ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है। [1] [2] इस मन्दिर को हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का मन्दिर है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है। [3] इस मन्दिर का वार्षिक रथ यात्रा उत्सव प्रसिद्ध है। इसमें मन्दिर के तीनों मुख्य देवता, भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भ्राता बलभद्र और भगिनी सुभद्रा तीनों, तीन अलग-अलग भव्य और सुसज्जित रथों में विराजमान होकर नगर क…
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बद्रीनाथ मन्दिर
बदरीनाथ अथवा बदरीनारायण मन्दिर भारतीय राज्य उत्तराखण्ड के चमोली जनपद में अलकनन्दा नदी के तट पर स्थित एक हिन्दू मन्दिर है। 'बदरीनाथ' व्याकरण और पुराने ग्रंथों के अनुसार अधिक शुद्ध और सही शब्द है, हालांकि बोलचाल में 'बद्रीनाथ' का प्रयोग भी बहुत अधिक किया जाता है। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर इसके नाम के लिए “बदरीनाथ” और “बद्रीनाथ” दोनों वर्तनी मिलती हैं। [1] यह हिंदू देवता विष्णु को समर्पित मंदिर है और यह स्थान इस धर्म में वर्णित सर्वाधिक पवित्र स्थानों, चार धामों, में से एक यह एक प्राचीन मंदिर है जिसका निर्माण ७वीं-९वीं सदी में होने के प्रमाण मिलते हैं। मन्दिर के नाम पर ही इसके इर्द-गिर्द बस…
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केदारनाथ मन्दिर
केदारनाथ मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित हिन्दुओं का प्रसिद्ध मंदिर है। उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम [क] और पंच केदार [ख] में से भी एक है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मन्दिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्य ही दर्शन के लिए खुलता है। पत्थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पाण्डवों के पौत्र महाराजा जन्मेजय ने कराया था। यहाँ स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया। [1]
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