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बिरसा मुंडा (15 नवंबर 1875 - 9 जून 1900) एक भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और मुंडा जनजाति के लोक नायक थे। उन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान 19वीं शताब्दी के अंत में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में हुए एक आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए। भारत के आदिवासी उन्हें भगवान मानते हैं और धरती आबा नाम से भी जाना जाता है। [1]
डॉ एनी बेसेन्ट (1 अक्टूबर 1847 - 20 सितम्बर 1933) अग्रणी आध्यात्मिक, थियोसोफिस्ट, महिला अधिकारों की समर्थक, लेखक, वक्ता एवं भारत-प्रेमी महिला थीं। सन 1917 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्षा भी बनीं। एनी बेसेंट से प्रेरणा पाकर भारत के कई समाज सेवकों को बल मिला। इन्होंने माउंट एवरेस्ट पे कभी चढ़ाई नहीं किया, कुछ भ्रांतियां है जो गलत है|
बाल गंगाधर तिलक (अथवा लोकमान्य तिलक , मूल नाम केशव गंगाधर तिलक) , बुधवार 23 जुलाई 1856 - शनीवार, 1 अगस्त 1920), एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के आरम्भिक काल में उन्होंने भारतीय स्वतन्त्रता के लिये नये विचार रखे और अनेक प्रयत्न किये। अंग्रेज उन्हें "भारतीय अशान्ति के पिता" कहते थे। उन्हें, "लोकमान्य" का आदरणीय पदवी भी प्राप्त हुई, जिसका अर्थ है "लोगों द्वारा स्वीकृत" (उनके नायक के रूप में)। [1] । [2]
पंडित राम प्रसाद 'बिस्मिल' (11 जून 1897 - 19 दिसम्बर 1927) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्तिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे, जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दे दी। वे मैनपुरी षड्यन्त्र व काकोरी-काण्ड जैसी कई घटनाओं में शामिल थे तथा हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सदस्य भी थे।
महाराजा रणजीत सिंह (गुरुमुखी : ਮਹਾਰਾਜਾ ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ) (१७८०-१८३९) सिख साम्राज्य के पहले महाराजा थे। वे शेर-ए पंजाब के नाम से प्रसिद्ध हैं। महाराजा रणजीत एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने न केवल पंजाब को एकजुट किया, बल्कि अपने जीते-जी अंग्रेजों को अपने साम्राज्य के पास भी नहीं भटकने दिया।
अकबर [a] (जलाल-उद-दीन मुहम्मद अकबर, [3] 15 अक्टूबर 1542 [b] – 27 अक्टूबर 1605), [4] जिन्हें अकबर महान के नाम से भी जाना जाता है, [5] तीसरे मुग़ल सम्राट थे, जिन्होंने 1556 से 1605 तक शासन किया। अकबर ने अपने पिता हुमायूँ के उत्तराधिकारी के रूप में, बैरम ख़ान के संरक्षण में सिंहासन संभाला। बैरम ख़ान ने युवा सम्राट को भारतीय उपमहाद्वीप में मुग़ल क्षेत्रों का विस्तार और सुदृढ़ीकरण करने में सहायता की। उन्हें व्यापक रूप से महानतम मुग़ल सम्राटों में से एक माना जाता है। [6]
चाणक्य (ई.पु ३७५ - २८३ ) चाणक्य प्राचीन भारतीय राजनेता, दार्शनिक, लेखक, अर्थशास्त्री, धर्मगुरु तथा शाही सलाहकार थे। वे प्रारंभिक जीवन में तक्षशिला विश्वविद्यालय के प्राध्यापक थे, उन्होंने अर्थशास्त्र तथा चाणक्यनीति जैसे प्रसिद्धि ग्रंथों की भी रचना की है। चाणक्य अखंड भारत के स्वप्नदृष्टा थे, उन्होंने चन्द्रगुप्त की सहायता से नंदवंश का नाश कर के मौर्य साम्राज्य की स्थापना की थी। अपनी राष्ट्रनिष्ठा, देशप्रेम, बुद्धिमानी, निडरता के कारण भारतीय सभ्यता में उनका स्थान एकमेव तथा अद्वितीय है।
चन्द्रगुप्त मौर्य (जन्म : ३४५ ई॰पु॰, राज ३२१ [3] -२९७ई॰पु॰ [4] ) में भारत के महान सम्राट थे। इन्होंने मौर्य राजवंश की स्थापना की थी। चन्द्रगुप्त पूरे भारत को एक साम्राज्य के अधीन लाने में सफल रहे। चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्यारोहण की तिथि साधारणतया ३२१ ई.पू. निर्धारित की जाती है। उन्होंने लगभग २४ वर्ष तक शासन किया और इस प्रकार उनके शासन का अन्त प्रायः २८५ ई.पू. में हुआ। भारतीय तिथिक्रम के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य का शासन ईपू १५३४ से आरम्भ होता है। [5] [6] [7] [8] [9]
अशोक (प्राकृत: 𑀅𑀲𑁄𑀓 ; ल॰ 304 – 232 ई.पू.) जिसे लोकप्रियः अशोक महान के उपाधि से जाना जाता है, विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय मौर्य राजवंश के महान सम्राट थे। अशोक बौद्ध धर्म के सबसे प्रतापी राजा थे। सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) था। उनका राजकाल ईसा पूर्व 269 से, 232 प्राचीन भारत में था। मौर्य राजवंश के चक्रवर्ती सम्राट अशोक राज्य का मौर्य साम्राज्य उत्तर में हिन्दुकुश, तक्षशिला की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी, सुवर्णगिरी पहाड़ी के दक्षिण तथा मैसूर तक तथा पूर्व में बांग्लादेश, पाटलीपुत्र से पश्चिम में अफ़गानिस्तान, ईरान, बलूचिस्त…
छत्रपती संभाजीराजे जाधव शिवाजीराजे भोंसले (14 मई 1657 – 11 मार्च 1689) मराठा साम्राज्य के द्वितीय छत्रपति राजा, लेखक, विचारक और छत्रपती शिवाजी के उत्तराधिकारी थे। उन्होंने अपने अपने जीवनकाल में 121 युद्ध लड़े और सभी में विजय प्राप्त की। दक्षिण भारत में मुगलों के आक्रमणों को रोकने में संभाजी की प्रमुख भूमिक के लिये प्रसिद्ध थे। [2]
महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया ( ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया रविवार विक्रम संवत 1597 तदनुसार 9 मई 1540 – 19 जनवरी 1597) उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे। [4] उनका नाम इतिहास में वीरता, शौर्य, त्याग, पराक्रम और दृढ प्रण के लिये अमर है। उन्होंने मुगल बादशहा अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई सालों तक संघर्ष किया, अंततः अकबर महाराणा प्रताप को अधीन करने मैं असफल रहा। महाराणा प्रताप की नीतियां शिवाजी महाराज से लेकर ब्रिटिश के खिलाफ बंगाल के स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनीं। [5] [6] [7]
छत्रपति शिवाजीराजे भोसले (१६३० -१६८० ई.) भारत के एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने १६७४ ई. में पश्चिम भारत में हिन्दवी स्वराज या मराठा साम्राज्य की नींव रखी। [1] इसके लिए उन्होंने मुगल साम्राज्य के शासक औरंगज़ेब से संघर्ष किया। सन् १६७४ में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वह "छत्रपति" बने।
रानी लक्ष्मीबाई (जन्म: 19 नवम्बर 1828 [1] – मृत्यु: 18 जून 1858) मराठा शासित झाँसी राज्य की रानी और 1857 की राज्यक्रान्ति की द्वितीय शहीद वीरांगना थीं। उन्होंने सिर्फ 29 वर्ष की उम्र में अंग्रेज साम्राज्य की सेना से युद्ध किया और रणभूमि में वीरगति को प्राप्त हुईं। बताया जाता है कि सिर पर तलवार के वार से शहीद हुई थी लक्ष्मीबाई। [2]
चन्द्रशेखर 'आजाद (23 जुलाई 1906 — 27 फ़रवरी 1931) भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के स्वतंत्रता सेनानी थे। वे शहीद राम प्रसाद बिस्मिल व शहीद भगत सिंह सरीखे क्रान्तिकारियों के अनन्यतम साथियों में से थे।
भगत सिंह (जन्म: 27 सितम्बर 1907 [1] , वीरगति: 23 मार्च 1931) भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रान्तिकारी थे। चन्द्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर इन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अभूतपूर्व साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया। पहले लाहौर में बर्नी सैंडर्स की हत्या और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम-विस्फोट करके ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह को बुलन्दी प्रदान की। इन्होंने असेम्बली में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। जिसके फलस्वरूप अंग्रेज सरकार ने इन्हें २३ मार्च १९३१ को इनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सु…
सुभाष चन्द्र बोस (23 जनवरी 1897 —18 अगस्त 1945) भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिए, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फ़ौज का गठन किया था। [7] उनके द्वारा दिया गया "जय हिन्द" का नारा। " तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा " का नारा भी उनका था जो उस समय अत्यधिक प्रचलन में आया। [8] भारतवासी उन्हें नेता जी के नाम से सम्बोधित करते हैं।
मोहनदास करमचन्द गांधी (२ अक्टूबर १८६९ – ३० जनवरी १९४८) जिन्हें महात्मा गांधी के नाम से भी जाना जाता है, भारत एवं भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार करने के समर्थक अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत सहित पूरे विश्व में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। उन्हें संसार में साधारण जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा 'महान आत्मा' एक सम्मान सूचक शब्द है। गांध…