
मीरा बाई
"मीराबाई का जन्म का नाम जसोदा था और उनके बचपन का नाम प्रेमल था, क्योंकि बचपन में उनकी सहेलियाँ उन्हें प्रेमल कहकर पुकारती थीं।"
Spirituality and social reformHindi

तुलसीदास
रामबोला दुबे ( हिन्दुस्तानी उच्चारण: [rɑːmboːlɑː d̪ʊbeː]; 11 अगस्त 1497 — 30 अगस्त 1623), गोस्वामी तुलसीदास ( संस्कृत उच्चारण : [goːsʋɑːmiː t̪ulɐsiːd̪ɑːsɐ]) के नाम से प्रसिद्ध; मध्यकालीन हिन्दी साहित्य के महान रामभक्त इव कवि थे। उन्होने रामचरितमानस और हनुमान चालीसा जैसे विश्व प्रसिद्ध ग्रन्थों की रचना की है। इन्हें आदिकाव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है।
Spirituality and social reformHindi

कबीर
कबीरदास या कबीर, कबीर साहेब 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे। [2] उनका जन्म 1398 में काशी में माना जाता है। [3]
Spirituality and social reformHindi

गुरु गोबिन्द सिंह
गुरु गोबिन्द सिंह जी (जन्म: पौषशुक्ल सप्तमी संवत् 1723 विक्रमी तदनुसार 22 दिसम्बर 1666- 7 अक्टूबर 1708 ) सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। श्री गुरू तेग बहादुर जी के बलिदान के उपरान्त 11 नवम्बर सन् 1675 को 10 वें गुरू बने। आप एक महान योद्धा, चिन्तक, कवि, भक्त एवं आध्यात्मिक नेता थे। सन् 1699 में बैसाखी के दिन उन्होंने खालसा पंथ (पन्थ) की स्थापना की जो सिखों के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
Spirituality and social reformHindi

गुरु नानक
नानक (पंजाबी: ਨਾਨਕ) (15अप्रैल 1469 राय भोई की तलवंडी – 22 सितंबर 1539) सिखों के प्रथम (आदि ) गुरु हैं। [2] इनके अनुयायी इन्हें नानक, नानक देव जी, बाबा नानक और नानकशाह नामों से सम्बोधित करते हैं। नानक अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबन्धु - सभी के गुण समेटे हुए थे। इनका जन्म स्थान गुरुद्वारा ननकाना साहिब पाकिस्तान में और समाधि स्थल करतारपुर साहिब भी अब पाकिस्तान में स्थित है। [3]
Spirituality and social reformHindi

महावीर
भगवान महावीर (Mahāvīra) जैन धर्म के चौंबीसवें (24वें) तीर्थंकर थे। भगवान महावीर का जन्म करीब ढाई हजार वर्ष पहले (ईसा से 599 वर्ष पूर्व), वैशाली गणराज्य के क्षत्रियकुंड में क्षत्रिय परिवार हुआ था। तीस वर्ष की आयु में महावीर ने संसार से विरक्त होकर राज वैभव त्याग दिया और संन्यास धारण कर आत्मकल्याण के पथ पर निकल गये। 12 वर्षो की कठिन तपस्या के बाद उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ जिसके पश्चात् उन्होंने समवशरण में ज्ञान प्रसारित किया। 72 वर्ष की आयु में उन्हें पावापुरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस दौरान महावीर स्वामी के कई अनुयायी बने जिसमें उस समय के प्रमुख राजा बिम्बिसार, कुणिक और चेटक भी शामिल थ…
Spirituality and social reformHindi

गौतम बुद्ध
गौतम बुद्ध (जन्म ५६३ ईसा पूर्व – निर्वाण ४८३ ईसा पूर्व) एक श्रमण थे जिनकी शिक्षाओं पर बौद्ध धर्म का प्रचलन हुआ। [2]
Spirituality and social reformHindi

आदि शंकराचार्य
आचार्य शंकर भारतीय महान् दार्शनिक एवं धर्मप्रवर्तक और योगी थे। उन्होंने अद्वैत वेदान्त को ठोस आधार प्रदान किया। भगवद्गीता, उपनिषदों और वेदांतसूत्रों पर लिखी हुई इन की टीकाएँ बहुत प्रसिद्ध हैं। उन्होंने सांख्यदर्शन का प्रधानकारणवाद और मीमांसा दर्शन के ज्ञान कर्म समुच्चयवाद का खण्डन किया।
Spirituality and social reformHindi

रामकृष्ण परमहंस
रामकृष्ण परमहंस भारत के एक महान संत, आध्यात्मिक गुरु एवं विचारक थे। इन्होंने सभी धर्मों की एकता पर जोर दिया। उन्हें बचपन से ही विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं।
Spirituality and social reformHindi

स्वामी विवेकानन्द
स्वामी विवेकानन्द (बंगाली: স্বামী বিবেকানন্দ; 12 जनवरी 1863 – 4 जुलाई 1902), जन्म नाम नरेन्द्रनाथ दत्त , वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। उन्हें दो मिनट का समय दिया गया था किन्तु उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण का आरम्भ "मेरे अमेरिकी बहनों एवं भाइयों" के साथ करने के लिये जाना जाता है। [5] उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था।
Spirituality and social reformHindi

बिरसा मुंडा
बिरसा मुंडा (15 नवंबर 1875 - 9 जून 1900) एक भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और मुंडा जनजाति के लोक नायक थे। उन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान 19वीं शताब्दी के अंत में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में हुए एक आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए। भारत के आदिवासी उन्हें भगवान मानते हैं और धरती आबा नाम से भी जाना जाता है। [1]
Historical personalitiesHindi

एनी बेसेन्ट
डॉ एनी बेसेन्ट (1 अक्टूबर 1847 - 20 सितम्बर 1933) अग्रणी आध्यात्मिक, थियोसोफिस्ट, महिला अधिकारों की समर्थक, लेखक, वक्ता एवं भारत-प्रेमी महिला थीं। सन 1917 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्षा भी बनीं। एनी बेसेंट से प्रेरणा पाकर भारत के कई समाज सेवकों को बल मिला। इन्होंने माउंट एवरेस्ट पे कभी चढ़ाई नहीं किया, कुछ भ्रांतियां है जो गलत है|
Historical personalitiesHindi

बाल गंगाधर तिलक
बाल गंगाधर तिलक (अथवा लोकमान्य तिलक , मूल नाम केशव गंगाधर तिलक) , बुधवार 23 जुलाई 1856 - शनीवार, 1 अगस्त 1920), एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के आरम्भिक काल में उन्होंने भारतीय स्वतन्त्रता के लिये नये विचार रखे और अनेक प्रयत्न किये। अंग्रेज उन्हें "भारतीय अशान्ति के पिता" कहते थे। उन्हें, "लोकमान्य" का आदरणीय पदवी भी प्राप्त हुई, जिसका अर्थ है "लोगों द्वारा स्वीकृत" (उनके नायक के रूप में)। [1] । [2]
Historical personalitiesHindi

राम प्रसाद 'बिस्मिल'
पंडित राम प्रसाद 'बिस्मिल' (11 जून 1897 - 19 दिसम्बर 1927) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्तिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे, जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फाँसी दे दी। वे मैनपुरी षड्यन्त्र व काकोरी-काण्ड जैसी कई घटनाओं में शामिल थे तथा हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सदस्य भी थे।
Historical personalitiesHindi

महाराजा रणजीत सिंह
महाराजा रणजीत सिंह (गुरुमुखी : ਮਹਾਰਾਜਾ ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ) (१७८०-१८३९) सिख साम्राज्य के पहले महाराजा थे। वे शेर-ए पंजाब के नाम से प्रसिद्ध हैं। महाराजा रणजीत एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने न केवल पंजाब को एकजुट किया, बल्कि अपने जीते-जी अंग्रेजों को अपने साम्राज्य के पास भी नहीं भटकने दिया।
Historical personalitiesHindi

अकबर
अकबर [a] (जलाल-उद-दीन मुहम्मद अकबर, [3] 15 अक्टूबर 1542 [b] – 27 अक्टूबर 1605), [4] जिन्हें अकबर महान के नाम से भी जाना जाता है, [5] तीसरे मुग़ल सम्राट थे, जिन्होंने 1556 से 1605 तक शासन किया। अकबर ने अपने पिता हुमायूँ के उत्तराधिकारी के रूप में, बैरम ख़ान के संरक्षण में सिंहासन संभाला। बैरम ख़ान ने युवा सम्राट को भारतीय उपमहाद्वीप में मुग़ल क्षेत्रों का विस्तार और सुदृढ़ीकरण करने में सहायता की। उन्हें व्यापक रूप से महानतम मुग़ल सम्राटों में से एक माना जाता है। [6]
Historical personalitiesHindi

चाणक्य
चाणक्य (ई.पु ३७५ - २८३ ) चाणक्य प्राचीन भारतीय राजनेता, दार्शनिक, लेखक, अर्थशास्त्री, धर्मगुरु तथा शाही सलाहकार थे। वे प्रारंभिक जीवन में तक्षशिला विश्वविद्यालय के प्राध्यापक थे, उन्होंने अर्थशास्त्र तथा चाणक्यनीति जैसे प्रसिद्धि ग्रंथों की भी रचना की है। चाणक्य अखंड भारत के स्वप्नदृष्टा थे, उन्होंने चन्द्रगुप्त की सहायता से नंदवंश का नाश कर के मौर्य साम्राज्य की स्थापना की थी। अपनी राष्ट्रनिष्ठा, देशप्रेम, बुद्धिमानी, निडरता के कारण भारतीय सभ्यता में उनका स्थान एकमेव तथा अद्वितीय है।
Historical personalitiesHindi

चन्द्रगुप्त मौर्य
चन्द्रगुप्त मौर्य (जन्म : ३४५ ई॰पु॰, राज ३२१ [3] -२९७ई॰पु॰ [4] ) में भारत के महान सम्राट थे। इन्होंने मौर्य राजवंश की स्थापना की थी। चन्द्रगुप्त पूरे भारत को एक साम्राज्य के अधीन लाने में सफल रहे। चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्यारोहण की तिथि साधारणतया ३२१ ई.पू. निर्धारित की जाती है। उन्होंने लगभग २४ वर्ष तक शासन किया और इस प्रकार उनके शासन का अन्त प्रायः २८५ ई.पू. में हुआ। भारतीय तिथिक्रम के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य का शासन ईपू १५३४ से आरम्भ होता है। [5] [6] [7] [8] [9]
Historical personalitiesHindi

अशोक
अशोक (प्राकृत: 𑀅𑀲𑁄𑀓 ; ल॰ 304 – 232 ई.पू.) जिसे लोकप्रियः अशोक महान के उपाधि से जाना जाता है, विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय मौर्य राजवंश के महान सम्राट थे। अशोक बौद्ध धर्म के सबसे प्रतापी राजा थे। सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) था। उनका राजकाल ईसा पूर्व 269 से, 232 प्राचीन भारत में था। मौर्य राजवंश के चक्रवर्ती सम्राट अशोक राज्य का मौर्य साम्राज्य उत्तर में हिन्दुकुश, तक्षशिला की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी, सुवर्णगिरी पहाड़ी के दक्षिण तथा मैसूर तक तथा पूर्व में बांग्लादेश, पाटलीपुत्र से पश्चिम में अफ़गानिस्तान, ईरान, बलूचिस्त…
Historical personalitiesHindi

सम्भाजी
छत्रपती संभाजीराजे जाधव शिवाजीराजे भोंसले (14 मई 1657 – 11 मार्च 1689) मराठा साम्राज्य के द्वितीय छत्रपति राजा, लेखक, विचारक और छत्रपती शिवाजी के उत्तराधिकारी थे। उन्होंने अपने अपने जीवनकाल में 121 युद्ध लड़े और सभी में विजय प्राप्त की। दक्षिण भारत में मुगलों के आक्रमणों को रोकने में संभाजी की प्रमुख भूमिक के लिये प्रसिद्ध थे। [2]
Historical personalitiesHindi