चेन्नै (तमिल: சென்னை, romanized: Ceṉṉai ; चेऩ्ऩै, अंग्रेज़ी: Chennai), जिसे १९९६ तक मद्रास के नाम से जाना जाता था, बंगाल की खाड़ी के कोरोमंडल तट पर स्थित यह दक्षिण भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक केंद्रों में से सबसे प्रमुख है। चेन्नै भारतीय राज्य तमिलनाडु की राजधानी है। २०११ की भारतीय जनगणना (चेन्नै नगर की नयी सीमाओं के लिए समायोजित) के अनुसार, यह चौथा सबसे बड़ा नगर है और भारत में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला नगरीय ढाँचा है। आस-पास के क्षेत्रों के अलावा चेन्नै एक मेट्रिपॉलिटन ऐरिया है, जो दुनिया की जनसंख्या के अनुसार ३६वाँ सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। चेन्नै विदेशी पर्यटकों द्व…
चेन्नै (तमिल: சென்னை, romanized: Ceṉṉai; चेऩ्ऩै, अंग्रेज़ी: Chennai), जिसे १९९६ तक मद्रास के नाम से जाना जाता था, बंगाल की खाड़ी के कोरोमंडल तट पर स्थित यह दक्षिण भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक केंद्रों में से सबसे प्रमुख है। चेन्नै भारतीय राज्य तमिलनाडु की राजधानी है। २०११ की भारतीय जनगणना (चेन्नै नगर की नयी सीमाओं के लिए समायोजित) के अनुसार, यह चौथा सबसे बड़ा नगर है और भारत में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला नगरीय ढाँचा है। आस-पास के क्षेत्रों के अलावा चेन्नै एक मेट्रिपॉलिटन ऐरिया है, जो दुनिया की जनसंख्या के अनुसार ३६वाँ सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। चेन्नै विदेशी पर्यटकों द्वारा सबसे ज़्यादा जाने-माने भारतीय नगरों में से एक है। यह वर्ष २०१५ में दुनिया में ४३वें सबसे अधिक दौरा करने वाला स्थल था। लिव़िंग स्टैंडर्ड्ज़ एक सर्वेक्षण ने चेन्नै को भारत के सबसे सुरक्षित नगर का दर्जा दिया। चेन्नै भारत में आने वाले ४५% रोगियों और ३०% से ४०% स्थानीय रोगियों को आकर्षित करता है। इस कारणवश, इसे "हेल्थ कैपिटल ऑव़ इंडिया" वा भारतीय स्वास्थ्य राजधानी भी कहा जाता है। एक विकासशील देश में एक प्रगतिशील महानगर के रूप में चेन्नै अत्यधिक प्रदूषण तथा अन्य सैन्य और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का सामना करता है।
चेन्नै में भारत की तीसरी सबसे बड़ी प्रवासी जनसंख्या क्रमशः २००९ में ३५ लाख, २०११ में ८५ लाख थी और २०१८ तक डेढ़ करोड़ से अधिक का अनुमान है। राजस्थान का मारवाड़ी समुदाय यहाँ व्यापारी वर्ग में मुख्यत: लिप्त है। चेन्नै में मारवाड़ी समुदाय की ५०,००० से अधिक दुकानें हैं। मारवाड़ियों का रामदेव जी का वरघोड़ा मुख्य पर्व है, जिसमें प्रतिवर्ष २ लाख से ज़्यादा मारवाड़ी लोग एकत्रित होते हैं, जो मिंट स्ट्रीट, आदि-अप्प, गोविंदप्प, एनएससी बोस रोड ओर नेनि-अप्प से गुज़रते हैं। १०१५ में यात्रा करने के लिए पर्यटन गाइड प्रकाशक लोनली प्लैनिट ने चेन्नै को दुनिया के शीर्ष दस नगरों में से एक का नाम दिया है। चेन्नै को ग्लोबल सिटीज़ इंडेक्स में बेहतर स्तर के नगर के रूप में स्थान दिया गया है और २०१४ में इंडिया टुडे के वार्षिक भारतीय सर्वेक्षण में भारत के सबसे अच्छा नगर के रूप में रहा। २०१५ में चेन्नै को आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों के मिश्रण का हवाला देते हुए बीबीसी द्वारा "सबसे गर्म" नगर (दौरे और दीर्घकालिक रहने के लिए) के रूप में रहा। नैशनल जिऑग्रफ़िक ने चेन्नै के भोजन को दुनिया का दूसरा सबसे उपयुक्त दिया है, जो कि इस सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय नगर था। लोनली प्लैनिट द्वारा चेन्नै को दुनिया का नौवाँ सबसे अच्छा महानगर भी नामित किया गया था।
चेन्नै मेट्रिपॉलिटन ऐरिया भारत की सबसे बड़ी नगर अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। चेन्नै को "डिट्रॉइट ऑव़ इंडिया" की भी उपाधि दी गयी है, जो कि नगर में स्थित भारत के ऑटोमोबिल उद्योग का एक-तिहाई से भी अधिक है। जनवरी २०१५ में प्रति व्यक्ति जीडीपी के संदर्भ में यह तीसरा स्थान था। चेन्नै को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटीज़ योजना के तहत स्मार्ट नगरों के रूप में विकसित किये जाने वाले १०० भारतीय नगरों में से एक के रूप में चुना गया था।
भारत में ब्रिटिश राज के स्थापित होने से पहले ही मद्रास का जन्म हुआ। माना जाता है कि बंदरगाह-रूपी नगर के पुर्तगाली प्रभाव के चलते इसका नाम मद्रास रखा गया, जो कि एक पुर्तगाली वाक्यांश 'मैए दे दीस' से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है 'भगवान की माता'। कुछ स्रोतों के अनुसार, इस नगर का नाम फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज के उत्तर में मछली पकड़ने वाले मद्रासपट्टनम नामक एक देहात से लिया गया था। हालाँकि, यह नाम यूरोपियों के आने से पहले उपयोग में था, इस पर अनिश्चितता है। ब्रिटिश सैन्य मानचित्रकों का मानना था कि मद्रास मूल रूप से मंदिर-राज या मंदिरराज के रूप में था। वर्ष १३६७ में विजयनगर युग के एक शिलालेख को, जो कि मद्रासपट्टनम बंदरगाह का उल्लेख करता है, पूर्व तट पर अन्य छोटे बंदरगाहों के साथ २०१५ में खोजा गया था और यह अनुमान लगाया गया था कि उक्त स्थान रोयापुरम में मछली पकड़ने वाला बंदरगाह होता होगा।
नगर के चेन्नै नाम के तेलुगु शब्द होना स्पष्ट रूप से इतिहासकारों द्वारा सिद्ध किया गया है। यह एक तेलुगु शासक दमर्ळा चेन्नप्प नायक्कर के नाम से प्राप्त हुआ था, जो कि दमनकारी शासक वेंकटपति के नायक थे और विजयनगर साम्राज्य के वेंकट तृतीय के तहत सामान्य रूप से काम करते थे, जहाँ से ब्रिटिश ने नगर को १६३९ में हासिल किया था। चेन्नै वा सेन्नै शब्द का पहला आधिकारिक उपयोग ८ अगस्त १६३९ को ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिस डे से पहले सेन्नैकेसु पेरुमल मंदिर के नाम में १६४६ में किया गया था।
१९९६ में, तमिलनाडु सरकार ने शहर का नाम आधिकारिक तौर पर मद्रास से चेन्नै कर दिया। उस समय, कई भारतीय नगरों के भी नाम बदले गये थे। हालाँकि, इसके "मद्रास" नाम नगर के साथ-साथ यहाँ के स्थानों के नामों में, जैसे मद्रास विश्वविद्यालय, आइआइटी मद्रास, मद्रास इंस्टिट्यूट ऑव टेक्नॉलजी, मद्रास मेडिकल कॉलिज, मद्रास पशु चिकित्सा कॉलिज, मद्रास क्रिश्चन कॉलिज, आदि में कभी-कभार प्रयुक्त होता रहा है।
चेन्नै में ऑटोमोबिल, प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर उत्पादन और स्वास्थ्य-संबंधी उद्योग हैं। यह नगर सॉफ़्टवेयर एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी उत्पादों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक नगर है। चेन्नै एवं इसके उपनगरीय क्षेत्र में ऑटोमोबाइल उद्योग विकसित है।[2][3] चेन्नै मंडल तमिलनाडु के जीडीपी का ३९% का और देश के ऑटोमोटिव़ निर्यात में ६०% का भागीदार है। इसी कारण से, इसे दक्षिण एशिया का डिट्रॉइट भी कहा जाता है।[4][5][6]
चेन्नै सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है। यहाँ के वार्षिक मद्रास म्यूज़िक सीज़न में सैकड़ों कलाकार भाग लेते हैं। चेन्नै में रंगशाला संस्कृति भी अच्छे स्तर पर है और यह भरतनाट्यम का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ का तमिल चलचित्र उद्योग, जिसे कॉलीवुड भी कहते हैं, भारत का द्वितीय सबसे बड़ा फ़िल्म उद्योग केंद्र है।
नामकरण
मद्रास नाम मद्रासपट्नम से लिया गया है। मद्रासपट्टनम् ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा सन १६३९ में चुना गया स्थायी निवास-स्थल था। इसके दक्षिण में चेन्नपट्टनम् नामक गाँव उपस्थित था। कुछ समय बाद, इन दोनों गाँवों के संयोग से मिलकर बने नगर को "मद्रास" नाम दिया गया। किंतु उसी जगह के निवासी इसे "चेन्नपट्टनम" या "चेन्नपुरी" कहते थे। सन १९९६ में नगर का नाम बदलकर "चेन्नै" किया गया, क्योंकि "मद्रास" को पुर्तगाली मूल का शब्द माना जाता था। यह भी माना जाता है कि इस नगर का नाम माद्रे-दे-सॉइस नामक एक पुर्तगाली सरकारी अधिकारी के नाम से लिया गया था, जो लगभग सन १५५० में इस जगह को सर्वप्रथम अपने स्थायी निवास बनाने वालों में शामिल थे। परंतु कुछ लोग यह भी मानते हैं कि "मद्रास" शब्द ही तमिल मूल का है तथा "चेन्नै" शब्द किसी अन्य भाषा का हो सकता है।
इतिहास
| ऐतिहासिक जनसंख्याएं
|
| वर्ष
|
जन.
|
%± |
| १८८१
|
4,05,848
| — |
| १८९१
|
4,52,518
| 11.5% |
| १९०१
|
5,09,346
| 12.6% |
| १९११
|
5,18,660
| 1.8% |
| १९२१
|
5,26,000
| 1.4% |
| १९३१
|
6,45,000
| 22.6% |
| १९४१
|
7,76,000
| 20.3% |
| १९५१
|
14,16,056
| 82.5% |
| १९६१
|
17,29,141
| 22.1% |
| १९७१
|
24,20,000
| 40.0% |
| १९८१
|
32,66,034
| 35.0% |
| १९९१
|
38,41,398
| 17.6% |
| २००१
|
42,16,268
| 9.8% |
चेन्नै एवं इसके आस-पास के क्षेत्र पहली सदी से ही महत्वपूर्ण प्रशासनिक, सैनिक एवं आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। यह दक्षिण भारत के बहुत से महत्वपूर्ण राजवंशों यथा, पल्लव, चोल, पांड्य एवं विजयनगर आदि का भी केंद्र-बिंदु रहा है। मयलापुर नगर, जो कि अब चेन्नै नगर का हिस्सा है, पल्लवों के ज़माने में एक महत्वपूर्ण बंदरगाह हुआ करता था। आधुनिक काल में पुर्तगालियों ने १५२२ में यहाँ आने के बाद एक और बंदरगाह बनाया, जिसे साओ तोमे कहा गया। पुर्तगालियों ने अपना बसेरा आज के चेन्नै के उत्तर में पलिकट (वर्तमान पड़िवेरकाडु) नामक स्थान पर बसाया और वहीं डच ईस्ट इंडिया कंपनी की नींव रखी।
२२ अगस्त १६३९, को संत फ़्रांसिस दिवस के मौके पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने विजयनगर के राजा पेद्द वेंकट राय से कोरोमंडल तट चंद्रगिरि में कुछ ज़मीनें ख़रीदी। इस इलाक़े में दमर्ळा वेंकटपति का, जो इस इलाक़े के नायक थे, शासन था। उन्होंने ब्रितानी व्यापारियों को वहाँ पर एक फ़ैक्ट्री एवं गोदाम बनाने की अनुमति दी। एक वर्ष वाद, ब्रितानी व्यापारियों ने सेंट जॉर्ज क़िला बनवाया, जो कि बाद में औपनिवेशिक गतिविधियों का केंद्र-बिंदु बन गया। १७४६ में, मद्रास एवं सेंट जॉर्ज क़िले पर फ़्रॉंसिसी फ़ौजों ने अपना क़ब्ज़ा जमा लिया। बाद में, ब्रितानी कंपनी का इस क्षेत्र पर नियंत्रण पुनः १७४९ में एक्स ला चेपल संधि (१७४८) के माध्यम से प्राप्त हुआ। इस क्षेत्र को फ़्रॉंसिसियों एवं मैसूर के सुल्तान हैदर अली के हमलों से बचाने के लिए इस पूरे क्षेत्र की क़िलेबंदी कर दी गयी थी। अठारहवीं सदी के अंत होते-होते ब्रितानियों ने लगभग पूरे आधुनिक तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक के हिस्सों को अपने अधीन कर लिया एवं मद्रास प्रेज़िडंसी की स्थापना की, जिसकी राजधानी मद्रास घोषित की गयी।[7] ब्रितानियों की हुक़ूमत के अधीन, चेन्नै नगर एक महत्वपूर्ण आधुनिक नगरीय क्षेत्र एवं जलसेना के रूप में उभरा।
भूगोल
चेन्नै भारत के दक्षिण पूर्वी तट पर तमिलनाडु राज्य के उत्तरी पूर्वी तटीय क्षेत्र में स्थित है। इस तटीय क्षेत्र को पूर्वी तटीय मैदानी क्षेत्र भी कहा जाता है। इस क्षेत्र की समुद्र तल से औसत ऊँचाई ६.७ मीटर है[8] और यह ६० मीटर की ऊँचाई पर सबसे ऊँचा स्थान है।[9] मरीना बीच से प्रसिद्ध चेन्नै के समुद्र तट का विस्तार १२ किलोमीटर तक है। नगर के मध्य में बहने वाली कूवम नदी और दक्षिण से बहने वाली अड्यार नदी आज की तारीख़ में बहुत ज़्यादा दूषित हो चुकी हैं। अड्यार नदी कूवम से कम प्रदूषित है और इसके तट पर अनेक पशु-पक्षियों का बसेरा है।[10][11] इन दोनों नदियों को बकिंगम नहर के द्वारा जोड़ा गया है। यह नहर अपनी ४ किलोमीटर की दूरी समुद्री तट के समानांतर तय करती है। नगर के पश्चिमी भाग में कई झीलें हैं, जिनमें से रेड हिल्ज़, चोलवरम और चेंबर्म्-बाक्कम् से पेयजल की आपूर्ति होती है। चेन्नै का भूमिगत जल भी प्रदूषित होता जा रहा है।[12]
चेन्नै नगर को उत्तर, मध्य, दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै नामक चार भागों में बँटा है। उत्तरी चेन्नै एक औद्योगिक क्षेत्र है। मध्य चेन्नै नगर का व्यावसायिक केंद्र है। यहाँ पर स्थित पेरिज कॉर्नर, जिसे स्थानीय लोग पेरिज भी कहते हैं, एक प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के रूप में उभरे हैं। बढ़ती आबादी के कारण से, नगर विभिन्न दिशाओं में बढ़ता जा रहा है। जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक विकास हो रहा है, वे हैं- ओल्ड महाबलीपुरम रोड, दक्षिणी ग्रैंड ट्रंक रोड और पश्चिम में अंबातूर, कोयंबतूर और श्रीपेरंबतूर के क्षेत्र।[13] चेन्नै की नगर सीमा में एक राष्ट्रीय उद्यान भी है, जिसे गिंडी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है।[14]
चेन्नै में वार्षिक तापमान लगभग एक समान होता है। इसका कारण से, चेन्नै का समुद्री तट पर एवं थर्मल इक्वेटर पर स्थित होता है। वर्षभर मौसम आम तौर पर गर्म एवं उमस भरा होता है। मई एवं जून का प्रथम सप्ताह वर्ष का सबसे गर्म समय होता है। इस समय जब तापमान ३८-४२ डिग्री सेल्सियस के आस-पास पहुँच जाता है, तब स्थानीय लोग इसे अग्नि नक्षत्रम या कथिरि वेय्यी कहते है।[15] वर्ष का सबसे ठंडा महीना जनवरी का होता है, जब न्यूनतम तापमान १८-२० डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। अब तक यहाँ का सबसे न्यूनतम तापमान १५.८ डिग्री सेल्सियस और उच्चतम तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।[16][17]
चेन्नै में वर्ष में औसतन १,३०० मिलीमीटर वर्षा होती है। मुख्यतः वर्षा के सितंबर से दिसंबर के मध्य होती है। देश के अन्य भागों से विपरीत चेन्नै में वर्षा मॉनसून के लौटने के दौरान उत्तर-पूर्वी हवाओं के चलते होती है। बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात कई बार चेन्नै भी पहुँच जाते हैं। सन २००५ में आज तक की सबसे ज़्यादा वर्षा २,५७० मिलीमीटर दर्ज की गयी थी।[18] २ नवंबर २०१७ को श्रीलंका के नज़दीक में, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के कारण चेन्नै में लगातार पाँच घंटे तक बारिश हुई थी, जिसके कारण से अनेक इलाक़ों में पानी भर गया था। [19]
| चेन्नई, भारत के लिए मौसम के औसत
|
| महीने
|
जनवरी
|
फ़रवरी
|
मार्च
|
अप्रैल
|
मई
|
जून
|
जुलाई
|
अगस्त
|
सितम्बर
|
अक्टूबर
|
नवम्बर
|
दिसम्बर
|
वर्ष
|
| औसत उच्च°C (°F)
|
28 (83.12)
|
30 (85.82)
|
32 (89.42)
|
34 (92.48)
|
36 (97.52)
|
37 (97.88)
|
35 (94.46)
|
34 (93.02)
|
34 (92.3)
|
31 (88.52)
|
29 (84.56)
|
28 (82.58)
|
32 (90.14)
|
| औसत निम्न °C (°F)
|
21 (69.08)
|
21 (70.16)
|
23 (73.58)
|
26 (78.62)
|
28 (81.68)
|
27 (80.96)
|
26 (78.62)
|
25 (77.54)
|
25 (77.54)
|
24 (75.74)
|
23 (73.04)
|
22 (70.88)
|
24 (75.62)
|
| वर्षा mm (इंच)
|
16.2 (0.64)
|
3.7 (0.15)
|
3.0 (0.12)
|
13.6 (0.54)
|
48.9 (1.93)
|
53.7 (2.11)
|
97.8 (3.85)
|
149.7 (5.89)
|
109.1 (4.3)
|
282.7 (11.13)
|
350.3 (13.79)
|
138.2 (5.44)
|
1,266.9 (49.88)
|
| स्रोत: भारत मौसम विज्ञान विभाग[20] 25 जनवरी 2009
|
प्रशासनिक एवं उपयोगी सेवाएं
नगर के अधिकारीगण, (सितं. ०७)
| महापौर[21][22]
|
मा. सुब्रह्मानियम
|
| उप-महापौर
|
आर सत्यभामा
|
| नगर निगम आयुक्त
|
राजेश लखोनी
|
| पुलिस आयुक्त
|
के राधाकृष्णन
|
|
चेन्नै नगर का प्रशासन चेन्नै नगर निगम के पास है। १६८८ में स्थापित हुआ यह निगम भारत में ही नहीं, ब्रिटेन के बाहर किसी भी राष्ट्रमंडल देश में सबसे पहला नगर निगम है। इसमें १५५ पार्षद है, जो चेन्नै के १५५ वॉऽर्डों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनका चुनाव सीधे चेन्नै की जनता ही करती है। ये लोग अपने आप में से ही एक महापौर एवं एक उप-महापौर को चुनते हैं, जो छह समितियों का संचालन करता है।[23] चेन्नै, तमिलनाडु राज्य की राजधानी होने से राज्य की कार्यपालिका और न्यायपालिका के मुख्यालय नगर में मुख्य रूप से फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज में सचिवालय इमारत में और शेष कार्यालय नगर में विभिन्न स्थानों पर अनेक इमारतों में स्थित हैं। मद्रास उच्च न्यायालय का अधिकार-क्षेत्र तमिलनाडु राज्य और पुदुचेरी तक है। यह राज्य की सर्वोच्च न्याय संस्था है और चेन्नै में ही स्थापित है। चेन्नै में तीन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं – चेन्नै उत्तर, चेन्नै मध्य और चेन्नै दक्षिण और १८ विधान-सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं।
चेन्नै का महानगरीय क्षेत्र कई उपनगरों तक व्याप्त है, जिसमें काँचीपुरम और तिरुवल्लुर ज़िले के भी क्षेत्र आते हैं। बड़े उपनगरों में वहाँ की टाउनशिप पालिकाएँ हैं और छोटे क्षेत्रों में टाउन-हॉऽल हैं, जिन्हें पंचायत कहते हैं। नगर का क्षेत्र जहाँ १७४ किमी² (६७ मील²) है,[24] वहीं उपनगरीय क्षेत्र ११८९ किमी² (४५८ मील²) तक फैले हुए हैं।[25] चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण (सीएमडीए) ने नगर के निकट उपनगरों के विकास के उद्देश्य से एक द्वितीय मास्टरप्लैन को ड्राफ़्ट तैयार किया है। निकटस्थ उपनगरों में महाबलिपुरम (दक्षिण में), चेंगलपट्टु और मारियामलै नगर दक्षिण-पश्चिम में, श्रीपेरंबुदूर, तिरुवल्लुर और अरक्कोणम पश्चिम में आते हैं।
ग्रेऽटर चेन्नै पुलिस विभाग तमिलनाडु पुलिस का ही एक अनुभाग है, जो नगर में क़ानून-व्यवस्था की देखरेख में संलग्न है। नगर की पुलिस के अध्यक्ष पुलिस आयुक्त, चेन्नै हैं और प्रशासनिक नियंत्रण राज्य गृह मंत्रालय के पास है। इस विभाग में ३६ उप-भाग और १२१ पुलिस स्टेशन हैं। नगर का यातायात चेन्नै सिटी ट्रैफ़िक पुलिस द्वारा नियंत्रित होता है। महानगर के उपनगर चेन्नै मेट्रिपॉलिटन पुलिस के अधीन आते हैं एवं बाहरी ज़िले काँचीपुरम एवं तिरुवल्लुर पुलिस विभागों के अंतर्गत है।
चेन्नै नगर निगम और उपनगरीय नगरपालिकाएँ नागरिक सुविधाएँ मुहैया कराती हैं। अधिकांश क्षेत्रों में कूड़ा-प्रबंधन नील मेटल फ़नैलिका इन्वायरनमंट मैनिजमंट; एक निजी कंपनी और कुछ अन्य क्षेत्रों में नगर निगम देखता है। जल-आपूर्ति एवं मल-निकास (स्यूइज ट्रीटमंट) की निगरानी चेन्नै मेट्रिपॉलिटन वॉटर सप्लाइ ऐंड स्यूइज बॉर्ड द्वारा होती है। विद्युत आपूर्ति तमिलनाडु विद्युत बॉर्ड प्रबंध करता है।[26] नगर की दूरभाष सेवा छह मोबाइल और चार लैंडलाइन कंपनियों के द्वारा प्रदान होती है[27][28] और सिफ़ी तथा हैथवे जैसे कंपनियाँ ब्रॉडबैंड सेवा द्वारा इंटरनेट भी उपलब्ध कराती हैं।
नगर के क्षेत्र से कोई मुख्य नदी नहीं गुज़रती है, अतः चेन्नै में वार्षिक मॉनसून वर्षा के जल को सरोवरों में सहजकर रखने का इतिहास रहा है। नगर की बढ़ती आबादी और भूमिगत जल के गिरते स्तर के कारण नगर को जल अभाव का सामना करना पड़ा है। इस दिशा में वीरानम झील परियोजना भी कारगर नहीं सिद्ध हुई है। नयी वीरानम परियोजना ने काफ़ी हद तक इस समस्या का समाधान किया है और शहर के सुदूर स्रोतों पर निर्भरता घटी है।[29] हाल के वर्षों में भारी मॉनसूनी वर्षाओं के चलते अन्ना नगर में जल पुनर्चक्रीकरण को सहारा मिला है और इससे नगर में जलाभावों की काफ़ी कमी आयी है।[30] इसके साथ ही, तेलुगु गंगा परियोजना जैसे नयी परियोजनाओं द्वारा आंध्र प्रदेश से कृष्ण नदी का जल भी पहुँचाया जा रहा है, जिसने इस संकट को लगभग समाप्त ही कर दिया है। नगर में समुद्री जल के अलवणीकरण-संयंत्र की स्थापना भी प्रगति पर है, जिससे सागर के जल को भी जल-आपूर्ति में प्रयोग किया जा सकेगा।[31][32]
संस्कृति
चेन्नै भारत की सांस्कृतिक एवं संगीत राजधानी है।[33] नगर शास्त्रीय नृत्य-संगीत कार्यक्रमों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष, चेन्नै में पंच-सप्ताह मद्रास म्यूज़िक सीज़न कार्यक्रम का आयोजन होता है। यह १९२७ में मद्रास संगीत अकादेमी की स्थापना की वर्षगाँठ मानने के साथ आयोजित होता है।[34] इसमें नगर और निकट के सैंकड़ों कलाकारों के शास्त्रीय कर्नाटक संगीत के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। एक अन्य उत्सम चेन्नै संगमम प्रत्येक वर्ष जनवरी में तमिलनाडु राज्य की विभिन्न कलाओं को दर्शाता है। चेन्नै को भरतनाट्यम के लिए भी जाना जाता है। यह दक्षिण-भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली है। नगर के दक्षिणी भाग में तटीय क्षेत्र में कलाक्षेत्र नामक स्थान भरतनाट्यम का प्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्र है।[35] चेन्नै में भारत के कुछ सर्वोत्तम कॉयर्ज़ हैं, जो क्रिसमस के अवसर पर अंग्रेज़ी और तमिल में विभिन्न कैरल कार्यक्रम करते हैं।[36][37] मद्रास म्यूज़िकल असोसिएशन भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठावान कॉयर्ज़ में से एक हैं और इन्होंने विश्वभर में कार्यक्रम किये हैं।[38][39]
चेन्नै तमिल चलचित्र उद्योग, जिसे कॉलीवुड भी कहते हैं, का आधार नगर है। यह उद्योग कोडमबक्कम में स्थित है, जहाँ बड़ी संख्या में फ़िल्म स्टूडियो हैं।[40] इस उद्योग द्वारा आजकल १५० से अधिक फ़िल्में वार्षिक तौर पर बनायी जाती हैं[41] और इनके साउंडट्रैक के ऐल्बम भी नगर को संगीतमय करते हैं। इस उद्योग से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नाम इलैयाराजा, के बालाचंदर, शिवाजी गणेशन, एम जी रामचंद्रन, रजनीकांत, कमल हासन, मणि रत्नम और एस शंकर हैं।
ए. आर. रहमान ने चेन्नै को अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलायी है। रहमान को २००९ में स्लमडॉग मिलेनियर के लिए दो ऑस्कर सम्मान मिले थे।[42] चेन्नै में रंगमंच पर तमिल नाटक मंचित किये जाते हैं, जिनमें राजनीतिक, व्यंग्य, हास्य, पौराणिक, आदि सभी रसों का मिश्रण होता है।[43][44][45] इनके अलावा, अंग्रेज़ी नाटकों का भी मंचन आयोजित होता है।
नगर के उत्सवों में जनवरी माह में आने वाला पंच-दिवसीय पोंगल प्रमुख है। इसके अलावा, सभी मुख्य त्योहार, जैसे दीवाली, ईद, क्रिसमस आदि भी हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं। तमिल व्यंजनों में शाकाहारी और माँसाहारी दोनों ही व्यंजनों का सम्मिलन है। नगर में विभिन्न स्थानों पर अल्पाहार या टिफ़िन भी उपलब्ध हैं, जिनमें पोंगल, दोसा, इडली, वड़ा, आदि मिलते हैं, जिनको गरमागरम या ठंडी कॉफ़ी के साथ परोसा जाता है।
अर्थव्यवस्था
चेन्नै दक्षिण भारत के प्रमुख व्यवसाय-वाणिज्य एवं यातायात का केन्द्र है। १९वीं शताब्दी के अन्त में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना चेन्नै में हुई। चेन्नै के निकट पेरांबूर में भारत सरकार द्वारा एशिया का सबसे विशाल रेल्वे डिब्बा निर्माण का कारखाना इंटिग्रल कोच बिल्डिंग फ़ैक्ट्री को स्थापित किया गया है। यहाँ के उद्योगों में सूती वस्त्र उद्योग, रासायनिक उद्योग, काग़ज़ एवं कागज से निर्मित वस्तुओं के उद्योग, मुद्रण यंत्र एवं इससे सम्बन्धित उद्योग, चमड़ा, डीज़ल इंजन, मोटरगाड़ी, साइकिल, सिमेंट, चीनी, दियासलाई, रेल के डिब्बे तैयार करने के उद्योग, आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के उद्योग एवं कारखाने चेन्नै में उपस्थित हैं। इनमें इंटिग्रल कोच फ़ैक्ट्री, हिन्दुस्तान टेलिप्रिंटर, चेन्नै रिफ़ाइनरी एवं चेन्नै फ़र्टिलाइज़र आदि प्रमुख हैं। मद्रास पेट्रिकेमिकल्ज़ में पेट्रो-रसायन पदार्थ का उत्पादन होता है।
जनसांख्यिकी
चेन्नै के वासी को अंग्रेज़ी में चेन्नैयाइट और हिन्दी में प्रायः मद्रासी कह दिया जाता है। २००१ में भारत की जनगणना के अनुसार चेन्नै नगर की जनसंख्या ४३.४ लाख थी, जबकि कुल महानगरीय जनसंख्या ७०.४ लाख थी।[46] २००६ की अनुमानित महानगरीय जनसंख्या ४५ लाख आयी है।[47] २००१ में नगर का जनसंख्या घनत्व २४,६८२ वर्ग किमी (६३,९२६ प्रति वर्ग मील) था, जबकि महानगरीय क्षेत्र का घनत्व ५,९२२ प्रति वर्ग किमी था, जिससे यह विश्व के सर्वोच्च जनसंख्या वाले नगरों में गिना जाने लगा।[46][48] यहाँ का लिंग अनुपात ९५१ स्त्रियाँ/१००० पुरुष है,[49] जो राष्ट्रीय औसत ९४४ से कुछ अधिक ही है।[50] नगर की औसत साक्षरता दर ८०.१४% है,[51] जो राष्ट्रीय औसत दर ६४.५% से कहीं अधिक है। नगर में झुग्गी-झोंपड़ी निवासियों की जनसंख्या भारत के अन्य महानगरों के मुकाबले चौथे स्थान पर आती है, जिसमें ८,२०,००० लोग (कुल जनसंख्या का १८.६%) लोग हैं।[52] यह संख्या भारत की कुल जनसंख्या का ५% है। २००५ में नगर में अपराध दर ३१३.३ प्रति १ लाख व्यक्ति थी, जो भारत के सभी प्रधान नगरों में हुए अपराधों का ६.२% है।[53] ये आंकड़े २००४ से ६१.८% बढ़े हैं।[54]
चेन्नै में तमिल लोग बहुसंख्यक हैं। यहाँ की मुख्य भाषा तमिल ही है। व्यापार, शिक्षा और अन्य अधिकारी वर्ग के व्यवसायों एवं नौकरियों में अंग्रेज़ी मुख्यता से बोली जाती है। इनके अलावा, कम किंतु गणनीय संख्या तेलुगु तथा मलयाली लोगों की भी है।[55] चेन्नै में तमिलनाडु के अन्य भागों व भारत के सभी भागों से आये लोगों की भी अच्छी संख्या है। २००१ के आँकड़ों के अनुसार, नगर के ९,३७,००० प्रवासियों (चेन्नै की कुल जनसंख्या का २१.५७%) में से; ७४.५% राज्य के अन्य भागों से आये थे, २३.८% देश के अन्य भागों से तथा १.७% विदेशियों की जनसंख्या थी।[56]
कुल जनसंख्या में ८२.२७% हिन्दू, ८.३७% मुस्लिम, ७.६३% ईसाई और १.०५% जैन हैं।[57]
यातायात
चेन्नै दक्षिण भारत के प्रवेशद्वार की भाँति प्रतीत होता है, जिसमें अन्ना अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल एवं कामराज अन्तर्देशीय टर्मिनल सहित चेन्नै अंतरराष्ट्रीय विमानपट्टनम भारत का तीसरा व्यस्ततम विमानक्षेत्र है।[58][59] चेन्नै नगर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया, मध्य पूर्व, यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका के प्रधान बिंदुओं पर ३० से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं से जुड़ा हुआ है। यह विमानक्षेत्र देश का दूसरा व्यस्ततम कार्गो टर्मिनस है। वर्तमान विमानक्षेत्र में अधिक आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा श्रीपेरंबुदूर में नया ग्रीनफ़ील्ड एयरपॉर्ट लगभग ₹२००० करोड़ की लागत से बनना तय हुआ है।[60]
नगर में दो प्रधान सागरपत्तन (बंदरगाह) हैं, चेन्नै पॉर्ट जो सबसे बड़े कृत्रिम बंदरगाहों में एक है, तथा एन्नोर पोर्ट। चेन्नै पॉर्ट बंगाल की खाड़ी में सबसे बड़ा बंदरगाह और भारत का दूसरा सबसे बड़ा सागरीय-व्यापार केन्द्र है, जहाँ ऑटोमोबिल, मोटरसाइकिल, सामान्य औद्योगिक माल और अन्य थोक खनिज की आवाजाही होती है।[61] मुम्बई के बाद भारत का यही सबसे बड़ा पत्तन है। इस कृत्रिम बन्दरगाह में जलयानों के लंगर डालने के लिए कॉन्क्रीट की मोटी दीवारें सागर में खड़ी करके एक साथ दर्जनों जलयानों के ठहराने योग्य पोताश्रय बना लिया गया है। दक्षिणी भारत का सारा दक्षिण-पूर्वी भाग (तमिलनाडु, दक्षिणी आन्ध्र प्रदेश तथा कर्नाटक राज्य) इसकी पृष्ठभूमि है। यहाँ मुख्य निर्यात मूँगफली और इसका तेल, तम्बाकू, प्याज़, कहवा, अरबरक, मैंग्नीज़, चाय, मसाला, तिलहन, चमड़ा, नारियल, इत्यादि हैं तथा आयात में कोयला, पट्रोलियम, धातु, मशीनरी, लकड़ी, कागज़, मोटर-साइकिल, रसायन, चावल और खाद्यान्न, लम्बे रेशे वाली कपास, रासायनिक पदार्थ, आदि प्रमुख हैं। एक छोटा बंदरगाह रोयापुरम में भी है, जो स्थानीय मछुआरों और जलपोतों द्वारा प्रयोग होता है। पूर्वी तट पर चेन्नै की महत्वपूर्ण स्थिति ने प्राकृतिक सुविधा के अभाव में भी कृत्रिम व्यवस्था द्वारा एक पत्तन का विकास पाया है। एक बन्दरगाह होने के कारण से यह कोलकाता, विशाखापट्टनम, कोलम्बो, रंगून, पॉर्ट ब्लेयर आदि स्थानों से समुद्री मार्ग द्वारा सम्बद्ध है।
आज रेलमार्गों और सड़कों के मुख्य जंक्शन होने के कारण से, यह नगर देश के विभिन्न नगरों से जुड़ा हुआ है। यह वायु मार्ग द्वारा बेंगलूरु, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद आदि देश के विभिन्न नगरों से जुड़ा हुआ है। चेन्नै देश के अन्य भागों से रेल द्वारा भी भली-भाँति जुड़ा हुआ है। यहाँ से, पाँच मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग नगर को मुंबई, कोलकाता, तिरुचिरापल्ली, तिरुवल्लुर, तिंडिवनम और पुदुचेरी को जोड़ते हैं।[62] चेन्नै मोफ़स्सिल बस टर्मिनस शहर की सभी अन्तर्राज्यीय बस सेवाओं का अड्डा है। यह एशिया का सबसे बड़ा बस-अड्डा है।[63] सात सरकारी यातायात निगम अन्तर-नगरीय और अन्तर्राज्यीय बस सेवाएँ संचालित करते हैं। बहुत-सी निजी बस सेवाएँ भी चेन्नै को अन्य नगरों से सुलभ कराती हैं।
चेन्नै दक्षिण रेलवे का मुख्यालय है। नगर में दो मुख्य रेलवे टर्मिनल हैं। चेन्नै सेंट्रल रेऽलवे स्टेशन, जहाँ से सभी बड़े नगरों जैसे मुंबई, कोलकाता, बेंगलूरु, दिल्ली, हैदराबाद, कोच्चि, कोयंबतूर, तिरुवनंतपुरम, इत्यादि के लिए रेल-सुविधा उपलब्ध हैं।[64] चेन्नै एगमोर रेलवे स्टेशन से प्रायः तमिलनाडु के नगरों की रेल सेवाएँ ही उपलब्ध हैं। कुछ निकटवर्ती राज्य के नगरों की भी रेलगाड़ियाँ यहाँ से चलती हैं।[65]
नगर में लोक यातायात हेतु बस, रेल, ऑटोरिक्शा आदि सर्वसुलभ साधन हैं। चेन्नै उपनगरीय रेलवे नेट्वर्क भारत में सबसे पुराना है। इसमें चार ब्रॉड गेऽज वाले रेऽल क्षेत्र हैं, जो नगर में दो स्थानों चेन्नै सेंट्रल और चेन्नै बीच रेलवे स्टेशन पर मिलते हैं। इन टर्मिनल से नगर में निम्न सेक्टरों के लिए नियमित सेवाएँ उपलब्ध हैं:
- चेन्नै सेंट्रल/चेन्नै बीच - अरक्कोणम - तिरुट्टनी (चेन्नै उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन)
- चेन्नै सेंट्रल/ चेन्नै बीच – गुम्मिडीपूंडी - सुलुरपेट (चेन्नै उपनगरीय रेलवे)
- चेन्नै बीच – तांबरम - चेंगलपट्टू - तिरुमलैपुर (काँचीपुरम) (चेन्नै उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन)
- चौथा सेक्टर भूमि से उच्च स्तर पर है और चेन्नै बीच को वेलाचेरी से जोड़ता है और शेष जाल से भी जुड़ा हुआ है।
चेन्नै मेट्रो चेन्नै के लिए अनुमोदित एक त्वरित यातायात सेवा है। इसके प्रथम चरण में दो लाइनें प्रयोग में है एवं अन्य लाइनों का कार्य निर्माणाधीन है। इस पूरी परियोजना में, पहले चरण के दो गलियारों की लागत ₹१४,६०० करोड़ है, जो ५०.१ किमी तक लंबे हैं। २००७ के आकलन से ₹९,५९६ करोड़ की लागत आयी थी।[66]
मेट्र'पॉलिटन ट्रांसपॉर्ट कॉर्पिरेशन (एमटीसी) नगर में बस यातायात संचालित करता है। निगम का २७७३ बसों का बेड़ा २८८ मार्गों पर ३२.५ लाख यात्रियों को दैनिक परिवहन उपलब्ध कराता है।[67]
नगर के बहुत से मार्गों पर मैक्सी कैब नाम से वैन और सवारी भाड़े पर ऑटोरिक्शा भी चलते हैं, जो बस सेवा का विकल्प देते हैं। चेन्नै की यातायात संरचना अच्छा संपर्क उपलब्ध कराती है, किंतु बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ-साथ यातायात संकुलन और प्रदूषण की समस्याएँ भी खड़ी हो गयी हैं। प्रशासन ने इन समस्याओं के समाधान के लिए फ़्लाइओवर तथा ग्रेऽड-सेपिरेटर निर्माण किये हैं, जिनका शुभारंभ १९७३ में जेमिनाइ फ़्लाइओवर से नगर की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अन्ना सालै से हुआ था।[68][69] और हाल ही में तैयार हुई इस शृंखला की नवीनतम कड़ी काठीपाड़ा फ़्लाइओवर है।
शिक्षा
चेन्नै में सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के विद्यालय हैं। शिक्षा का माध्यम तमिल अथवा अंग्रेज़ी है। अधिकांश विद्यालय तमिलनाडु राज्य शिक्षा मंडल या केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बॉर्ड (सीबीएसई) से जुड़े हैं।[70] नगर में कुल १,३८९ विद्यालय हैं, जिनमें से ७३१ प्राथमिक, २३२ माध्यमिक और ४२६ उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं।[71]
इंजिनियरिंग शिक्षा के लिए, चेन्नै में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, १७९४ में स्थापित कॉलिज ऑव इंजिनियरिंग, गिंडी, १९४९ में स्थापित मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान और एस आर एम विश्वविद्यालय जाने माने संस्थान हैं। अधिकांश इंजिनियरिंग महाविद्यालय अन्ना विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। मद्रास मेडिकल कॉलिज, स्टैनली मेडिकल कॉलिज, किलपॉक मेडिकल कॉलिज और एस आर. एम. मेडिकल कॉलिज एवं अनुसंधान संस्थान चेन्नै के प्रमुख चिकित्सा महाविद्यालय हैं।
विज्ञान, कला एवं वाणिज्य क्षेत्र में शिक्षा प्रदान कराने वाले अधिकांश महाविद्यालय मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। मद्रास विश्वविद्यालय की नगर में तीन परिसर हैं। मद्रास क्रिश्चन कॉलिज, लॉयला कॉलिज, द न्यू कॉलिज और पेट्रिशन कॉलिज कुछ प्रसिद्ध स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय हैं। चेन्नै में कई अनुसंधान केन्द्र भी हैं।
खेल-कूद
चेन्नै नगर विविध खेलों के लिए प्रसिद्ध है। नगर ने भारत को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिये हैं। एस वेंकट राघवन और कृष्णम्माचारी श्रीकांत ने क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।[72][73] इंग्लैंड के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी नासिर हुसैन का जन्म भी चेन्नै में हुआ था। एम आर एफ़ पेस फ़ाउंडेशन गेंदबाज़ी शिक्षा-संबंधी संस्था है, जो सन १९८७ से चेन्नै में संचालित हो रही है। इंडियन प्रेमियर लीग में चेन्नै के स्थानीय टीम का नाम चेन्नै सूपर किंग्ज़ है, जिसके कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं। चेपुक में स्थित एम ए चिदंबरम स्टेडियम भारत के सबसे पुराने क्रिकेट के मैदानो में से एक है।[74]
मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम हॉकी का एक लोकप्रिय मैदान है। यहाँ एशिया कप एवं चैंपियंज़ ट्रोफ़ी जैसी प्रमुख हॉकी प्रतियोगिताएँ हो चुकी हैं।[75][76]
प्रेमियर हॉकी लीग में चेन्नै का प्रतिनिधित्व चेन्नै वीरंज़ नामक एक टीम करती है।
चेन्नै ओपन चेन्नै में आयोजित होने वाली एक प्रसिद्ध टेनिस प्रतियोगिता है। यह भारत की एक मात्र एटीपी प्रतियोगिता है। विजय अमृतराज और रमेश कृष्णन प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी हैं, जो चेन्नै से संबंध रखते हैं।[77][78][79][80]
सन १९९५ में चेन्नै साउथ एशन गेम्ज़ का मेज़बान रहा है।[81]
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम फ़ुटबॉल एवं ऐथिलेटिक स्पर्धाओं के लिए उपयोग होता है। कई अन्य स्पर्धाएँ, जैसे वॉलिबॉल, बास्किटबॉल और टेबल टेनिस का आयोजन, इसी स्टेडियम में होता है। जल क्रीड़ा स्पर्धाओं का आयोजन वेलाचेरी अक्वेटिक कॉम्प्लेक्स में होता है।
कार दौड़ प्रतियोगिताओं में चेन्नै का नाम भारत में सर्वप्रथम लिया जाता है। श्रीपेरम्बदूर में स्थित इरुन्गट्टुकोट्टाइ में एक रेऽस ट्रैक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कार रेऽस प्रतियोगिता के लिए उपयोग में लाया जाता है।[82] घुड़दौड़ गिंडी रेऽस कॉर्स में होती है। मद्रास बोट क्लब नौकायान प्रतियोगिता को करवाता है। चेन्नै में दो गोल्फ़ मैदान हैं: कॉस्मिपॉलिटन क्लब और जिम क्लब। विश्वप्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथ आनंद का बचपन भी चेन्नै में बीता है।[83][84][85]
२००६ राष्ट्रमंडल खेलों में टेबल टेनिस में स्वर्ण जीतने वाले शरद कमाल[86] और दो बार की विश्व कैरम विजेता मारिया इरुदयम भी चेन्नै के निवासी हैं।[87]
पर्यटन
चेन्नै को सूपर प्रसारित नगर कहते हैं। यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल हैं, जिनमें मद्रास विश्वविद्यालय, चेपक महल, मत्स्य पालन केंद्र, कपिलेश्वर और पार्थसारथी का मंदिर, अजायबघर और चिड़ियाघर आदि प्रमुख हैं। चेन्नै का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण है सेंट जॉर्ज फ़ॉर्ट। इसे सन् १६४० में ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिंस डे ने बनाया था। यह क़िला ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक केंद्र था। १५० वर्षों तक यह युद्धों और षड्यंत्रों का केंद्र बना रहा। इस क़िले में पुरानी सैनिक छावनी, अधिकारियों के मकान, सेंट मेअरी गिरजाघर एवं रॉबर्ट क्लाइव़ का घर है। सेंट मेअरी गिरजाघर अंग्रेज़ों द्वारा भारत में बनवाया गया सबसे पुराना चर्च माना जाता है।
चेन्नै का मरीना बीच पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। यह विश्व का दूसरा सबसे लंबा समुद्र तट है। इसके दो सौ से तीन सौ गज चौड़े रेतीले तट पर शाम को इतनी अधिक भीड़ होती है कि लगता है, मानो सारा नगर वहीं आ गया है। सारे दिन की थकान से चेन्नैवासी शाम को मरीना बीच के किनारे भ्रमण करके मुक्ति पाते हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए मरीना बीच पर एक स्वीमिंग पूल है, जो दुर्घटनाओं को घटने से रोकता है, क्योंकि यहाँ समुद्र की गहराई और लहरों का तेज प्रवाह ख़तरनाक है। शार्क मछलियों की अधिकता भी है, अतः स्नान या तैरने के लिए स्वीमिंग पूल का ही लाभ लेना चाहिए। इसी के पास एक मछलीघर भी है, जिसमें तरह-तरह की देशी-विदेशी मछलियाँ दर्शनार्थ रखी गयी हैं। मरीना तट का उत्तरी भाग पूर्व मुख्यमंत्री अन्नादुरै के समाधि-स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ लोगों को श्रद्धानवत होते देखा जा सकता है। साथ में, एम.जी.आर. स्मारक भी है, जिसका प्रवेश द्वार दो विशाल हाथी दाँत के रूप में बनाया गया है। यहाँ एक मशाल हमेशा प्रज्ज्वलित रहती है।
चेन्नै का स्नेक पार्क भी पर्यटकों को प्रभावित करता है। यह अपनी तरह का एक अलग ही पार्क है, जिसका निर्माण रोमुलस विटेकर नामक एक अमेरिकी ने किया था। यह ५०० से भी ज़्यादा ख़तरनाक भारतीय साँपों का जीवित संग्रहालय कहा जा सकता है। रेंगते हुए ये विषधर भय मिश्रित रोमांच पैदा करते हैं। यहाँ पर साँपों के अलावा सरीसृप वर्ग के अन्य जीव, जैसे मगरमच्छ, घड़ियाल इत्यादि भी रखे गये हैं। चेन्नै महानगर की कलात्मक संस्कृति के दर्शन पैंथियान रोड स्थित नैशनल आर्ट गैलिरी में सहज ही किये जा सकते हैं।
धार्मिक दृष्टिकोण से संपूर्ण दक्षिण भारत एक तीर्थ है, जहाँ वास्तुकला और मूर्तिकला के अद्वितीय उदाहरण हैं। इन मंदिरों में भव्यता और कलाशिल्प देखने योग्य है। उत्तर भारत से एकदम अलग शैली के मंदिर होने के बावजूद श्रद्धा और भक्ति में ये समस्त भारतीय आस्तिकों को आकर्षित करते हैं। तिरुचिरापल्ली में स्थित पार्थ सारथी मंदिर का उल्लेख है, जिसका निर्माण आठवीं शताब्दी में राजा पल्लव ने करवाया था। इस देवस्थान की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियाँ अंकित हैं। दूसरा आकर्षक मंदिर है, द्राविड़ शिल्पकला में निर्मित मिलापोर में स्थित कालीश्वर मंदिर। यहाँ माता पार्वती की उपासना की गाथा अंकित है। समुद्र की रेत से तपता यह क्षेत्र अत्यंत गर्म जलवायु लिये हुए है, जो केले, नारियल और पाम के पेड़ों से ख़ूबसूरत लगता है।
चित्र दीर्घा
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मलयापुर कपिलेश्वर मंदिर
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चेन्नै महानगर पालिका भवन
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एम. ए. चिदंबरम क्रिकिट स्टेडियम
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चेन्नै में स्थित राष्ट्रीय कला दीर्घा
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अड्यार नदी के तट पर स्थित चेट्टिनाड महल
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सान्तोम बासेलिका
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मरीना बीच पर स्थित अन्ना समाधि का प्रवेशद्वार
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै के प्रवेशद्वार पर लगा संस्था का प्रतीक चिह्न