गोवा (कोंकणी: गोंय, अंग्रेज़ी: Goa), क्षेत्रफल के अनुसार से भारत का सबसे छोटा और जनसंख्या के अनुसार चौथा सबसे छोटा राज्य है। पूरी दुनिया में गोवा अपने सुन्दर समुद्र के किनारों और प्रसिद्ध स्थापत्य के लिये जाना जाता है। गोवा पहले पुर्तगाल का एक उपनिवेश था। पुर्तगालियों ने गोवा पर लगभग 450 सालों तक शासन किया और 19 दिसंबर 1961 में यह भारतीय प्रशासन को सौंपा गया।
गोवा (कोंकणी: गोंय, अंग्रेज़ी: Goa), क्षेत्रफल के अनुसार से भारत का सबसे छोटा और जनसंख्या के अनुसार चौथा सबसे छोटा राज्य है। पूरी दुनिया में गोवा अपने सुन्दर समुद्र के किनारों और प्रसिद्ध स्थापत्य के लिये जाना जाता है। गोवा पहले पुर्तगाल का एक उपनिवेश था। पुर्तगालियों ने गोवा पर लगभग 450 सालों तक शासन किया और 19 दिसंबर 1961 में यह भारतीय प्रशासन को सौंपा गया।
नाम का उद्भव
महाभारत में गोवा का उल्लेख गोपराष्ट्र यानि गोप (अहीरों के देश के रूप में मिलता है। दक्षिण कोंकण क्षेत्र का उल्लेख गोवाराष्ट्र के रूप में पाया जाता है। संस्कृत के कुछ अन्य पुराने स्त्रोतों में गोवा को गोपकपुरी और गोपकपट्टन कहा गया है जिनका उल्लेख अन्य ग्रंथों के अलावा हरिवंशम और स्कंद पुराण में मिलता[8] है। गोवा को बाद में कहीं कहीं गोअंचल भी कहा गया है। अन्य नामों में गोवे, गोवापुरी, गोपकापाटन औरगोमंत प्रमुख हैं। टोलेमी ने गोवा का उल्लेख वर्ष 200 के आस-पास गोउबा के रूप में किया है। अरब के मध्युगीन यात्रियों ने इस क्षेत्र को चंद्रपुर और चंदौर के नाम से इंगित किया है जो मुख्य रूप से एक तटीय शहर था। जिस स्थान का नाम पुर्तगाल के यात्रियों ने गोवा रखा वह आज का छोटा सा समुद्र तटीय शहर गोअ-वेल्हा है। बाद में उस पूरे क्षेत्र को गोवा कहा जाने लगा जिस पर पुर्तगालियों ने कब्जा किया।
जनश्रुति के अनुसार गोवा जिसमें कोंकण क्षेत्र भी शामिल है (और जिसका विस्तार गुजरात से केरल तक बताया जाता है) की रचना भगवान परशुराम ने की थी। कहा जाता है कि परशुराम ने एक यज्ञ के दौरान अपने बाणो की वर्षा से समुद्र को कई स्थानों पर पीछे धकेल दिया था और लोगों का कहना है कि इसी वजह से आज भी गोवा में बहुत से स्थानों का नाम वाणावली, वाणस्थली इत्यादि हैं। उत्तरी गोवा में हरमल के पास आज भूरे रंग के एक पर्वत को परशुराम के यज्ञ करने का स्थान माना जाता है।
इतिहास
गोवा के लंबे इतिहास की शुरुआत् तीसरी सदी इसा पूर्व से शुरू होता है जब यहाँ मौर्य वंश के शासन की स्थापना हुई थी। बाद में पहली सदी के शुरुआत में इस पर कोल्हापुर के सातवाहन वंश के शासकों का अधिकार स्थापित हुआ और फिर बादामी के चालुक्य शासकों ने इस पर वर्ष 580 से 750 तक राज किया। इसके बाद के सालों में इस पर कई अलग अलग शासकों ने अधिकार किया। वर्ष 1312 में गोवा पहली बार दिल्ली सल्तनत के अधीन हुआ लेकिन उन्हें विजयनगर के शासक हरिहर प्रथम द्वार वहाँ से खदेड़ दिया गया। अगले सौ सालों तक विजयनगर के शासकों ने यहाँ शासन किया और 1469 में गुलबर्ग के बहामी सुल्तान द्वारा फिर से दिल्ली सल्तनत का हिस्सा बनाया गया। बहामी शासकों के पतन के बाद बीजापुर के आदिल शाह का यहाँ कब्जा हुआ जिसने गोअ-वेल्हा को अपनी दूसरी राजधानी बनाया।
जब पुर्तगालियों ने गोवा नगर पर आक्रमण किया उस समय यहां राजा कदंब का शासन था जो जैन धर्मालंबी था राजा कदंब ने कई जैन जिनालय भी बनवाए गोवा के अंदर परंतु पुर्तगाली धर्म आंदोलन के समय कई जिनालय नष्ट भी किए गए एवं धर्म परिवर्तन के लिए 30000 जैन युवाओं को जो कि 14 से 18 वर्ष की आयु तक के थे धर्म परिवर्तन न करने की वजह से तोफ़ के मुंह पर रख कर मौत के घाट उतार दिया था भारत के इतिहास में सबसे अधिक क्रूर नर संहार पुर्तगालियों ने किया था,गोवा के जैन समाज के इन युवाओं न धर्म परिवर्तन के स्थान पर मृत्यु को चुना,कई जैन साधर्मी मंदिरों से प्रतिमा लेकर अन्य स्थानों पर पलायन कर गए,आज खंडहर के रूप में केवल एक ही जिनालय गोवा में विद्यमान है जो कुछ शरारती तत्वों ने कब्जे में ले रखा है। पुर्तगाली शासन के आगमन के पूर्व गोवा की कुल 87 प्रतिशत आबादी जैन थी, कई लोग जिनेंद्र भगवान के दर्शन से काफी समय वंचित रहने के कारण हिंदू बन गए है। गोवा में जैन इतिहास भव्य एवं समृद्ध शाली रहा है।
जिसके कारण यहां की सरकार ने राजा कदंब के धर्म प्रेमी स्वभाव को देख कर गोवा के सभी बस स्टैंड का नाम कदंब बस स्टैंड के नाम से घोषित भी किया है। आज गोवा में जैन जिनालय के रूप में 2 दिगंबर जिनालय है,और 3 श्वेतांबर जिनालय है,1 जैन स्थानकवासी जिनालय है जो कुछ वर्ष पूर्व ही निर्मित हुए है।
1510 में, पुर्तगालियों ने एक स्थानीय सहयोगी, तिमैया की मदद से सत्तारूढ़ बीजापुर सुल्तान यूसुफ आदिल शाह को पराजित किया। उन्होंने वेल्हा गोवा में एक स्थायी राज्य की स्थापना की। यह गोवा में पुर्तगाली शासन का प्रारंभ था जो अगली साढ़े चार सदियों तक चला।
1843 में पुर्तगाली राजधानी को वेल्हा गोवा से पंजिम ले गए। मध्य 18 वीं शताब्दी तक, पुर्तगाली गोवा का वर्तमान राज्य सीमा के अधिकांश भाग तक विस्तार किया गया था।
भारत ने 1947 में अंग्रेजों से स्वतंत्रता प्राप्त की, भारत ने अनुरोध किया कि भारतीय उपमहाद्वीप में पुर्तगाली प्रदेशों को भारत को सौंप दिया जाए।किंतु पुर्तगाल ने अपने भारतीय परिक्षेत्रों की संप्रभुता पर बातचीत करना अस्वीकार कर दिया। पर 19 दिसंबर 1961 को, भारतीय सेना ने गोवा, दमन, दीव के भारतीय संघ में विलय के लिए ऑपरेशन विजय के साथ सैन्य संचालन किया और इसके परिणामस्वरूप गोवा, दमन और दीवभारत का एक केन्द्र प्रशासित क्षेत्र बना। 30 मई 1987 में केंद्र शासित प्रदेश को विभाजित किया गया था, और गोवा भारत का पच्चीसवां राज्य बनाया गया। जबकि दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश ही रहे।
भूगोल
गोवा[9] का क्षेत्रफल 3702 वर्ग किलोमीटर है। गोवा का अक्षांश और देशान्तर क्रमश: 14°53'54" और 73°40'33" E है। गोवा का समुद्र तट 132 किलोमीटर लम्बा है।
गोआ भारत का सबसे छोटा राज्य है।
अर्थ जगत
गोवा का प्रमुख उद्योग पर्यटन है। पर्यटन के आलावा गोवा में लौह खनिज भी विपुल मात्रा में पाया जाता है जो जापान तथा चीन जैसे देशों में निर्यात होता है। गोवा मतस्य (मछली) उद्योग के लिए भी जाना जाता है लेकिन यहाँ की मछली निर्यात नहीं की जाती बल्कि स्थानीय बाजारों में बेची जाती है। यहाँ का काजू सउदी अरब, ब्रिटेन तथा अन्य यूरोपीय राष्ट्रों को निर्यात होता है। पर्यटन के वज़ह से बाकी उद्योग जो पर्यटन पर निर्भर करते है वो भी यहाँ पर जोर शोर से चालू हैं। गोवा में अभी तक सिर्फ़ एक ही विमानपत्तन है और दूसरा अभी बनने वाला है।
लोग और संस्कृति
गोवा करीब करीब 450 साल तक पुर्तगाली शासन के अधीन रहा, इस कारण यहाँ यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव बहुत महसूस होता है। गोवा की लगभग 60% जनसंख्या हिंदू और लगभग 28% जनसंख्या ईसाई है। गोवा की एक खास बात यह है कि, यहाँ के ईसाई समाज में भी हिंदुओं जैसी जाति व्यवस्था पाई जाती है।
गोवा के दक्षिण भाग में ईसाई समाज का ज्यादा प्रभाव है लेकिन वहाँ के वास्तुशास्त्र में हिंदू प्रभाव दिखाई देता है। सबसे प्राचीन मन्दिर गोवा में दिखाई देते है। उत्तर गोवा में ईसाइ कम संख्या में हैं इसलिए वहाँ पुर्तगाली वास्तुकला के नमूने ज्यादा दिखाई देते है।
संस्कृति की दृष्टि से गोवा की संस्कृति काफी प्राचीन है। 1000 साल पहले कहा जाता है कि गोवा "कोंकण काशी" के नाम से जाना जाता था। हालाँकि पुर्तगाली लोगों ने यहाँ के संस्कृति का नामोनिशान मिटाने के लिए बहुत प्रयास किए लेकिन यहाँ की मूल संस्कृति इतनी शक्तिशाली थी की वह ऐसा नहीं कर पाए।
गोवा की भाषा कोंकणी और लिपि देवनागरी है। हिन्दी का भी अधिकाधिक उपयोग होता है। [10]
यातायात
बाहरी
- हवाई: डैबोलिम विमानक्षेत्र यहाँ का घरेलू हवाई अड्डा है जो देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। अभी हाल के वर्षों में गोवा के लिये पणजी हवाई अड्डे से अंतर्राष्ट्रीय उड़ाने भी शुरू हुई हैं।
- सड़क: गोवा मुम्बई, बंगलोर से काफी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, इन शह्रों से गोवा के लिये सीधी लक्जरी बसें चलती हैं। इसके अलावा अन्य नजदीक के शहर भी आप सड़क द्वारा यहाँ से जा सकते हैं।
- रेल: जबसे यहाँ कोंकण रेलवे की शुरुआत हुई है गोवा भारत के पूर्वी तटीय शहरों से जुड़ गया है। कोंकण रेलवे अपनी गति और अच्छी सेवा के लिये पूरे भारत में मशहूर है। इसके अलावा गोवा आने के लिये देश के किसी भी बड़े स्टेशन से आप वास्को द गामा के लिये सीधी रेलगाड़ी पकड़ सकते हैं।
आंतरिक
- टैक्सी बिना मीटर और मीटर वाली टैक्सियाँ यहाँ पर्यटकों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने का सबसे लोकप्रिय साधन है। बिना मीटर वाली टैक्सियों में यात्री पहले से भाड़े के बारे में तय करते हैं।
- बस गोवा में ज्यादातर बसे प्राईवेट चालकों द्वारा चलाई जाती हैं। आम तौर पर बसों में काफी भीड़ होती है। गोवा सरकार द्वारा यहाँ कदम्ब बस सर्विस चलाई जाती है जिनमें धीरे चलनेवाली बसों से लेकर द्रुत सेवा की लंबी दूरी की बसें शामिल होती हैं।
- नाव
पर्यटन
वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही प्रकृति गोवा को कुछ ऐसा ही अलग, लेकिन अदभुत स्वरूप प्रदान करती है। यह स्थान शांतिप्रिय पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को बहुत भाता है। गोवा एक छोटा-सा राज्य है। यहां छोटे-बड़े लगभग 40 समुद्री तट है। इनमें से कुछ समुद्र तट अंर्तराष्ट्रीय स्तर के हैं। इसी कारण गोवा की विश्व पर्यटन मानचित्र के पटल पर अपनी एक अलग पहचान है।
गोवा में पर्यटकों की भीड़ सबसे अधिक गर्मियों के महीनें में होती है। जब यह भीड़ समाप्त हो जाती है तब यहां शुरू होता है ऐसे सैलानियों के आने का सिलसिला जो यहां मानसून का लुत्फ उठाना चाहते हैं।
गोवा के मनभावन बीच की लंबी कतार में पणजी से 16 किलोमीटर दूर कलंगुट बीच, उसके पास बागा बीच, पणजी बीच के निकट मीरामार बीच, जुआरी नदी के मुहाने पर दोनापाउला बीच स्थित है। वहीं इसकी दूसरी दिशा में कोलवा बीच ऐसे ही सागरतटों में से है जहां मानसून के वक्त पर्यटक जरूर आना चाहेंगे। यही नहीं, अगर मौसम साथ दे तो बागाटोर बीच, अंजुना बीच, सिंकेरियन बीच, पालोलेम बीच जैसे अन्य सुंदर सागर तट भी देखे जा सकते हैं। गोवा के पवित्र मंदिर जिनसे श्री कामाक्षी, सप्तकेटेश्वर, श्री शांतादुर्ग, महालसा नारायणी, परनेम का भगवती मंदिर और महालक्ष्मी आदि दर्शनीय है। गोवा में किराए पर बाइक.[11]
मांडवी नदी
पणजी गोवा की राजधानी है। यहां के आधुनिक बाजार भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। मांडवी नदी के तट पर बसे इस शहर में शाम के समय सैलानी रिवर क्रूज का आनन्द लेने पहुंचते हैं। मांडवी पर तैरते क्रूज पर संगीत एवं नृत्य के कार्यक्रम में गोवा की संस्कृति की एक झलक देखने को मिलती है।
गोवा के जिले
गोवा में दो जिले हैं -
- उत्तर गोवा जिला
- दक्षिण गोवा जिला
खेल
गोवा में सबसे लोकप्रिय खेल फुटबाल है। यहाँ कई लोकप्रिय फुटबाल क्लब हैं। इसके अलावा गोवा के बहुत से खिलाड़ी हाकी में भी दिलचस्पी रखते हैं। गोवा में अनेक समुद्रतट हैं . उन्मे से कुछ हैं बागा समुद्रतट, कलांगुते समुद्रतट, कोला समुद्रतट, इतियादी।
इन्हें भी देखें
- गोवा का इतिहास
- गोवा मुक्ति संग्राम
गोवा का पर्यटन
गोवा में विदेशी पर्यटक सर्दियों के मौसम में आते हैं , जबकि गर्मियों और मानसून के मौसम में कई भारतीय पर्यटक आते हैं। विदेशी पर्यटकों में ज्यादातर लोग यूरोप से आते हैं। 2017 में गोवा में कुल पर्यटक 7785693 आये थे जिसमे से 890459 विदेशी पर्यटक तथा 6895234 भारतीय पर्यटक थे, जोकि कुल 22.98% थे।[1] यह अपेक्षाकृत छोटा राज्य भारत के पश्चिमी तट पर, महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमाओं के बीच स्थित है, और भारतीय धरती पर एक पूर्व पुर्तगाली एन्क्लेव के रूप में दुनिया के लिए बेहतर जाना जाता है। इस प्रकार, पर्यटन गोवा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
मौसम
गोवा में पर्यटकों की भीड़ सबसे अधिक गर्मियों के महीनें में होती है। जब यह भीड़ समाप्त हो जाती है तब यहां शुरू होता है ऐसे सैलानियों के आने का सिलसिला जो यहां मानसून का लुत्फ उठाना चाहते हैं। यह पर्यटक गोवा में मानसून की बौछारों के बीच मस्त माहौल का आनंद बटोरने का साहस करते हैं। वैसे गोवा भी मानसून प्रेमी सैलानियों का स्वागत बांहें पसारे करता है। इसका उदाहरण है वहां के होटलों और टूर ऑपरटरों द्वारा दिया जाने वाला डिस्कांउट। जब मानसून सीजन में भूस्खलन के डर से पहाड़ी स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही बंद सी हो जाती है तो ज्यादातर पर्यटक गोवा जैसे स्थानों का रुख करते है।
सागर तटों की बहार
गोवा के मनभावन बीच की लंबी कतार में पणजी से 16 किलोमीटर दूर कलंगुट बीच, उसके पास बागा बीच, पणजी बीच के निकट मीरामार बीच, जुआरी नदी के मुहाने पर दोनापाउला बीच स्थित है। वहीं इसकी दूसरी दिशा में कोलवा बीच ऐसे ही सागरतटों में से है जहां मानसून के वक्त पर्यटक जरूर आना चाहेंगे। यही नहीं, अगर मौसम साथ दे तो बागाटोर बीच, अंजुना बीच, सिंकेरियन बीच, पालोलेम बीच जैसे अन्य सुंदर सागर तट भी देखे जा सकते हैं। [2]
गोवा के समुद्री तट इसकी तटरेखा के लगभग 125 किलोमीटर (78 मील) को कवर करते हैं। इन समुद्र तटों को उत्तरी और दक्षिणी गोवा में बांटा गया है।
उत्तरी गोवा के समुद्र तट
परनेम
क्वेरिम (बीच) समुद्री तट, कालाचा (बीच) समुद्री तट, अरम्बोल (बीच) समुद्री तट, मंड्रेम (बीच) समुद्री तट, अश्वम (बीच) समुद्री तट, मोरजिम (बीच) समुद्री तट
बारदेज़
चापोरा (बीच) समुद्री तट, वागाटोर (बीच) समुद्री तट, ओजरान (बीच) समुद्री तट, अंजुना (बीच) समुद्री तट, बागा (बीच) समुद्री तट, कलंगुट (बीच) समुद्री तट, कैंडोलिम (बीच) समुद्री तट, सिंक्वेरिम (बीच) समुद्री तट, कोको (बीच) समुद्री तट, केगडोले (बीच) समुद्री तट
तिस्वाड़ी
मीरामार (बीच) समुद्री तट, कारंजालेम (बीच) समुद्री तट, डोना पाउला (बीच) समुद्री तट, वैगुइनिम (बीच) समुद्री तट, बम्बोलिम (बीच) समुद्री तट, सिरिदाओ (बीच) समुद्री तट
दक्षिण गोवा समुद्र तट
मोरमुगाओ
बोगमालो बीच, बैना बीच, हंसा बीच, हॉलेंट बीच, कैन्सौलिम बीच, वेलसाओ बीच
साष्टी
एरोसिम बीच, उटोर्डा बीच, माजोर्डा बीच, बेतालबातिम बीच, कोलवा बीच, सेरनाबतिम बीच, बेनौलिम बीच, वरका बीच, कैवेलोसिम बीच, मोबोर बीच, बैतूल बीच
केपेम
कनैगुइनिम बीच
कानाकोना
काबो डी रामा बीच, काकोलेम बीच, धारवलेम बीच, कोला बीच, अगोंडा बीच, पालोलेम बीच, पटनाम बीच, राजबाग बीच, तलपोना बीच, गलगीबाग बीच, पोलेम बीच
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बागा तट
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अंजुना तट
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पालोलेम तट
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मंड्रेम तट
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मोरजिम तट
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वागाटोर तट
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अरामबोल तट
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कोला तट
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क्वेरिम तट
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मोरजिम तट
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बोगमालो तट
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सिंक्वेरिम तट
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कलंगुट तट
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चापोरा तट
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वरका तट
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बेतालबातिम तट
समुद्री विमान सेवा
गोवा सरकार ने 23 मई 2015 को मंडोवी नदी पर एक समुद्री विमान का परीक्षण किया। परीक्षण विमान ने डाबोलिम हवाई अड्डे से उड़ान भरी और सफलतापूर्वक मंडोवी नदी में उतरा। सीप्लेन सेवा 2015 के बाद से मानसून के बाद शुरू हुई थी।[3]
वन्यजीवन
बोंडला वन्यजीव अभयारण्य, भगवान महावीर अभयारण्य और मोलेम राष्ट्रीय उद्यान, कोतीगाव वन्य अभयारण्य, महादेई वन्यजीव अभयारण्य और नेत्रावली वन्यजीव अभयारण्य गोवा की समृद्ध जैव-विविधता को आश्रय देते हैं। गोवा के जंगलों में लोमड़ियां, जंगली सूअर और प्रवासी पक्षी भी पाए जाते हैं। एविफौना में किंगफिशर, मैना और तोते शामिल हैं। प्रसिद्ध दूधसागर जलप्रपात, भारत का पाँचवाँ सबसे ऊँचा 310 मीटर ऊँचा, गोवा-कर्नाटक सीमा पर भगवान महावीर अभयारण्य के अंदर स्थित है।
प्रसिद्ध सलीम अली पक्षी अभयारण्य चोराव द्वीप पर स्थित है। लुप्तप्राय ओलिव रिडले समुद्री कछुआ उत्तरी गोवा के पेरनेम में मोरजिम बीच और दक्षिणी गोवा के कानाकोना में गलगीबागा बीच पर पाया जा सकता है। कछुओं को भारतीय वन्यजीव अधिनियम की अनुसूची I में सूचीबद्ध किया गया है। मोरजिम बीच सितंबर के अंत से अप्रैल की शुरुआत तक कई प्रवासी पक्षियों की मेजबानी भी कर रहा है। मोरजिम के टेम्बवाड़ा में तट के आसपास का क्षेत्र भी पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों में प्रचुर मात्रा में है। क्षेत्र में कई अंतरराष्ट्रीय बर्ड वाचिंग टूर आयोजित किए जाते हैं।
झरने
- दूधसागर जलप्रपात
- अरवलम फॉल्स
- कुस्के फॉल्स
- केसरवल जलप्रपात
- ताम्बडी सुरला जलप्रपात
- चरवणे फॉल्स
नैसर्गिकस सौन्दर्य
जब आप चर्च और मंदिर देखने निकलें तो आपका सामना भव्य लैंडस्केप्स से भी होगा। जब भी आकाश साफ हो या हल्की बौछारों का मौसम हो तो निकल जाइए। पूरे रास्ते भीगा नैसर्गिक सौंदर्य आपको अनोखा सुकून प्रदान करेगा। काली सड़कों के आसपास लाल मिट्टी के मैदान या टीले, यहां वहां दिखते नारियल के ऊंचे दरख्त या धान के खेत प्राकृतिक दृश्यों में मोहक रंग भर देते हैं। आसपास फैली हरियाली में हरे रंग के हल्की गहरी अनेक रोड नजर आती है। गोवा की सड़कों पर लॉन्ग ड्राइव का आनन्द भी लिया जा सकता है। रास्ते में लगे बड़े-बड़े होर्डिग्स भी इन लम्बे रास्तों की शोभा बढ़ाते हैं। मडगांव से 60 कि.मी. दूर दूधसागर फॉल्स भी मानसून में अपने चरम पर होता है। लॉन्ग ड्राइव के शौकीन यहां अवश्य जा पहुंचते हैं। करीब 450 वर्ष के पुर्तगाली उपनिवेश काल में यहां अनेक भव्य चर्च बनाए गए थे, जिनके कारण आज गोवा को भारत का रोम भी कहा जाता है।
मांडवी नदी
पणजी गोवा की राजधानी है। यहां के आधुनिक बाजार भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। मांडवी नदी के तट पर बसे इस शहर में शाम के समय सैलानी रिवर क्रूज का आनन्द लेने पहुंचते हैं। मांडवी पर तैरते क्रूज पर संगीत एवं नृत्य के कार्यक्रम में गोवा की संस्कृति की एक झलक देखने को मिलती है। नदी के दूसरे तट पर मछुआरों की रंगबिरंगी मोटर बोट कतार में खड़ी एक अलग दृश्य बनाती है। पणजी के आसपास और ओल्ड गोवा के लैटिन शैली के पुराने घर भी, आज पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गए हैं।