भारत (आधिकारिक नाम: भारत गणराज्य , अंग्रेज़ी: Republic of India , लिप्यन्तरण: रिपब्लिक् ऑफ़् इण्डिया ) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। भारत भौगोलिक दृष्टि से विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है, जबकि जनसंख्या के दृष्टिकोण से विश्व का सबसे बड़ा देश है [19] । भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल तथा भूटान, पूर्व में बांग्लादेश एवं म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका तथा दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की समुद्री सीमा लगती है। इसके उत्तर में हिमालय पर्वत तथा दक…
भारत (आधिकारिक नाम: भारत गणराज्य, अंग्रेज़ी: Republic of India, लिप्यन्तरण: रिपब्लिक् ऑफ़् इण्डिया) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। भारत भौगोलिक दृष्टि से विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है, जबकि जनसंख्या के दृष्टिकोण से विश्व का सबसे बड़ा देश है[19]। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल तथा भूटान, पूर्व में बांग्लादेश एवं म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका तथा दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की समुद्री सीमा लगती है। इसके उत्तर में हिमालय पर्वत तथा दक्षिण में भारतीय महासागर स्थित है। दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी तथा पश्चिम में अरब सागर है।
१,२०० ईसा पूर्व संस्कृत भाषा संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में फैली हुई थी तथा तब तक यहां पर हिन्दू धर्म का उद्भव हो चुका था एवं ऋग्वेद की रचना भी हो चुकी थी।[20] इसी समय बौद्ध एवं जैन धर्म उत्पन्न हो रहे होते थे।[21]
प्रारम्भिक राजनीतिक एकत्रीकरण ने गंगा बेसिन में स्थित मौर्य तथा गुप्त साम्राज्यों को जन्म दिया।[22]
उनका समाज विस्तृत सृजनशीलता से भरा हुआ था। [23]
प्रारम्भिक मध्ययुगीन काल में, ईसाई धर्म, इस्लाम, यहूदी धर्म और पारसी धर्म ने भारत के दक्षिणी और पश्चिमी तटों पर जड़ें जमा लीं।[24] मध्य एशिया से मुस्लिम सेनाओं ने भारत के उत्तरी क्षेत्रों पर लगातार अत्याचार किया,[25] अन्ततः दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई एवं उत्तर भारत को मध्यकालीन इस्लाम साम्राज्य में मिला लिया गया।[26] १५ वीं शताब्दी में, विजयनगर साम्राज्य ने दक्षिण भारत में एक लंबे समय तक चलने वाली समग्र हिन्दू संस्कृति बनाई।[27] पंजाब में सिख धर्म की स्थापना हुई।[28] धीरे-धीरे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का विस्तार हुआ, जिसने भारत को औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में परिवर्तित कर दिया तथा अपनी सम्प्रभुता को भी प्रबल किया।[29] ब्रिटिश राज शासन १८५८ में आरम्भ हुआ। धीरे धीरे एक प्रभावशाली राष्ट्रवादी आंदोलन आरम्भ हुआ जिसे अहिंसक विरोध के लिए जाना गया तथा ब्रिटिश शासन को समाप्त करने का प्रमुख कारक बन गया।[30] १९४७ में ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य को दो स्वतंत्र प्रभुत्वों में विभाजित किया गया, भारतीय अधिराज्य तथा पाकिस्तान अधिराज्य, जिन्हें धर्म के आधार पर विभाजित किया गया।[31][32]
१९५० से भारत एक संघीय गणराज्य है। भारत की जनसंख्या १९५१ में ३६.१ करोड़ से बढ़कर 2०११ में १२१.१ करोड़, 2०२१ में बढ़कर १४०.७६ करोड़ हो गई।[33] प्रति व्यक्ति आय $६४ से बढ़कर $१,४९८, २०२०- २१ में $२१५०, आरम्भिक २०२२- २३ में $२४५० हो गई तथा इसकी साक्षरता दर १६.६% से बढ़कर ७४.०४% पुरुषों के लिए एवम् ६४% महिलाओं की हो गई। भारत एक तीव्रता से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था एवं सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं का केंद्र बन गया है।[34] अन्तरिक्ष क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय तथा अद्वितीय प्रगति की। भारतीय फ़िल्में, सङ्गीत तथा आध्यात्मिक शिक्षा वैश्विक संस्कृति में विशेष भूमिका निभाती हैं।[35] भारत ने निर्धनता दर को पर्याप्त सीमा तक न्यून कर दिया है।[36] भारत देश परमाणु बम रखने वाला देश है। भारत-चीन सीमा पर भारत का चीन से विवाद चल रहा है। कश्मीर क्षेत्र को लेकर भारत एवं पाकिस्तान में विवाद है।[37] लैंगिक असमानता, बाल शोषण, बाल कुपोषण,[38] निर्धनता, भ्रष्टाचार, प्रदूषण इत्यादि भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ है।[39] २१.४% क्षेत्र पर वन है।[40] भारत के वन्यजीव, जिन्हें परम्परागत रूप से भारत की संस्कृति में सहिष्णुता के साथ देखा गया है,[41] इन जङ्गलों तथा अन्य स्थानों पर संरक्षित आवासों में निवास करते हैं।
१२ फ़रवरी वर्ष १९४८ में महात्मा गाँधी के अस्थि कलश जिन १२ तटों पर विसर्जित किए गए थे, त्रिमोहिनी सङ्गम भी उनमें से एक है |
नामोत्पत्ति
भारत के दो आधिकारिक नाम हैं- हिन्दी में भारत और अंग्रेज़ी में इण्डिया (India)। इण्डिया नाम की उत्पत्ति सिंधु नदी के अंग्रेज़ी नाम "इण्डस" से हुई है।[42] श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार भारत नाम मनु के वंशज तथा ऋषभदेव के सबसे बड़े पुत्र एक प्राचीन सम्राट भरत के नाम से लिया गया है। [43][44][45][46][47][48] एक व्युत्पत्ति के अनुसार भारत (भा+रत) शब्द का अर्थ है आंतरिक प्रकाश अथवा विदेक-रूपी प्रकाश में लीन। एक तीसरा नाम हिन्दुस्तान भी है जिसका अर्थ हिन्द की भूमि, यह नाम विशेषकर अरब तथा ईरान में प्रचलित हुआ। [49] [50] बहुत पहले भारत का एक मुंहबोला नाम सोने की चिड़िया भी प्रचलित था। [51] संस्कृत महाकाव्य महाभारत में वर्णित है कि वर्तमान उत्तर भारत का क्षेत्र भारत के अन्तर्गत आता था। भारत को कई अन्य नामों इण्डिया, भारतवर्ष, आर्यावर्त, हिन्द, हिन्दुस्तान, जम्बूद्वीप आदि से भी जाना जाता है।
इतिहास
प्राचीन भारत
भारत का इतिहास अत्यन्त प्राचीन एवं समृद्ध रहा है, जिसमें सिन्धु घाटी सभ्यता से लेकर मौर्य एवं गुप्त साम्राज्यों तथा स्वतन्त्रता सङ्ग्राम तक अनेक महत्वपूर्ण चरण सम्मिलित हैं। लगभग ५५,००० वर्ष पूर्व (प्राचीन भारत) [52] आधुनिक मानव अथवा होमो सेपियंस अफ्रीका से भारतीय उपमहाद्वीप में पहुँचे थे। [53][54][55] दक्षिण एशिया में ज्ञात मानव का प्राचीनतम अवशेष ३०,००० वर्ष पुराना है।[56] भीमबेटका, मध्य प्रदेश की गुफाएँ भारत में मानव जीवन का प्राचीनतम प्रमाण हैं जो आज भी देखने को मिलता है। प्रथम स्थायी बस्तियों ने ९००० वर्ष पूर्व स्वरुप लिया था। ६,५०० ईसा पूर्व तक आते आते मनुष्य ने कृषि करना, पशुओं को पालना तथा घरों का निर्माण करना आरम्भ कर दिया था, जिसका अवशेष मेहरगढ़ में मिला था जो कि अभी पाकिस्तान में है। [57] यह धीरे-धीरे सिंधु घाटी सभ्यता के रूप में विकसित हुए,[58][57] जो की दक्षिण एशिया की सबसे प्राचीन नगरीय सभ्यता है।[59] यह 2600 ईसा पूर्व और 1900 ईसा पूर्व के मध्य अपने चरम पर थी।[60] यह वर्तमान पश्चिम भारत तथा पाकिस्तान में स्थित है।[61] यह मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, धोलावीरा, और कालीबंगा जैसे नगरों के आसपास केंद्रित थी तथा विभिन्न प्रकार के निर्वाह पर निर्भर थी, यहाँ व्यापक बाजार था तथा शिल्प उत्पादन होता था।[59]
२००० से ५०० ईसा पूर्व तक ताम्र पाषाण युग संस्कृति से लौह युग का आगमन हुआ।[62] इसी युग को हिन्दू धर्म से जुड़े प्राचीनतम धर्म ग्रंथ,[63] वेदों का रचनाकाल माना जाता है[64] तथा पंजाब एवं गंगा के ऊपरी मैदानी क्षेत्र को वैदिक संस्कृति का निवास स्थान माना जाता है।[62] कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसी युग में उत्तर-पश्चिम से भारतीय-आर्यन का आगमन हुआ था।[63] इसी अवधि में जाति प्रथा भी आरम्भ हुई थी।[65]
वैदिक सभ्यता में ईसा पूर्व ६वीं शताब्दी में गंगा के क्षेत्रीय क्षेत्र तथा उत्तर-पश्चिम भारत में छोटे-छोटे राज्य तथा उनके प्रमुख मिलकर १६ कुलीन राजशाही में सम्मिलित हुए जिन्हे महाजनपद के नाम से जाना जाता है। [66] [67] बढ़ते नगरीकरण के मध्य दो अन्य स्वतन्त्र अवैदिक धर्मों का उदय हुआ। महावीर के जीवन काल में जैन धर्म अस्तित्व में आया।[68] गौतम बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित बौद्ध धर्म ने मध्यम वर्ग के अनुयायियों को छोड़कर अन्य सर्व वर्ग के लोगों को आकर्षित किया; इसी काल में भारत का इतिहास लेखन प्रारम्भ हुआ। [69][70][71] बढ़ती नगरीय सम्पदा के युग में, दोनों धर्मों ने त्याग को एक आदर्श माना,[72] तथा दोनों ने लंबे समय तक चलने वाली मठ परंपराओं की स्थापना की। राजनीतिक रूप से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक मगध साम्राज्य ने अन्य राज्यों को अपने अन्दर मिलाकर मौर्य साम्राज्य के रूप में उभरा। [73] मगध ने दक्षिण भारत के कुछ भागों को छोड़कर पूर्ण भारत पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया किन्तु कुछ अन्य प्रमुख बड़े राज्यों ने इसके प्रमुख क्षेत्रों को पृथक कर लिया। [74][75] मौर्य राजाओं को उनके साम्राज्य की उन्नति हेतु तथा उच्च जीवन स्तर हेतु जाना जाता है क्योंकि सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म की स्थापना की तथा शस्त्र मुक्त सेना का निर्माण किया।[76][77]180 ईसवी के आरम्भ से मध्य एशिया से कई आक्रमण हुए, जिनके परिणामस्वरूप उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में यूनानी, शक, पार्थी तथा अन्ततः कुषाण राजवंश स्थापित हुए। तीसरी शताब्दी के आगे का समय जब भारत पर गुप्त वंश का शासन था, भारत का स्वर्णिम काल कहलाया।[78]
तमिल के संगम साहित्य के अनुसार ईसा पूर्व २०० से २०० ईस्वी तक दक्षिण प्रायद्वीप पर चेर राजवंश, चोल राजवंश तथा पांड्य राजवंश का शासन था जिन्होंने बड़े स्तर पर भारत और रोम के व्यापारिक संबंध तथा पश्चिम एवं दक्षिण पूर्व एशिया के साम्राज्यों के साथ व्यापार किया।[79][80] चौथी-पाँचवी शताब्दी के मध्य गुप्त साम्राज्य ने वृहद् गंगा के क्षेत्रीय क्षेत्र में प्रशासन तथा कर निर्धारण की एक जटिल प्रणाली बनाई; यह प्रणाली उपरान्त के भारतीय राज्यों हेतु एक आदर्श बन गयी। [81][82] गुप्त साम्राज्य में भक्ति पर आधारित हिन्दू धर्म का प्रचलन हुआ। [83] विज्ञान, कला, साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र, प्राचीन प्रौद्योगिकी, धर्म, तथा दर्शन इन्हीं राजाओं के शासनकाल में फले-फूले, जो शास्त्रीय संस्कृत में रचा गया। [82]
मध्यकालीन भारत
६०० से १२०० के मध्य का समय क्षेत्रीय राज्यों में सांस्कृतिक उत्थान के युग के रूप में जाना जाता है।[84] कन्नौज के राजा हर्ष ने ६०६ से ६४७ तक गंगा के क्षेत्रीय क्षेत्र में शासन किया तथा उन्होंने दक्षिण में अपने राज्य का विस्तार करने का प्रयास किया किन्तु दक्षिण के चालुक्यों ने उन्हें हरा दिया।[85] उनके उत्तराधिकारी ने पूर्व की ओर राज्य का विस्तार करना चाहा किन्तु बंगाल के पाल शासकों से उन्हें हारना पड़ा।[85] जब चालुक्यों ने दक्षिण की ओर विस्तार करने का प्रयास किया तो पल्ल्वों ने उन्हें पराजित कर दिया, जिनका सुदूर दक्षिण में पांड्यों तथा चोलों द्वारा उनका विरोध किया जा रहा था।[85] इस काल में कोई भी शासक एक साम्राज्य बनाने में सक्षम नहीं था तथा लगातार मूल भूमि की तुलना में दूसरे क्षेत्र की ओर आगे बढ़ने का क्रम जारी था।[84] इस अवधि में नव शासन के कारण जाति में बांटे गए सामान्य कृषकों हेतु कृषि करना और सहज हो गया।[86] जाति व्यवस्था के परिणामस्वरूप स्थानीय मतभेद होने लगे।[86]
६ एवम् ७वीं शताब्दी में, प्रथम भक्ति भजन तमिल भाषा में बनाया गया था। पूर्ण भारत में उनकी नकल की गई तथा हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान एवं इसने उपमहाद्वीप की सर्व आधुनिक भाषाओं के विकास का नेतृत्व किया। राजघरानो ने लोगों को राजधानी की ओर आकर्षित किया। नगरीकरण के साथ नगरों में बड़े स्तर पर मंदिरों का निर्माण किया गया।[87] दक्षिण भारत की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था का प्रभाव दक्षिण एशिया के देशों म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया और जावा में देखा जा सकता है।[88]
१०वीं शताब्दी के बाद घुमन्तु मुस्लिम वंशों ने जातियता तथा धर्म द्वारा संघटित तेज घोड़ों से युक्त विशाल सेना के द्वारा उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों पर बार बार आक्रमण किया, अन्ततः १२०६ इस्लामीक दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई।[89] उन्हें उत्तर भारत को अधिक नियन्त्रित करना था तथा दक्षिण भारत पर आक्रमण करना था। भारतीय कुलीन वर्ग के विघटनकारी साम्राज्य ने बड़े स्तर पर अमुस्लिमों को स्वयं के रीतिपरम्पराओं पर छोड़ दिया।[90][91] १३वीं शताब्दी में मंगोलों द्वारा किये के विनाशकारी आक्रमण से भारत की रक्षा की। सल्तनत के पतन के कारण स्वशासित विजयनगर साम्राज्य का मार्ग प्रशस्त हुआ।[92] एक सशक्त शैव परंपरा तथा सल्तनत की सैन्य प्रौद्योगिकी पर निर्माण करते हुए साम्राज्य ने भारत के विशाल भाग पर शासन किया और इसके पश्चात दीर्घकालिक समय तक दक्षिण भारतीय समाज को प्रभावित किया।[93][92]
प्रारम्भिक आधुनिक भारत
१७वीं शताब्दी के मध्यकाल में पुर्तगाल, डच, फ्रांस, ब्रिटेन सहित अनेक यूरोपीय देशों, जो भारत से व्यापार करने के इच्छुक थे, उन्होंने देश की आन्तरिक शासकीय अराजकता का लाभ उठाया यद्यपि अंग्रेजों ने व्यापार करने के बहाने से देश में आए तथा आन्तरिक विद्रोह करवाने का प्रयत्न किया ताकि वे आपस में लड़ाई करवाकर भारतीयों को निर्बल कर सकें। इसमें वे सफल हुए तथा १८४० तक लगभग सम्पूर्ण देश पर शासन करने में सफल हुए। वास्तव में ये शासन की दृष्टि से नहीं आए अपितु वे देश की भोलीभाली जनता को लूटना चाहते थे। क्योंकि भारत देश में बाहर से आया प्रत्येक व्यक्ति प्राहुण (अतिथि) होता है तथा उसे वे देवता का स्थान देते हैं। इसी का लाभ अंग्रेजों ने उठाया तथा धीरे धीरे आन्तरिक अशान्ति इस प्रकार फैलायी कि सर्वप्रथम यहां की शिक्षा व्यवस्था को परिवर्तित किया जो कि विश्व में सर्वोत्तम, सर्वश्रेष्ठ, सर्वोत्कृष्ट व्यवस्था थी। तथा वर्ण व्यवस्था को जातिवाद में परिवर्तित कर दिया गया। ऊंची नीची जातियों में विभाजन किया। मुस्लिम धर्म वालों को धक्के से गौ माता की हत्या करवाने में लगा दिया। एवं फिर हिन्दुओं को बोला कि देखो आपके मुस्लिम भाई, आपकी माता की हत्या कर रहे हैं। ये तो आपके भाई कहलाने के योग्य भी नहीं है। इस प्रकार देखते ही देखते उपद्रव फैला दिया। किन्तु१८५७ में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध असफल विद्रोह, जो भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम से भी जाना जाता है, के पश्चात भारत का अधिकांश भाग सीधे अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक नियन्त्रण में आ गया।[94]
आधुनिक भारत
बीसवी शताब्दी के प्रारम्भ में आधुनिक शिक्षा के प्रसार तथा विश्वपटल पर परिवर्तित राजनीतिक परिस्थितियों के चलते भारत में एक बौद्धिक आन्दोलन का सूत्रपात हुआ जिसने सामाजिक एवं राजनीतिक स्तरों पर अनेक परिवर्तनों तथा आन्दोलनों की नींव रखी। १८८५ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ने स्वतन्त्रता आन्दोलन को एक गतिमान स्वरूप दिया। बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में लम्बे समय तक स्वतन्त्रता प्राप्ति हेतु विशाल अहिंसावादी सङ्घर्ष चला, जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी, जो आधिकारिक रूप से आधुनिक भारत के 'राष्ट्रपिता' के रूप में संबोधित किये जाते हैं, इसी शताब्दी में भारत के सामाजिक आन्दोलन, जो सामाजिक स्वतन्त्रता प्राप्ति हेतु भी विशाल अहिंसावादी एवं क्रान्तिकारी सङ्घर्ष चला, जिसका नेतृत्व डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने किया, जो 'आधुनिक भारत के निर्माता, 'संविधान निर्माता' एवं 'दलितों के भगवान' के रूप में सम्बोधित किये जाते है। इसके साथ-साथ चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, आदि के नेतृत्व में चले क्रान्तिकारी सङ्घर्ष के फलस्वरुप १५ अगस्त, १९४७ भारत ने अंग्रेजी शासन से पूर्णतः स्वतंत्रता प्राप्त की। तदुपरान्त २६ जनवरी, १९५० को भारत एक गणराज्य बना।
एक बहुजातीय तथा बहुधार्मिक राष्ट्र होने के कारण भारत को समय-समय पर साम्प्रदायिक तथा जातीय विद्वेष का शिकार होना पड़ा है। क्षेत्रीय असंतोष तथा विद्रोह भी यद्यपि देश के भिन्न-भिन्न भागों में होते रहे हैं, परन्तु इसकी धर्मनिरपेक्षता तथा जनतांत्रिकता, केवल १९७५-७७ को छोड़, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी, अक्षुण्ण रही है।
भारत के पड़ोसी राष्ट्रों के साथ अनसुलझे सीमा विवाद हैं। इसके कारण इसे छोटे स्तरों पर युद्ध का भी सामना करना पड़ा है। १९६२ में चीन के साथ, तथा १९४७, १९६५, १९७१ एवं १९९९ में पाकिस्तान के साथ सङ्घर्ष हो चुका हैं।
भारत गुटनिरपेक्ष आन्दोलन तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के संस्थापक सदस्य देशों में से एक है।
१९७४ में भारत ने अपना प्रथम ला परमाणु परीक्षण किया था जिसके उपरान्त १९९८ में ५ और परीक्षण किये गये। १९९० के दशक में किये गये आर्थिक सुधारीकरण की कारण आज देश सबसे तीव्रता से विकासशील राष्ट्रों की सूची में आ गया है।
भूगोल एवं जलवायु
भू-आकृतिक विशेषतायें
भारत पूर्णतया भारतीय प्लेट के ऊपर स्थित है जो भारतीय आस्ट्रेलियाई प्लेट (Indo-Australian Plate) का उपखण्ड है। प्राचीन काल में यह प्लेट गोंडवानालैण्ड का भाग थी एवं अफ्रीका तथा अंटार्कटिका के साथ जुड़ी हुई थी। लगभग ९ करोड़ वर्ष पूर्व क्रीटेशियस काल में भारतीय प्लेट १५ सेमी. वर्ष की गति से उत्तर की ओर बढ़ने लगी तथा इओसीन पीरियड में यूरेशियन प्लेट से टकराई। भारतीय प्लेट एवं यूरेशियन प्लेट के मध्य स्थित टेथीस भूसन्नति के अवसादों के वालन द्वारा ऊपर उठने से तिब्बत का पठार एवं हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ। सामने की द्रोणी में पश्चात अवसाद जमा हो जाने से सिन्धु-गङ्गा क्षेत्र बना। भारतीय प्लेट अभी भी लगभग ५ सेमी./वर्ष की गति से उत्तर की ओर गतिशील है तथा हिमालय की ऊँचाई में अभी भी २ मिमी./वर्ष कि गति से उत्थान हो रहा है।
भारत के उत्तर में हिमालय की पर्वतमाला नवीन और मोड़दार पहाड़ों से बनी है। यह पर्वतश्रेणी कश्मीर से अरुणाचल तक लगभग १,५०० मील तक फैली हुई है। इसकी चौड़ाई १५० से २०० मील तक है। यह संसार की सबसे ऊँची पर्वतमाला है तथा इसमें अनेक चोटियाँ २४,००० फुट से अधिक ऊँची हैं। हिमालय की सबसे ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट है जिसकी ऊँचाई २९,०२८ फुट है जो नेपाल में स्थित है।
हिमालय के दक्षिण सिन्धु-गंगा मैदान है जो सिन्धु, गङ्गा तथा ब्रह्मपुत्र एवं उनकी सहायक नदियों द्वारा बना है। हिमालय (शिवालिक) की तलहटी में जहाँ नदियाँ पर्वतीय क्षेत्र को छोड़कर क्षेत्र में प्रवेश करती हैं, एक सङ्कीर्ण पेटी में कङ्कड पत्थर मिश्रित निक्षेप पाया जाता है जिसमें नदियाँ अन्तर्धान हो जाती हैं। इस ढलुवाँ क्षेत्र को भाबर कहते हैं। भाबर के दक्षिण में तराई प्रदेश है, जहाँ विलुप्त नदियाँ पुन: प्रकट हो जाती हैं। यह क्षेत्र दलदलों एवं जङ्गलों से भरा है। तराई के दक्षिण में जलोढ़ क्षेत्र पाया जाता है। क्षेत्र में जलोढ़ दो प्रकार के हैं, पुराना जलोढ़ और नवीन जलोढ़। पुराने जलोढ़ को बाँगर कहते हैं। यह अपेक्षाकृत ऊँची भूमि में पाया जाता है, जहाँ नदियों की बाढ़ का जल नहीं पहुँच पाता। इसमें कहीं कहीं चूने के कंकड मिलते हैं। नवीन जलोढ़ को खादर कहते हैं। यह नदियों की बाढ़ के क्षेत्र तथा डेल्टा प्रदेश में पाया जाता है जहाँ नदियाँ प्रति वर्ष नव तलछट जमा करती हैं।
उत्तरी भारत के क्षेत्र के दक्षिण का पूर्ण भाग एक विस्तृत पठार है जो विश्व के सबसे पुराने स्थल खण्ड का अवशेष है एवं मुख्यत: कड़ी तथा दानेदार कायान्तरित चट्टानों से बना है। पठार तीन ओर पर्वतीय श्रेणियों से घिरा है। उत्तर में विंध्याचल तथा सतपुड़ा की पर्वत हैं, जिनके मध्य नर्मदा नदी पश्चिम की ओर बहती है। नर्मदा घाटी के उत्तर विंध्याचल प्रपाती ढाल बनाता है। सतपुड़ा की पर्वतश्रेणी उत्तर भारत को दक्षिण भारत से पृथक करती है तथा पूर्व की ओर महादेव पर्वत तथा मैकाल पर्वत के नाम से जानी जाती है। सतपुड़ा के दक्षिण अजंता के पर्वत हैं। प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर पश्चिमी घाट एवं पूर्वी तीर पर पूर्वी घाट नामक पर्वत हैं। कई महत्वपूर्ण तथा बड़ी नदियाँ उदाहरणार्थ गंगा, ब्रह्मपुत्र, यमुना, गोदावरी और कृष्णा भारत से होकर बहती हैं।
जलवायु
कोपेन के वर्गीकरण में भारत में छह प्रकार की जलवायु का निरूपण है किन्तु यहाँ यह भी ध्यातव्य है कि भू-आकृति के प्रभाव में छोटे तथा स्थानीय स्तर पर भी जलवायु में बहुत विविधता एवं विशिष्टता मिलती है। भारत की जलवायु दक्षिण में उष्णकटिबंधीय है एवं हिमालयी क्षेत्रों में अधिक ऊँचाई के कारण अल्पाइन (ध्रुवीय जैसी), एक ओर यह पूर्वोत्तर भारत में उष्ण कटिबन्धीय नम प्रकार की है तो पश्चिमी भागों में शुष्क प्रकार की।
कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार भारत में निम्नलिखित छह प्रकार के जलवायु प्रदेश पाए जाते हैं:
- अल्पाइन – (ETh);
- आर्द्र उपोष्ण – (Cwa);
- उष्ण कटिबंधीय नम और शुष्क – (Aw);
- उष्ण कटिबंधीय नम – (Am);
- अर्धशुष्क – (BSh);
- शुष्क मरुस्थलीय – (BWh).
परंपरागत रूप से भारत में छह ऋतुएँ मानी जाती रहीं हैं परन्तु भारतीय मौसम विज्ञान विभाग चार ऋतुओं का वर्णन करता है जिन्हें हम उनके परम्परागत नामों से तुलनात्मक रूप में निम्नवत लिख सकते हैं:
शीत ऋतु (Winters) – दिसम्बर से मार्च तक, जिसमें दिसम्बर तथा जनवरी सबसे ठण्डे मास होते हैं; उत्तरी भारत में माध्य तापमान १० से १५ डिग्री सेल्सियस होता है।
ग्रीष्म ऋतु (Summers or Pre-monsoon) – अप्रैल से जून तक जिसमें मई सर्वाधिक उष्ण मास होता है, माध्य तापमान ३२ से ४० डिग्री सेल्सियस होता है।
वर्षा ऋतु (Monsoon or Rainy) – जून से सितम्बर तक, जिसमें सर्वाधिक वर्षा अगस्त मास में होती है, वस्तुतः मानसून का आगमन एवं प्रत्यावर्तन (लौटना) दोनों क्रमिक रूप से होते हैं एवं विभिन्न स्थानों पर इनका समय भिन्न-भिन्न होता है। सामान्यतः १ जून को केरल तट पर मानसून के आगमन तिथि होती है इसके ठीक पश्चात यह पूर्वोत्तर भारत में पहुँचता है एवं क्रमशः पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की ओर गतिशील होता है प्रयागराज में मानसून के पहुँचने की तिथि १८ जून मानी जाती है एवं दिल्ली में २९ जून।
शरद ऋतु (Post-monsoon ot Autumn) - उत्तरी भारत में अक्टूबर और नवम्बर मास में वातावरण स्पष्ट तथा शान्त रहता है एवं अक्टूबर में मानसून लौटना आरम्भ हो जाता है जिससे तमिलनाडु के तट पर लौटते मानसून से वर्षा होती है।
भारत के मुख्य नगर हैं – दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलोर (बेंगलुरु)|
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राजनीति एवं शासन
राजनीति
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतन्त्र है। भारत एक सङ्घीय लोकतान्त्रिक गणराज्य है, जहाँ संविधान के अनुसार केन्द्र और राज्य शासनों के मध्य शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। बहुदलीय प्रणाली वाले इस संसदीय गणराज्य में छ: मान्यता-प्राप्त राष्ट्रीय दल, तथा ४० से भी अधिक क्षेत्रीय पक्ष हैं। भारतीय जनता पक्ष (भाजप), जिसकी नीतियों को केन्द्रीय-दक्षिणपन्थी अथवा रूढिवादी माना जाता है, के नेतृत्व में केन्द्र में सत्ता है जिसके प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी हैं। अन्य दलों में सबसे बडी भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस (कॉंग्रेस) है, जिसे भारतीय राजनीति में केन्द्र-वामपन्थी एवं उदार माना जाता है। २००४ से २०१४ तक केन्द्र में मनमोहन सिंह की गठबन्धन शासन का सबसे बड़ा भाग कॉंग्रेस दल का था। १९५० में गणराज्य के घोषित होने से १९८० के दशक के अन्त तक कॉंग्रेस का संसद में निरन्तर बहुमत रहा। परन्तु तब से राजनैतिक पटल पर भाजप तथा कॉंग्रेस को अन्य पक्षों के साथ सत्ता बांटनी पडी है। १९८९ के उपरान्त से क्षेत्रीय दलों के उदय ने केन्द्र में गठबन्धन शासनों के नवीन कालखण्ड का आरम्भ किया है।
गणराज्य के पूर्व तीन निर्वाचनों (१९५१–५२, १९५७, १९६२) में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कॉंग्रेस ने सरल एवं सहज विजय पायी। १९६४ में नेहरू की मृत्यु के पश्चात लाल बहादुर शास्त्री कुछ समय हेतु प्रधानमन्त्री बने, तथा १९६६ में उनकी स्वयं की मृत्यु के उपरान्त इन्दिरा गान्धी प्रधानमन्त्री बनीं। १९६७ एवं १९७१ के निर्वाचनों में जीतने के पश्चात १९७७ के निर्वाचनों में उन्हें हार का सामना करना पडा। १९७५ में प्रधानमन्त्री रहते हुए उन्होंने आपातकाल की घोषणा कर दी थी। इस घोषणा तथा इससे उपजी जन रुष्टता के कारण १९७७ के निर्वाचनों में नवगठित जनता दल ने कॉंग्रेस को हरा दिया तथा पूर्व में कॉंग्रेस के सदस्य एवं नेहरु के मन्त्रिमण्डल में मन्त्री रहे मोरारजी देसाई के नेतृत्व में नवशासन बना। यह शासन मात्र तीन वर्ष चला, और १९८० में हुए निर्वाचनों में जीतकर इन्दिरा गान्धी पुनः प्रधानमन्त्री बनीं। १९८४ में इन्दिरा गान्धी की हत्या के उपरान्त उनके पुत्र राजीव गान्धी कॉंग्रेस के नेता तथा प्रधानमन्त्री बने। १९८४ के निर्वाचनों में प्रचण्ड जीत के पश्चात १९८९ में
नवगठित जनता दल के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय मोर्चा ने वाम मोर्चा के बाहरी समर्थन से शासन बनाया, जो केवल दो वर्ष चला। १९९१ के निर्वाचनों में किसी दल को बहुमत नहीं मिला, परन्तु कॉंग्रेस सबसे बडी पक्ष बनी, और पी वी नरसिंह राव के नेतृत्व में अल्पमत शासन बना जो अपना कार्यकाल पूर्ण करने में सफल रहा।
१९९६ के निर्वाचनों के पश्चात दो वर्ष तक राजनैतिक उथल पुथल का समय रहा, जिसमें कई गठबन्धन शासन आयें तथा गयें। १९९६ में भाजप ने केवल १३ दिन हेतु शासन बनाया, जो समर्थन ना मिलने के कारण गिर गया। उसके उपरान्त दो संयुक्त मोर्चे की शासन आयें जो कुछ लंबे काल तक चली। ये शासन कॉंग्रेस के बाहरी समर्थन से बने थे। १९९८ के निर्वाचनों के उपरान्त भाजप एक सफल गठबन्धन बनाने में सफल रही। भाजप के अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन (राजग) नाम के इस गठबन्धन का शासन प्रथम ऐसी शासन बना जिसने अपना पाँच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण किया। २००४ के निर्वाचनों में भी किसी दल को बहुमत नहीं मिला, किन्तु कॉंग्रेस सबसे बडा दल बनके उभरा, तथा इसने संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन (सम्प्रग) के नाम से नव गठबन्धन बनाया। इस गठबन्धन ने वामपन्थी एवं अभाजप सांसदों के सहयोग से मनमोहन सिंह के नेतृत्व में पाँच वर्ष तक शासन चलाया। २००९ के निर्वाचनों में यूपीए और अधिक सीटें जीता जिसके कारण यह साम्यवादी दलों के बाहरी सहयोग के बिना ही शासन बनाने में सफल रहा। इसी वर्ष मनमोहन सिंह जवाहरलाल नेहरू के पश्चात ऐसे पहले प्रधानमन्त्री बने जिन्हें दो लगातार कार्यकाल हेतु प्रधानमन्त्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ। २०१४ के निर्वाचनों में १९८४ के उपरान्त प्रथम बार किसी राजनैतिक दल को बहुमत प्राप्त हुआ, तथा भाजपा ने गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के नेतृत्व में शासन स्थापित किया। नरेन्द्र दामोदरदास मोदी लगातार दो कार्यकालों हेतु भारत के सर्वाधिक दीर्घकाल तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमन्त्री हैं, जिन्होंने १० जून, २०२६ को ४,३९९ दिनों का निरन्तर कार्यकाल पूर्ण किया। उन्होंने २६ मई, २०१४ को पदभार ग्रहण किया, लगातार तीन लोक सभा निर्वाचन २०१४, २०१९, २०२४ जनादेश प्राप्त किए तथा जवाहरलाल नेहरू द्वारा बनाए गए पिछले निरन्तर निर्वाचित कीर्तिमान को पीछे छोड़ दिया। सकल कार्यकारी कार्यकाल के रूप में गुजरात के मुख्यमन्त्री के रूप में उनके लगभग १३ वर्षों के कार्यकाल को मिलाकर, वे भारत के सर्वाधिक दीर्घकालिक समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित राष्ट्राध्यक्षों में से एक हैं। मार्च २०२६ में, गुजरात के मुख्यमन्त्री तथा देश के प्रधानमन्त्री के रूप में उनका सकल संयुक्त कार्यकाल ८,९३१ दिनों से अधिक हो गया, जिसके साथ ही वे भारत के इतिहास में सर्वाधिक दीर्घकालिक समय तक लोकतान्त्रिक रूप से चुने गए शासन के प्रमुख बन गए। वह भारत के इतिहास में लगातार तीन बार पूर्ण बहुमत/जनाादेश के साथ सत्ता में आने वाले पहले अकांग्रेसी प्रधानमन्त्री हैं। आधुनिक अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में किसी भी भारतीय नेता हेतु एक कीर्तिमान बनाते हुए, उन्हें विश्वभर के विभिन्न देशों द्वारा ३१ से अधिक सर्वोच्च नागरिक एवं वैश्विक सम्मान प्रदान किए जा चुके हैं।
शासन
भारत का संविधान भारत को एक सम्प्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतान्त्रिक गणराज्य घोषित करता है। भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, जिसकी द्विसदनात्मक संसद वेस्टमिन्स्टर शैली की संसदीय प्रणाली द्वारा सञ्चालित है। भारत का प्रशासन सङ्घीय अवसंरचना के अन्तर्गत चलाया जाता है, जिसके अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर केन्द्र शासन एवं राज्य स्तर पर राज्य शासन हैं। केन्द्र और राज्य शासनों के मध्य शक्तियों का बंटवारा संविधान में दी गई रूपरेखा के आधार पर होता है। वर्तमान में भारत में २८ राज्य और ८ केन्द्र-शासित प्रदेश हैं। केन्द्र शासित प्रदेशों में, स्थानीय प्रशासन को राज्यों की तुलना में कम शक्तियां प्राप्त होती हैं। भारत का सरकारी ढाँचा, जिसमें केन्द्र राज्यों की तुलना में अधिक सशक्त है, उसे सामान्यतः अर्ध-सङ्घीय कहा जाता रहा है, परन्तु १९९० के दशक के राजनैतिक, आर्थिक तथा सामाजिक परिवर्तनों के कारण इसकी रूपरेखा धीरे-धीरे और अधिक सङ्घीय होती जा रही है।
इसके शासन में तीन मुख्य अंग हैं:- न्यायपालिका, कार्यपालिका एवं विधायिका।
विधायिका संसद को कहते हैं, जिसके दो सदन हैं – उच्चसदन राज्यसभा, अथवा राज्यपरिषद् तथा निम्नसदन लोकसभा. राज्यसभा में २४५ सदस्य होते हैं जबकि लोकसभा में ५४३। राज्यसभा एक स्थायी सदन है तथा इसके सदस्यों का निर्वाचन, अप्रत्यक्ष विधि से ६ वर्षों हेतु होता है। राज्यसभा के अधिकतर सदस्यों का चयन राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया जाता है, तथा प्रत्येक दूसरे वर्ष राज्य सभा के एक तिहाई सदस्य पदमुक्त हो जाते हैं। लोकसभा के ५४३ सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष विधि से, ५ वर्षों की अवधि हेतु लोकसभा निर्वाचन के माध्यम से किया जाता है जिनमें १८ वर्ष से अधिक उम्र के सर्व भारतीय नागरिक मतदान कर सकते हैं।
कार्यपालिका मंत्रिमण्डल को कहते हैं। प्रधानमन्त्री मन्त्रिमण्डल का प्रमुख है और कार्यपालिका की सर्व शक्तियाँ उसी के पास होती हैं। इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद में बहुमत प्राप्त करने पर की जाती है। बहुमत बने रहने की स्थिति में इसका कार्यकाल ५ वर्षों का होता है। संविधान में किसी उप-प्रधानमंत्री का प्रावधान नहीं है किन्तु समय-समय पर इसमें परिवर्तन होता रहा है। मन्त्रिमण्डल के प्रत्येक मन्त्री को संसद की सदस्यता के योग्य होना अनिवार्य है। कार्यपालिका संसद के प्रति उत्तरदायी होती है, और प्रधानमन्त्री तथा उनका मन्त्रिमण्डल लोक सभा में बहुमत के समर्थन के आधार पर ही अपने कार्यालय में बने रह सकते हैं।
भारत की स्वतन्त्र न्यायपालिका का ढाँचा त्रिस्तरीय है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय, जिसके प्रधान प्रधान न्यायाधीश है; २४ उच्च न्यायालय और बहुत सारी निचली न्यायालय हैं। सर्वोच्च न्यायालय को अपने मूल न्यायाधिकार, तथा उच्च न्यायालयों के ऊपर पुनरावेदी न्यायाधिकार के प्रकरणों, दोनो को देखने का अधिकार है। सर्वोच्च न्यायालय के मूल न्ययाधिकार में मौलिक अधिकारों के हनन के अतिरिक्त राज्यों तथा केन्द्र, एवं दो अथवा दो से अधिक राज्यों के मध्य के विवाद आते हैं। सर्वोच्च न्यायालय को राज्य एवं केन्द्रीय विधियों को असंवैधानिक ठहराने के अधिकार है। भारत में २४ उच्च न्यायालयों के अधिकार तथा उत्तरदायित्व सर्वोच्च न्यायालय की अपेक्षा सीमित हैं। संविधान ने न्यायपालिका को विस्तृत अधिकार दिये हैं, जिनमें संविधान की अन्तिम व्याख्या करने का अधिकार भी सम्मिलित है।
प्रशासनिक प्रभाग
वर्तमान में भारत 28 राज्यों तथा 8 केन्द्रशासित प्रदेशों में बँटा हुआ है। राज्यों की चयनित, निर्वाचित स्वतन्त्र शासन हैं, जबकि केन्द्रशासित प्रदेशों पर केन्द्र द्वारा नियुक्त प्रबन्धन शासन करता है, यद्यपि पुडुचेरी तथा दिल्ली की लोकतान्त्रिक शासन भी हैं।
अन्टार्कटिका तथा दक्षिण गंगोत्री एवं मैत्री पर भी भारत के वैज्ञानिक-स्थल हैं, यद्यपि अभी तक कोई वास्तविक आधिपत्य स्थापित नहीं किया गया है।
- राज्यों के नाम निम्नवत हैं (कोष्ठक में राजधानी का नाम)
- अरुणाचल प्रदेश (इटानगर)
- असम (दिसपुर)
- उत्तर प्रदेश (लखनऊ)
- उत्तराखण्ड (देहरादून)
- ओड़िशा (भुवनेश्वर)
- आंध्र प्रदेश (अमरावती)
- कर्नाटक (बंगलोर)
- केरल (तिरुवनंतपुरम)
- गोआ (पणजी)
- गुजरात (गांधीनगर)
- छत्तीसगढ़ (रायपुर)
- झारखंड (रांची)
- तमिलनाडु (चेन्नई)
- तेलंगाना (हैदराबाद)
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- त्रिपुरा (अगरतला)
- नागालैंड (कोहिमा)
- पश्चिम बंगाल (कोलकाता)
- पंजाब (चंडीगढ़†)
- बिहार (पटना)
- मणिपुर (इम्फाल)
- मध्य प्रदेश (भोपाल)
- महाराष्ट्र (मुंबई)
- मिज़ोरम (आइजोल)
- मेघालय (शिलांग)
- राजस्थान (जयपुर)
- सिक्किम (गान्तोक)
- हरियाणा (चंडीगढ़†)
- हिमाचल प्रदेश (शिमला)
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- केन्द्रशासित प्रदेश
- जम्मू और कश्मीर (श्रीनगर/जम्मू)
- लदाख* (लेह)
- अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह(पोर्ट ब्लेयर)
- चंडीगढ़†* (चंडीगढ़)
- दमन और दीव* (दमन)
- दादरा और नागर हवेली* (सिलवासा)
- पॉण्डिचेरी* (पुडुचेरी)
- लक्षद्वीप* (कवरत्ती)
- दिल्ली (नई दिल्ली)
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† चंडीगढ़ एक केंद्रशासित प्रदेश है तथा यह पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की राजधानी है।
26 जनवरी 2020 को दादरा एव नगर हवेली तथा दमन द्वीप का विलय करके एक केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया है। अब इसका पूरा नाम दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन द्वीप है।
विदेश-सम्बन्ध
१९४७ में अपनी स्वतन्त्रता के पश्चात, भारत के अधिकांश देशों के साथ सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध बनाए रखा है। १९५० के दशक में, भारत ने पुरजोर रूप से अफ्रीका और एशिया में यूरोपीय उपनिवेशों की स्वतन्त्रता का समर्थन किया तथा गुट निरपेक्ष आन्दोलन में एक अग्रणी की भूमिका निभायी।[96] १९८० के दशक में भारत दो पड़ोसी देशों के निमन्त्रण पर, सेना के द्वारा संक्षिप्त सैन्य हस्तक्षेप किया, एक श्रीलङ्का में तथा दूसरा मालद्वीप में। भारत के पड़ोसी पाकिस्तान के साथ एक तनाव भरा सम्बन्ध है तथा दोनों देशों के मध्य चार बार युद्ध हुआ था, १९४७, १९६५, १९७१ एवं १९९९ में। कश्मीर विवाद इन युद्धों का प्रमुख कारण था।[97] १९६२ के भारत-चीन युद्ध तथा पाकिस्तान के साथ १९६५ के युद्ध के उपरान्त भारत एवं सोवियत सङ्घ के साथ सैन्य सम्बन्धों में बहुत वृद्धि हुयीं। १९६० के दशक के अन्त में सोवियत सङ्घ भारत का सबसे बड़ा शस्त्र आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरी थी।[98]
रूस के साथ सामरिक सम्बन्धों के अतिरिक्त, भारत का इजरायल एवं फ्रांस के साथ विस्तृत रक्षा सम्बन्ध हैं। गत वर्षों में, भारत ने क्षेत्रीय सहयोग तथा विश्व व्यापार संगठन हेतु एक दक्षिण एशियाई एसोसिएशन में प्रभावशाली भूमिका निभायी है। [98] भारत ने १००,००० सैन्य तथा पुलिस कर्मियों को चार महाद्वीपों भर में संयुक्त राष्ट्र के पैंतीस शांति अभियानों में सेवा प्रदान की है।[99] भारत ने विभिन्न बहुपक्षीय मंचों, सबसे खासकर पूर्वी एशिया के शिखर बैठक और जी-8 5 में एक सक्रिय भागीदारी निभाई है। आर्थिक क्षेत्र में भारत का दक्षिण अमेरिका, एशिया, और अफ्रीका के विकासशील देशों के साथ घनिष्ठ संबंध है।[100]
[101]
सैन्य शक्ति
लगभग १३ लक्ष सक्रिय सैनिकों के साथ, भारतीय सेना विश्व में तीसरी सबसे बड़ी है। भारत की सशस्त्र सेना में एक थलसेना, नौसेना, वायु सेना एवं अर्द्धसैनिक बल, तटरक्षक, जैसे सामरिक तथा सहायक बल विद्यमान हैं। भारत के राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमाण्डर है।
१९४७ में अपनी स्वतंत्रता के उपरान्त से, भारत ने अधिकतर देशों के साथ सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध बनाए रखा है। १९५० के दशक में, भारत ने दृढ़ता से अफ्रीका और एशिया में यूरोपीय कालोनियों की स्वतंत्रता का समर्थन किया और गुट निरपेक्ष आंदोलन में एक अग्रणी भूमिका निभाई। १९८० के दशक में भारत ने आमन्त्रण पर दो पड़ोसी देशों में संक्षिप्त सैन्य हस्तक्षेप किया। मालद्वीप, श्रीलंका एवं अन्य देशों में ऑपरेशन कैक्टस में भारतीय शान्ति सेना को भेजा गया। यद्यपि, भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ एक तनावपूर्ण सम्बन्ध बने रहे तथा दोनों देशों में चार बार युद्ध (१९४७, १९६५, १९७१ एवं १९९९ में) हुए हैं। कश्मीर विवाद इन युद्धों के प्रमुख कारण था, अपवादपूर्वक इसके 1971 के, जो कि तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में नागरिक अशान्ति के लिए किया गया था। १९६२ के भारत-चीन युद्ध तथा पाकिस्तान के साथ १९६५ के युद्ध के उपरान्त भारत ने अपनी सैन्य एवं आर्थिक स्थिति का विकास करने का प्रयास किया। सोवियत संघ के साथ उत्तम सम्बन्धों के कारण सन् १९६० के दशक से, सोवियत सङ्घ भारत का सबसे बड़ा शस्त्र आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा।
आज रूस के साथ सामरिक सम्बन्धों को जारी रखने के अतिरिक्त, भारत विस्तृत इजरायल एवं फ्रांस के साथ रक्षा सम्बन्ध रखा है। विगत वर्षों में, भारत में क्षेत्रीय सहयोग और विश्व व्यापार संघटन हेतु एक दक्षिण एशियाई एसोसिएशन में प्रभावशाली भूमिका निभायी है। १०,००० राष्ट्र सैन्य एवं पुलिस कर्मियों को चार महाद्वीपों भर में पैन्तीस संयुक्त राष्ट्र शान्ति अभियानों में सेवा प्रदान की है। भारत भी विभिन्न बहुपक्षीय मञ्चों, विशेषकर पूर्वी एशिया शिखर बैठक तथा जी-८५ बैठक में एक सक्रिय भागीदार रहा है। आर्थिक क्षेत्र में भारत दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका एवं एशिया के विकासशील देशों के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध रखते है। अब भारत एक "पूर्व की ओर देखो नीति" में भी संयोग किया है। यह "आसियान" देशों के साथ अपनी भागीदारी को मजबूत बनाने के मुद्दों की एक विस्तृत शृंखला है जिसमे जापान और दक्षिण कोरिया ने भी सहायता की है। यह विशेष रूप से आर्थिक निवेश एवं क्षेत्रीय सुरक्षा का प्रयास है।
१९७४ में भारत अपनी प्रथम परमाणु हथियारों का परीक्षण किया तथा आगे १९९८ में भूमिगत परीक्षण किया। जिसके कारण भारत पर कई प्रकार के प्रतिबन्ध भी लगाये गए। भारत के पास अब विभिन्न प्रकार के परमाणु शस्त्र है। भारत अभी रूस के साथ मिलकर पाँचवीं पीढ़ी के विमान बना रहा है।
विगत में, भारत का संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ आर्थिक, सामरिक तथा सैन्य सहयोग बढ़ गया है। २००८ में, भारत एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य असैनिक परमाणु समझौते हस्ताक्षर किए गए थे। यद्यपि उस समय भारत के पास परमाणु शस्त्र था तथा परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के पक्ष में नहीं था यह अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी एवं न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) से छूट प्राप्त है, भारत की परमाणु प्रौद्योगिकी एवं वाणिज्य पर पहले प्रतिबन्ध समाप्त. भारत विश्व का छठा वास्तविक परमाणु हथियार राष्ट्रत बन गया है। एनएसजी छूट के बाद भारत भी रूस, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा सहित देशों के साथ असैनिक परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने में सक्षम है।
वित्त वर्ष २०१४-१५ के केन्द्रीय अन्तरिम बजट में रक्षा आवंटन में १० प्रतिशत बढ़ोत्तरी करते हुए 224,000 करोड़ रूपए आवंटित किए गए। 2013-14 के बजट में यह राशि 203,672 करोड़ रूपए थी।[102] २०१२–१३ में रक्षा सेवाओं के लिए 1,93,407 करोड़ रुपए[103] का प्रावधान किया गया था, जबकि २०११–२०१२ में यह राशि 1,64,415 करोइ़[104] थी। साल २०११ में भारतीय रक्षा बजट 36.03 अरब अमरिकी डॉलर रहा (या सकल घरेलू उत्पाद का 1,83%)। 2008 के एक SIRPI रिपोर्ट के अनुसार, भारत क्रय शक्ति के मामले में भारतीय सेना के सैन्य खर्च 72.7 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। साल 2011 में भारतीय रक्षा मंत्रालय के वार्षिक रक्षा बजट में 11.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, हालाँकि यह पैसा सरकार की अन्य शाखाओं के माध्यम से सैन्य की ओर जाते हुए पैसों में शमिल नहीं होता है। भारत विश्व का सबसे बड़े शस्त्र आयातक है। २६ जनवरी १९५० को भारत के एक सम्प्रभु गणराज्य बनने के बाद ब्रिटिश शासन के अंतिम अवशेष—जैसे रैंक बैज, शाही मुकुट (imperial crowns), ब्रिटिश एन्साइन और "रॉयल" उपाधियाँ हटा दिए गए तथा उनकी स्थान भारतीय तिरंगा तथा अशोक की सिंह राजधानी को अपनाया गया।[105]
१ अप्रैल १९५१ को पूर्व रियासतों की शेष इकाइयों को भारतीय सेना में एकीकृत कर दिया गया, यद्यपि इन रियासतों की केवल कुछ सेनाओं को ही सक्रिय सेवा के योग्य माना गया।[106]
भारत गणराज्य बनने के बाद भी १९६० के दशक की आरम्भ तक ब्रिटिश सशस्त्र बलों के कुछ अधिकारी भारतीय सेनाओं में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे। १ अप्रैल १९५४ को एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी भारतीय वायुसेना के प्रथम भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने।
१ अप्रैल १९५५ से एक संसदीय अधिनियम, Commanders-In-Chiefs (Change in Designation) Act, के अन्तर्गत कमांडर-इन-चीफ के पद का नाम परिवर्तित करके प्रत्येक शाखा के चीफ ऑफ स्टाफ कर दिया गया।
१९५८ तक भारतीय नौसेना के अंतिम ब्रिटिश प्रमुख के स्थान पर भारतीय अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई थी। २२ अप्रैल १९५८ को वाइस एडमिरल राम दास कटारी भारतीय नौसेना के पहले भारतीय चीफ ऑफ नेवल स्टाफ बने।
भारतीय वायुसेना और नौसेना के चीफ ऑफ स्टाफ को 1966 और 1968 में क्रमशः चार-सितारा रैंक में अपग्रेड किया गया।
१९६१ में भारत और पुर्तगाल के बीच गोवा को लेकर तनाव बढ़ा। शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुर्तगाली पुलिस की हिंसक कार्रवाई के बाद भारत सरकार ने सैन्य कार्रवाई का निर्णय लिया और ऑपरेशन विजय (1961) शुरू किया। कुछ ही समय में पुर्तगाली सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया और ३६ घंटे के भीतर ४५१ वर्षों का पुर्तगाली शासन समाप्त हो गया।
भारत ने अपने पड़ोसी पाकिस्तान के साथ १९४७, १९६५, १९७१ और १९९९ में चार प्रमुख युद्ध लड़े तथा चीन के साथ १९६२ और १९६७ में संघर्ष हुआ। १९७१ के युद्ध में भारत की विजय के परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ।
१९८० के दशक में सियाचिन ग्लेशियर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा। अप्रैल १९८४ में भारत ने ऑपरेशन मेघदूत आरम्भ कर पूर्ण सियाचिन ग्लेशियर तथा आसपास के प्रमुख दर्रों पर नियन्त्रण प्राप्त कर लिया।[107]
TIME पत्रिका के अनुसार, भारत ने इस अभियान के माध्यम से १००० वर्ग मील (लगभग २,६०० वर्ग किलोमीटर) से अधिक क्षेत्र प्राप्त किया।[108]
१९८७ और १९८९ में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया, किन्तु असफल रहा। २००३ के उपरान्त दोनों देशों के मध्य संघर्ष विराम लागू है।
भारतीय शांति सेना (IPKF) ने १९८७–१९९० के मध्य श्रीलंका में LTTE को निरस्त्र करने के लिए अभियान चलाया। इस मिशन में लगभग १,२०० सैनिकों की मृत्यु हुई तथा उपरान्त में इसे वापस ले लिया गया।
२१वीं शताब्दी की आरम्भ में भारत की भूमिका क्षेत्रीय शक्ति से बढ़कर हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में विकसित हुयीं। भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में "नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर" के रूप में भी देखा जाता है।
| वित्त वर्ष |
2007-2008 |
2008-2009 |
2009-2010 |
2011-2012 |
2012-2013 |
2013-2014 |
2014-2015 |
2015-2016 |
2016-2017
|
| बजट (करोड़ रूपए) |
96,000[104] |
1,05,600[104] |
1,41,703[104] |
1,64,415[104] |
1,93,407[103] |
2,03,672[102] |
2,24,000[102] |
2,94,320 |
3,59,854
|
२०१४ में नरेन्द्र मोदी नीत भाजपा सरकार ने मेक इन इण्डिया के नाम से भारत में निर्माण अभियान की शुरुआत की और भारत को हथियार आयातक से निर्यातक बनाने के लक्ष्य की घोषणा की। रक्षा निर्माण के द्वार निजी कंपनियों के लिए भी खोल दिए गए और भारत के कई उद्योग घरानों ने बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में पूंजी निवेश की योजनाएँ घोषित की। फ्राँस की डसॉल्ट एविएशन ने अंबानी समूह के साथ साझेदारी में रफेल लड़ाकू विमान[109], तथा अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन ने टाटा समूह के साथ साझेदारी लड़ाकू विमान एफ-१६ [110] का निर्माण भारत में प्रारम्भ करने की घोषणाएँ की हैं। अन्य प्रतिष्ठित समूह जैसे एल एंड टी,[111][112] महिन्द्रा, कल्याणी आदि भी कई परियोजनाओं के निर्माण की पहल कर चुके हैं जिनमें तोपें, असला, जलपोत व पनडुब्बियों का निर्मान शामिल है। रूस के साथ कमोव हेलीकॉप्टर का निर्माण भी भारत में करने के लिए समझौता हुआ है।
अर्थव्यवस्था
मुद्रा स्थानांतरण की दर से भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में दसवें और क्रयशक्ति के अनुसार तीसरे स्थान पर है। वर्ष २००३ में भारत में लगभग ८% की दर से आर्थिक वृद्धि हुई है जो कि विश्व की सबसे तीव्र बढती हुई अर्थव्यवस्थओं में से एक है। परन्तु भारत की अत्यधिक जनसङ्ख्या के कारण प्रतिव्यक्ति आय क्रयशक्ति की दर से मात्र ३,२६२ अमेरिकी डॉलर है जो कि विश्व बैङ्क के अनुसार १२५वें स्थान पर है। भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार २६५ (मार्च २००९) अरब अमेरिकी डॉलर है। मुम्बई भारत की आर्थिक राजधानी है और भारतीय रिजर्व बैंक और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मुख्यालय भी। यद्यपि एक चौथाई भारतीय अभी भी निर्धनता रेखा से नीचे हैं, तीव्रता से बढ़ती हुई सूचना प्रौद्योगिकी कम्पनियों के कारण मध्यमवर्ग में वृद्धि हुई है। १९९१ के उपरान्त भारत में आर्थिक सुधार की नीति ने भारत के सर्वाङ्गीण विकास में बड़ी भूमिका निभायी है।
१९९१ के पश्चात भारत में हुए आर्थिक सुधारोँ ने भारत के सर्वाङ्गीण विकास में बड़ी भूमिका निभायी। भारतीय अर्थव्यवस्था ने कृषि पर अपनी ऐतिहासिक निर्भरता न्यून की है तथा कृषि अब भारतीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का केवल २५% है। दूसरे प्रमुख उद्योग हैं उत्खनन, पेट्रोलियम, बहुमूल्य रत्न, चलचित्र, वस्त्र, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं, तथा सजावटी वस्तुऐं। भारत के अधिकतर औद्योगिक क्षेत्र उसके प्रमुख महानगरों के आसपास स्थित हैं। विगत के वर्षों में $१७२० कोटि अमेरिकी डॉलर वार्षिक आय २००४-२००५ के साथ भारत सॉफ़्टवेयर एवं बीपीओ सेवाओं का सबसे बड़ा केन्द्र बन कर उभरा है। इसके साथ ही कई लघु स्तर के उद्योग भी हैं जोकि छोटे भारतीय गाँव एवं भारतीय नगरों के कई नागरिकों को जीविका प्रदान करते हैं। पिछले वर्षों में भारत में वित्तीय संस्थानों ने विकास में बड़ी भूमिका निभाई है।
केवल तीस लाख विदेशी पर्यटकों के प्रतिवर्ष आने के पश्चात भी भारतीय पर्यटन राष्ट्रीय आय का एक अति आवश्यक, परन्तु अल्प विकसित स्रोत है। पर्यटन उद्योग भारत के जीडीपी का सकल ५,३% है। पर्यटन १०% भारतीय कामगारों को आजीविका देता है। वास्तविक संख्या ४.२ कोटि है। आर्थिक रूप से देखा जाए तो पर्यटन भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग $४०० कोटि डालर प्रदान करता है। भारत के प्रमुख व्यापार सहयोगी हैं अमरीका, जापान, चीन और संयुक्त अरब अमीरात।
भारत के निर्यातों में कृषि उत्पाद, चाय, कपड़ा, बहुमूल्य रत्न व आभूषण, साफ़्टवेयर सेवायें, इंजीनियरिंग सामान, रसायन तथा चमड़ा उत्पाद प्रमुख हैं जबकि उसके आयातों में कच्चा तेल, मशीनरी, बहुमूल्य रत्न, उर्वरक (फ़र्टिलाइज़र) तथा रसायन प्रमुख हैं। वर्ष २००४ के लिये भारत के कुल निर्यात $६९१८ कोटि डालर के थे जबकि उसके आयात $८९३३ कोटि डालर के थे।
दिसम्बर २०१३ के अन्त में भारत का सकल विदेशी ऋण ४२६.० अरब अमरीकी डॉलर था, जिसमें कि दीर्घकालिक ऋण ३३३.३ अरब (७८.२%) तथा अल्पकालिक ऋण ९२.७% अरब अमरीकी डॉलर (२१.८%) था। सकल विदेशी ऋण में शासन का विदेशी ऋण ७६.४ अरब अमरीकी डॉलर (सकल विदेशी ऋण का १७.९ प्रतिशत) था, शेष व्यावसायिक उधार, एनआरआई जमा तथा बहुउद्देश्यीय ऋण आदि हैं।[113]
जनसांख्यिकी एवं भाषाएँ
भारत चीन को अप्रैल २०२३ में पीछे छोड़ विश्व का सबसे अधिक जनसङ्ख्या वाला देश बन गया है।[114][115] भारत की विभिन्नताओं से भरी जनता में भाषा, जाति एवं धर्म, [116]सामाजिक और राजनीतिक सौहार्द तथा समरसता के मुख्य शत्रु हैं।
भारत में २०११ की जनगणना के अनुसार ७४.०४ प्रतिशत साक्षरता [117]है, जिस में से ८२.१४% पुरुष एवं स्त्रियो की साक्षरता ६५.४६ हैं। [118] लिंग अनुपात की दृष्टि से भारत में प्रत्येक १००० पुरुषों के पीछे मात्र ९४० महिलायें हैं। कार्य भागीदारी दर (कुल जनसंख्या में कार्य करने वालों का भाग) ३९.१% है। पुरुषों के लिए यह दर ५१,७% और स्त्रियों के लिये २५,६% है। भारत की १००० जनसङ्ख्या में २२.३२ जन्मों के साथ बढ़ती जनसङ्ख्या के आधे लोग २२.६६ वर्ष से अल्प आयु के हैं।
धर्म
| भारत में धार्मिक समूह (२०११ की जनगणना)[119] |
| धार्मिक समूह |
प्रतिशत |
| हिन्दू |
|
79.80% |
| मुस्लिम |
|
14.23% |
| ईसाई |
|
2.30% |
| सिख |
|
1.72% |
| बौद्ध |
|
0.70% |
| जैन |
|
0.37% |
| निधर्मी |
|
0.24% |
यद्यपि भारत की ७९.८० प्रतिशत अथवा ९६.६२ कोटि जनसङ्ख्या हिन्दू है,[120] १४.२३ प्रतिशत अथवा १७.२२ कोटि जनसङ्ख्या के साथ भारत विश्व में मुसलमानों की संख्या में भी इंडोनेशिया एवं पाकिस्तान के उपरान्त तीसरे स्थान पर है। अन्य धर्मावलम्बियों में ईसाई (२.३० % अथवा २.७८ कोटि), सिख (१,७२ % अथवा २.०८ कोटि), बौद्ध (०,७० % या ८४.४३ लक्ष), जैन (०,३७ % या ४४.५२ लक्ष), अन्य धर्म (०,६६ % अथवा ७९.३८ लक्ष) इनमें यहूदी, पारसी, अहमदी तथा बहाई आदि धर्मीय हैं। नास्तिकता ०,२४% अथवा ३८.३७ लक्ष है।
भारत की जनजातियां
- गोंड - गोंड भारत की जनजाति है , मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में इनका शासन था ।
- भील - भील देश की सबसे विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई जनजाति है , यह जनजाति मुख्यरूप से राजस्थान , मध्यप्रदेश , गुजरात तथा महाराष्ट्र में निवास करती है , इस जनजाति का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है , यह जनजाति प्राचीन समय में एक कबीले में ना रह कर , देश के कई क्षेत्रों पर शासन किया । भील जनजाति देश में भील रेजिमेंट एवं भील प्रदेश चाहती है।
- मीणा - मीणा राजस्थान की मुख्य जनजाति है। मध्य प्रदेश में मीणाओं को पूर्ण रूप से अनुसूचित जनजाति के रूप में प्रस्तावित किया गया है, जिस पर भारत शासन विचार कर रही है।
- नागा - नागा जनजाति मुख्यरूप से नागालैंड में पाई जाती है , देश में नागा रेजिमेंट है।
- गारो - एक जनजाति
- भूमिज - भारत की सबसे प्राचीन जनजाति; पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, उड़ीसा एवं असम में पायी जाती है।
भाषाएँ
भारत दो मुख्य भाषा-सूत्रों: आर्य और द्रविड़ भाषाओं का स्रोत भी है। भारत का संविधान कुल २३ भाषाओं को मान्यता देता है। हिन्दी और अंग्रेजी केन्द्रीय सरकार द्वारा सरकारी कामकाज के लिए उपयोग की जाती हैं। संस्कृत और तमिल जैसी अति प्राचीन भाषाएं भारत में ही जन्मी हैं। संस्कृत, संसार की सर्वाधिक प्राचीन भाषाओं में से एक है, जिसका विकास पथ्यास्वस्ति नाम की अति प्राचीन भाषा/बोली से हुआ था। तमिल के अतिरिक्त सारी भारतीय भाषाएँ संस्कृत से ही विकसित हुई हैं, यद्यपि संस्कृत एवं तमिल में कई शब्द समान हैं, सकल मिलाकर भारत में १६५२ से भी अधिक भाषाएं एवं बोलियाँ बोली जातीं हैं।
भाषाओं के विषय में भारतवर्ष विश्व के समृद्धतम देशों में से है। संविधान के अनुसार हिन्दी भारत की राजभाषा है, और अंग्रेजी को सहायक राजाभाषा का स्थान दिया गया है। १९४७-१९५० के संविधान के निर्माण के समय देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी भाषा एवं हिन्दी-अरबी अङ्कों के अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप को सङ्घ (केन्द्र) शासन की कामकाज की भाषा बनाया गया था, तथा अहिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी के प्रचलन को बढ़ाकर उन्हें हिन्दी-भाषी राज्यों के समान स्तर तक आने तक के लिये १५ वर्षों तक अंग्रेजी के उपयोग की अनुमति देते हुए इसे सहायक राजभाषा का स्थान दिया गया था। संविधान के अनुसार यह व्यवस्था १९५० में समाप्त हो जाने वाली थी, किन्तु् तमिलनाडु राज्य के हिन्दी भाषा विरोधी आन्दोलन एवं हिन्दी भाषी राज्यों राजनैतिक विरोध के परिणामस्वरूप, संसद ने इस व्यवस्था की समाप्ति को अनिश्चित काल तक स्थगित कर दिया है। इस कारण से वर्तमान समय में केन्द्रीय शासन में कार्य हिन्दी तथा अंग्रेज़ी भाषाओं में होता है एवं राज्यों में हिन्दी अथवा अपने-अपने क्षेत्रीय भाषाओं में कार्य होता है। केन्द्र एवं राज्यों तथा अन्तर-राज्यीय पत्र-व्यवहार हेतु, यदि कोई राज्य ऐसी मांग करे, तो हिन्दी तथा अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं का होना आवश्यक है। भारतीय संविधान एक राष्ट्रभाषा का वर्णन नहीं करता। हिन्दी और अंग्रेजी भारत सरकार की आधिकारिक भाषाएं हैं, किन्तु कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं है। भारत में 22 आधिकारिक भाषाएँ हैं, जिनमें से प्रत्येक को बड़ी संख्या में लोग बोलते हैं। यद्यपि, हिन्दी का उपयोग अनिवार्य नहीं है, और अन्य आधिकारिक भाषाओं का भी उपयोग किया जा सकता है।
हिन्दी एवं अंग्रेज़ी के अतिरिक्त संविधान की आठवीं अनुसूची में २० अन्य भाषाओं का वर्णन है जिन्हें भारत में आधिकारिक कामकाज में उपयोग किया जा सकता है। संविधान के अनुसार शासन इन भाषाओं के विकास के लिये प्रयास करेगी, तथा अधिकृत राजभाषा (हिन्दी) को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए इन भाषाओं का उपयोग करेगी। आठवीं अनुसूची में प्रविष्ट २२ भाषाएँ यह हैं:
- संस्कृत
- हिन्दी
- अंग्रेजी
- मराठी
- नेपाली
- मैथिली
- पंजाबी
- तमिल
- तेलुगू
- मलयालम
- कन्नड
- गुजराती
- बांग्ला
- असमिया
- ओड़िया
- कश्मीरी
- मणिपुरी
- कोंकणी
- डोगरी
- उर्दू
- सिन्धी
- संथाली
राज्यवार भाषाओं की आधिकारिक स्थिति इस प्रकार है:
| क्र॰सं॰ |
राज्य |
आधिकारिक भाषा(एं) |
अन्य मान्यता प्राप्त भाषाएं
|
| १. |
अरुणाचल प्रदेश |
अंग्रेज़ी[7]:65 |
| २. |
असम |
असमिया, अंग्रेज़ी[121] |
बांग्ला बराक घाटी के तीन ज़िलों में;[122] [[[बोड़ो भाषा|बोडो]] बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद् के ज़िलों में।[123]
|
| ३. |
आंध्र प्रदेश |
तेलुगु[124] |
उर्दू इन ज़िलों में दूसरी आधिकारिक भाषा है: कुर्नूल, कडपा, अनंतपुर, गुन्टूर, चित्तूर और नेल्लोर जहां १२% से अधिक जनसंख्या उर्दू को प्राथमिक भाषा के तौर पर बोलती है।[125]
|
| ४. |
उत्तर प्रदेश |
हिन्दी |
उर्दू[126],भोजपुरी,अवधी,संस्कृत
|
| ५. |
उत्तराखण्ड |
हिन्दी |
संस्कृत[127]
|
| ६. |
ओड़िशा |
ओड़िया |
| ७. |
कर्नाटक |
कन्नड
|
| ८. |
केरल |
मलयालम |
अंग्रेज़ी[128]
|
| ९. |
गुजरात |
गुजराती[7]:28 |
| १०. |
गोआ |
कोंकणी[129] |
मराठी,[7]:27 [130] English[131]
|
| ११. |
छत्तीसगढ |
हिन्दी[7]:pg 29 [132] |
छत्तीसगढी[133]
|
| १२. |
जम्मू और कश्मीर |
उर्दू |
अंग्रेज़ी[134]
|
| १३. |
झारखण्ड |
हिन्दी |
संथाली, ओडिया और् बांग्ला[7]
|
| १४. |
तमिल नाडु |
तमिल |
अंग्रेज़ी[7]
|
| १५. |
तेलंगाना |
तेलुगु |
उर्दू इन ज़िलों में दूसरी आधिकारिक भाषा है: हैदराबाद, रंगा रेड्डी, मेडक, निज़ामाबाद, महबूबनगर, अदीलाबाद और वारंगल [125]
|
| १६. |
त्रिपुरा |
बांग्ला और कोक्रोबोरोक[135][136] |
| १७. |
नागालैंड |
अंग्रेज़ी[7] |
| १८. |
पंजाब |
पंजाबी |
| १९. |
पश्चिम बंगाल |
बांग्ला |
अंग्रेज़ी और नेपाली[7]
|
| २०. |
बिहार |
हिन्दी[7] |
उर्दू (कुछ क्षेत्रों और कामों के लिये)[137], अंगिका, भोजपुरी, बज्जिका, और मैथिली
|
| २१. |
मणिपुर |
मणिपुरी(मेइतेई, या मेइतेईलॉन भी कहा जाता है)[138] |
अंग्रेज़ी[7]
|
| २२. |
मध्य प्रदेश |
हिन्दी[139] |
| २३. |
महाराष्ट्र |
मराठी |
| २४. |
मिज़ोरम |
मिज़ो |
| २५. |
मेघालय |
अंग्रेज़ी[140]खासी भाषा और गारो भाषा[141]
|
| २६. |
राजस्थान |
हिन्दी |
| २७. |
सिक्किम |
नेपाली[142] |
११ अन्य भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्ज़ा प्राप्त है, किन्तु सिर्फ़ संस्कृति और परंपरा के संरक्षण के नज़रिये से [143]
|
| २८. |
हरियाणा |
हिन्दी[144] |
पंजाबी[145]
|
| २९. |
हिमाचल प्रदेश |
हिन्दी[146] |
अंग्रेज़ी[7]:13
|
संस्कृति
भारत की सांस्कृतिक धरोहर बहुत सम्पन्न तथा समृद्ध है। यहाँ की संस्कृति अद्वितीय है एवं वर्षों से इसके कई अवयव अब तक अक्षुण्ण हैं। आक्रमणकारियों तथा प्रवासियों से विभिन्न चीजों को समेट कर यह एक मिश्रित संस्कृति बन गई है। आधुनिक भारत का समाज, भाषाएं, रीति-परम्परा इत्यादि इसका प्रमाण हैं। ताजमहल तथा अन्य उदाहरण, इस्लाम प्रभावित स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने हैं।
भारतीय समाज बहुधार्मिक, बहुभाषी तथा मिश्र-सांस्कृतिक है। पारम्परिक भारतीय पारिवारिक मूल्यों को बहुत आदर की दृष्टि से देखा जाता है।
विभिन्न धर्मों के इस भूभाग पर कई मनभावन पर्व त्यौहार मनाए जाते हैं - दिवाली, होली, दशहरा, पोंगल तथा ओणम, ईद उल-फ़ित्र, ईद-उल-जुहा, मुहर्रम, क्रिसमस आदि भी बहुत लोकप्रिय हैं।
भारत में संगीत तथा नृत्य की अपनी शैलियां भी विकसित हुईं, जो बहुत ही लोकप्रिय हैं। भरतनाट्यम, ओडिसी, कथक प्रसिद्ध भारतीय नृत्य शैली है। हिन्दुस्तानी संगीत तथा कर्नाटक संगीत भारतीय परम्परागत सङ्गीत की दो मुख्य धाराएं हैं। लोक नृत्यों में सम्मिलित हैं पंजाब का भांगड़ा, असम का बिहू, झारखंड का झुमइर और डमकच, झारखंड और उड़ीसा का छाऊ, राजस्थान का घूमर, गुजरात का डांडिया और गरबा, कर्नाटक जा यक्षगान, महाराष्ट्र का लावनी एवं गोवा का देख्ननी ।
यद्यपि हॉकी देश का राष्ट्रीय खेल है, क्रिकेट सबसे अधिक लोकप्रिय है। वर्तमान में फुटबॉल, हॉकी तथा टेनिस में भी बहुत भारतीयों की अभिरुचि है। देश की राष्ट्रीय क्रिकेट समूह १९८३ तथा २०११ में दो बार विश्व कप एवं २००७ का २०–२० विश्व-कप जीत चुकी है। इसके अतिरिक्त वर्ष २००३ में वह विश्व कप के फाइनल तक पहुँची थी। १९३० तथा ४० के दशक में हॉकी भारत में अपने चरम पर थी। मेजर ध्यानचंद ने हॉकी में भारत को बहुत प्रसिद्धि दिलायी एवं एक समय भारत ने अमरीका को २४–० से हराया था जो अब तक विश्व कीर्तिमान है। शतरंज के जनक देश भारत के खिलाड़ी विश्वनाथ आनंद ने अत्युत्तम प्रदर्शन किया है।
वैश्वीकरण के इस युग में शेष विश्व की समान भारतीय समाज पर भी अंग्रेजी तथा यूरोपीय प्रभाव पड़ रहा है। बाहरी लोगों की गुणों को अपनाने की भारतीय परम्परा का नवीन कालखण्ड कई भारतीयों की दृष्टि में उचित नहीं है। एक खुले समाज के जीवन का यत्न कर रहे लोगों को मध्यमवर्गीय तथा वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है। कुछ लोग इसे भारतीय पारम्परिक मूल्यों का हनन भी मानते हैं। विज्ञान तथा साहित्य में अधिक प्रगति न कर पाने की कारण से भारतीय समाज यूरोपीय लोगों पर निर्भर होता जा रहा है। ऐसे समय में लोग विदेशी आविष्कारों का भारत में प्रयोग अनुचित भी समझते हैं।
भारतीय पर्व
भारत में कई सारे पर्व मनाए जाते हैं, जिसमें २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस, १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस, २ अक्टूबर को गांधी जयंती, दिवाली, होली, नवरात्रि, रामनवमी, दशहरा एवं ईद सम्पूर्ण देश में मनायी जाती है। इसके अतिरिक्त अन्य पर्व राज्यों के अनुसार होते हैं।
सिनेमा और टेलीविज़न
भारतीय फिल्म उद्योग, विश्व की सर्वाधिक देखी जाने वाली सिनेमा का उत्पादन करता है। इसके अतिरिक्त यहाँ असमिया, बंगाली, भोजपुरी, हिन्दी, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, गुजराती, मराठी, ओडिया, तमिल तथा तेलुगू भाषाओं के क्षेत्रीय सिनेमाई परम्पराएं भी विद्यमान हैं। दक्षिण भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय फिल्म राजस्व में ७५% से अधिक का भाग है। भारत में सितम्बर २०१६ तक २२०० मल्टीप्लेक्स स्क्रीन सिनेमाघर थे तथा इसके २०१९ तक ३००० तक बढ़ने की अपेक्षा की गयी हैं।[147]
१९५९ में भारत में टेलीविजन का प्रसारण, राज्य सञ्चालित सञ्चार के माध्यम के रूप में आरम्भ हुआ, तथा अगले दो दशकों तक इसका धीमी गति से विस्तार हुआ। १९९० के दशक में टेलीविजन प्रसारण पर राज्य के एकाधिकार समाप्त हो गया, तथा तब से, उपग्रह चैनलों ने भारतीय समाज की लोकप्रिय संस्कृति को आकार दिया है। आज, भारत में टेलीविज़न मनोरञ्जन का सबसे प्रचलित माध्यम हैं, तथा इसकी पैठ समाज के प्रत्येक वर्ग तक फैली हैं। उद्योग के अनुमान हैं कि भारत में २०१२ तक ४६२ मिलियन उपग्रह अथवा केबल कनेक्शन के साथ, सकल ५५४ मिलियन से अधिक टीवी उपभोक्ता हैं, मनोरञ्जन के अन्य साधनों में प्रेस मीडिया (३५० मिलियन), रेडियो (१५६ मिलियन) तथा इंटरनेट (३७ मिलियन) भी सम्मिलित हैं
पाक-शैली (खानपान)
भारतीय खानपान बहुत ही समृद्ध है। शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों ही प्रकार का भोजन पसन्द किया जाता है। भारतीय व्यंजन विदेशों में भी बहुत पसन्द किए जाते हैं।
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