अजित कुमार तमिल: அஜித் குமார் (1 मई 1971 हैदराबाद, आंध्र प्रदेश, भारत में जन्मे) एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं, जो तमिल फिल्म उद्योग के अग्रणी अभिनेताओं में से एक माने जाते हैं। रोमांचक मनोवैज्ञानिक फिल्म आसई (Aasai) (1995) में महत्त्वपूर्ण मान्यता पाने से पहले उन्होंने अपना भविष्य तेलुगु फिल्म से शुरू किया। और ये एक रेसर भी है [1] एक के बाद एक सफल फिल्मों की एक डोर बनती गई, जिसने शुरू में अजित को एक रोमांटिक हीरो, उसके बाद एक्शन हीरो और अंततः एक जन प्रतीक के रूप में स्थापित कर दिया।
अजित कुमार तमिल: அஜித் குமார் (1 मई 1971 हैदराबाद, आंध्र प्रदेश, भारत में जन्मे) एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं, जो तमिल फिल्म उद्योग के अग्रणी अभिनेताओं में से एक माने जाते हैं। रोमांचक मनोवैज्ञानिक फिल्म आसई (Aasai) (1995) में महत्त्वपूर्ण मान्यता पाने से पहले उन्होंने अपना भविष्य तेलुगु फिल्म से शुरू किया। और ये एक रेसर भी है [1] एक के बाद एक सफल फिल्मों की एक डोर बनती गई, जिसने शुरू में अजित को एक रोमांटिक हीरो, उसके बाद एक्शन हीरो और अंततः एक जन प्रतीक के रूप में स्थापित कर दिया।
वह अक्सर अपने अभिनय के लिए तारीफ पाते रहे और उन्हें तीन फिल्मफेयर तमिल सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार मिले। सभी तीनों पुरस्कार उन फिल्मों के लिए मिले, जिनमें वह विविध भूमिकाओं में प्रदर्शित हुए. अजित मुख्यतः बड़ी स्टूडियो फिल्मों में प्रमुख भूमिकाएं निभाते हैं, जो रोमांटिक कॉमेडी से लेकर नाटकीय और रोमांचक एक्शन तक होती हैं। अपने अभिनय के अलावा, अजित ने 2004 में ब्रिटिश फॉर्मूला के तीन सत्रों में एक पेशेवर रेसर के रूप में भाग लिया था।[2]
अभिनय कॅरियर
प्रारंभिक वर्ष
अजित हैदराबाद, भारत के एक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार में मंझले बच्चे के रूप में पैदा हुए, जिनका फिल्म उद्योग से कहीं कोई सम्बंध नहीं था। वह चेन्नई, तमिलनाडु में पले बढे. उन्होंने अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने से पहले ही 1986 में असन मेमोरिअल उच्च माध्यमिक स्कूल छोड़ दिया। [3]
उन्होंने एक मेकेनिक के रूप में काम शुरू किया और अपने लिए एक चालक लाइसेंस प्राप्त कर लिया जो कार दौड़ में उनकी रूचि के अनुरूप था। अजित को कार रेसिंग के अपने पेशे को बनाए रखने के लिए, 18 साल की उम्र में ही नौकरी करनी पड़ी. उन्होंने एक कपड़ा निर्यात कंपनी में प्रशिक्षु के रूप में प्रवेश किया, फिर व्यापारी बन गए, साथ ही अखबारों तथा टीवी के लिए छोटे मोटे विज्ञापन करते रहे। उन्होंने दौड़ में बहुत सारा पैसा लगाया. वह दोस्तों से टायर उधार लिया करते थे और जब चेन उतर जाती थी तब वह दोस्त उनकी मदद करते थे, कियोंकी उस दौरान दौड़ में कमाई नहीं थी।
एक दुर्घटना के बाद, कई व्यापार एजेंसियों ने उन्हें प्रिंट मीडिया की विज्ञापनों के लिए मॉडलिंग में डाल दिया। उन्हें फिल्मों और दौड़ के बीच चुनाव करना था और चूंकि फिल्मों के ज्यादा अवसर थे तथा उनसे कुछ पैसा हासिल हो रहा था, इसलिए उनहोंने फिल्मों पर अपना ध्यान देना शुरू कर दिया। [3]
20 साल की उम्र में अजित को तेलुगु फिल्म निर्माता, लक्ष्मी प्रोडक्शंस द्वारा उनकी फिल्म में अभिनय के लिए चुना गया, हालाँकि फिल्म के शुरू होते ही उसके निर्देशक की मृत्यु के कारण फिल्म की शूटिंग रोक दी गई।[4] अजित ने 21 साल की उम्र में, कम लागत की तेलुगु फिल्म "प्रेम पुस्तगम" (Prema Pustagam) से अपना फिल्म करियर शुरू किया, जो उनकी अब तक की आखरी प्रत्यक्ष तेलुगु फिल्म है।
उनकी पहली तमिल फिल्म अमरावती (Amaravathi), नवागंतुक निर्देशक सेल्वा द्वारा निर्देशित, तात्कालिक सफलता थी, जिसमें उनकी आवाज़ उनके साथी अभिनेता, विक्रम द्वारा दी गई थी।[3] रिलीज़ के बाद, अजित ने शौकिया एक मोटर रेस के लिए प्रशिक्षण शुरू किया, वह गिर पड़े, जिसमें उनकी पीठ पर चोट आई और उनके तीन प्रमुख ऑपरेशन करने पड़े, परिणामस्वरूप उन्हें डेढ़ साल के लिए बिस्तर पकड़ना पड़ा.[4] चोट लगने के बाद, 1993 में अजित ने अरविंद स्वामीअभिनीत, पासमलर्गल (Paasamalargal), में एक सहायक भूमिका निभाई. इस के बाद वह पारिवारिक नाटक, पवित्रा (Pavithra), में एक बीमार के किरदार में नज़र आए जिसे राधिका से मातृ स्नेह प्राप्त होता हुआ दर्शाया गया।[5]
रोमांटिक हीरो (1995-2000)
इस दौरान, अजित मीडिया में एक होनहार रोमांटिक अभिनेता के रूप में देखे जाने लगे, जैसे ही उन्होंने स्थापित रोमांटिक अभिनेताओं, मुरली, पर्तिपन, प्रशान्त, अरविंद स्वामी, कार्तिक और प्रबु, पर बॉक्स ऑफिस गणनाओं में वितरकों के खातों पर बढ़त हासिल कर ली। इसके अलावा, अजित ने अपने लापरवाह साक्षात्कारों के लिए बदनामी मोल ली।
1995 में, अजित ने अपनी पहली ब्लोकबस्टर फिल्म, आसई (Aasai) में काम किया जिसने बॉक्स ऑफिस पर 1 करोड़ डॉलर की कमाई की। वसंत द्वारा निर्देशित और मणि रतनम द्वारा निर्मित इस फिल्म में उन्हें सुवलक्ष्मी के विपरीत मुख्य भूमिका में फिल्माया गया।[1][6] अगथियाँ की वान्मती (Vaanmathi) भी एक संगीत हिट रही और उन्होंने बाद में कल्लूरी वासल (Kalloori Vaasal) में प्रमुख भूमिका निभाई जिसमें प्रशान्त उनके सह अभिनेता थे।[3]
अगले ही वर्ष, अजित की दूसरी ब्लोकबस्टर फिल्म कद्हल कोत्तई (Kadhal Kottai)राष्ट्रीय पुरस्कारके रूप में आई, जिस में उन्होंने दुबारा अगथियाँ के साथ काम किया।[7] यह फिल्म बिना शर्त प्रेम में पड़े दो लोगों की कहानी बताती है, जो फिल्म की अंत तक एक दूसरे को नहीं देख पाते. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 2 करोड़ डॉलर की कमाई की। [8]
1997 में वह अमिताभ बच्चन का पहला तमिल निर्माण उल्लासम (Ullasam) में नज़र आए। [3]
सन 1998 में अजित ने "मसाला फिल्म" के साथ सरन की फिल्म कादल मन्नन (Kadhal Mannan), में अभिनय किया, जो उनके बढ़ते प्रशंसकों के विस्तार का आधार बना। [3] इसके बाद की फिल्मे अवल वरुवाला (Aval Varuvala) और उन्निदात्तिल ऐन्नेइ कोडूतेन (Unnidathil Ennai Koduthen) भी काफी सफल रहीं, इन में से दूसरी फिल्म में अजित एक प्रशंसनीय मेहमान भूमिका में नज़र आए।
1999 में, सुन्दर सी की रोमांटिक नाटक उन्नैतेदी (Unnaithedi) हिट हो गई जिसने उनकी सफलता की एक शृंखला की शुरुआत की। एस जे सूर्या की ब्लाक बस्टर रोमांचक फिल्म, वाली (Vaali), जिसमें उन्हें नायक और खलनायक की दोहरी भूमिकाओं में दर्शाया गया, ने बॉक्स ऑफिस पर 3 करोड़ डॉलर की कमाई की। [4] अजित का विश्वस्त कर देने वाला, सामंजस्य विपरीत गुणों वाले दो भाइयों के चित्रण ने उन्हें अपना प्रथम फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिलवाया.[9] इसके अलावा यह संवेदनशील भूमिका आलोचकों द्वारा भी सराही गई और उन्होंने दावा किया की फिल्म एक "तात्कालिक साहितिक" रचना है।[10] इसके बाद, सफल भावपूर्ण नाटक आनंद पुन्गाट्रे (Anandha Poongatre) और नी वरुवाई ऐना (Nee Varuvai Ena) में उनके सहायक अभिनय के लिए भी अजित को काफी प्रशंशा मिली। नई सहस्राब्दी कि शुरुआत से पहले, उनकी अंतिम परियोजना सरन द्वारा निर्देशित फिल्म अमर्कलम (Amarkalam) थी, जिसमें शालिनी भी उनके साथ थीं, जिनसे उन्होंने फिल्म पूरा होते ही शादी कर ली। [11]
मुगवरी (Mugavari) ने उन्हें व्यवसायिक सफलता और आलोचकों की प्रशंसा दिलाई.[12][13] सन 2000 में उन्होंने ए.आर.रहमान कि संगीत हिट और राजीव मेंनन द्वारा निर्देशित फिल्म कण्डुकोण्डेन कण्डुकोण्डेन (Kandukondain Kandukondain) में अभिनय किया। फिल्म में अजित के साथ मशहूर अभिनेता माम्मूटी और ऐश्वर्य राय को चित्रित किया गया।[11][14][15][16]
एक्शन हीरो (2000-05)
इस अवधि के दौरान, अजित अपने प्रशंसकों और मीडिया में सिर्फ एक रोमांटिक नायक के रूप में ही नहीं, बल्कि बड़े परदे पर एक स्टाइलिश एक्शन नायक के रूप में देखे जाने लगे। हालांकि, इस अवधि में भी उनकी 'न कोई विशेष' नीति के कारण मीडिया के साथ बढती दरार देखी गई।
सन् 2001 में, अजित, ए.आर.मुरुगादासकी पहली फिल्म दीना में (Dheena) लैला मेह्दीन और सुरेश गोपीके साथ नज़र आए। फिल्म ने अप्रत्यक्ष रूप से अजित कि एक नई छवि की शुरुआत की, जिसने एक्शन हीरो के रूप में आम जनता को अपील किया। इसके अलावा, इस सफल फिल्म में अजित का उपनाम तलई, अर्थात् तमिल के लिए नेता, उनके प्रशंसकों और मीडिया के बीच उनका ब्रांड लेबल बन गया। उनकी अगली परियोजना सांस्कृतिक फिल्म सिटिज़न (Citizen) थी, जिसमें अजित को दस अलग अलग रूप में चित्रित किया गया। इस फिल्म में उन पर दूरतम सितारे के रूप में टिप्पिनी की गई। यह मानद उपाधि उनकी सभी फिल्मों में पूरे दशक इस्तेमाल किया गया। भावपूर्ण नाटक पुवेल्लाम उन वासम में ज्योतिका के विपरीत उनकी भूमिका ने व्यावसायिक एवं समालोचनात्मक सफलता दिलवाई, साथ ही तमिलनाडु राज्य द्वारा, विशेष सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार प्राप्त करवाया. वर्ष के अंत में अजित, संतोष शिवन की हिन्दी परियोजना अशोका (Asoka) में शाहरुख खान के साथ एक संक्षिप्त नकारात्मक भूमिका में दिखाई देये.
वर्ष 2002 में अजित तीन फिल्मों में नज़र आये, पहली दो फिल्म रेड (Red) और राजा (Raja) ने औसत कारोबार किया। लेकिन तीसरी फिल्म विलेन (Villain) जिसमें अजित ने दोहरी भूमिकाएं निभाई, एक, मानसिक रूप से बीमार विकलांग की, जो बॉक्स ऑफिस पर 5 करोड़ डॉलर से अधिक की कमाई करने वाली ब्लोक्बस्तर फिल्म बनी और अजित को अपना दूसरा फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ तमिल अभिनेता पुरस्कार भी मिला। तब तक, वितरकों को अजित की प्रसिद्धि मूल्य का अंदाजा हो गया था और उन्हें किंग ऑफ़ ओपनिंग की मान्यता मिली दे दी गई।[17]
अगले कुछ वर्ष, 2003 से 2005 तक, अजित को बहुत कम फिल्मों में देखा गया, कियोंकि उनका ध्यान मोटर कार रेसिंग की तरफ रहा। वर्ष 2003 में उनकी लम्बे अरसे से विलंबित फिल्म [[एन्नेइ तालाट वरुवाला/0} (Ennai Thalatta Varuvala) और पुलिस-रोमांचक अन्जनेया|एन्नेइ तालाट वरुवाला/0} (Ennai Thalatta Varuvala) और पुलिस-रोमांचक अन्जनेया ]] (Anjaneya) रिलीज़ हुई।
स्नेहा के साथ उनकी अगली फिल्म जाना (Jana), की आलोचकों द्वारा निंदा की गई जबकि सरन की फिल्म, अट्टागसम (Attagasam) सफल साबित हुई। फिल्म में अजित को दोहरी भूमिकाओं में देखा गया और थलाइ दीपावली गीत उनकी एक्शन हीरो की छवि को बढ़ावा देने के लिए लिखा गया जिसने मीडिया में उनके उपनाम तलई को और मज़बूत कर दिया।
2005 में, लिंगुस्वमी फिल्म जी (Ji) सकारात्मक समीक्षाएँ सृजित करने के बावजूद, अट्टागसम (Attagasam) द्वारा दी गई सफलता की गति बरकरार नहीं रख पाई.
जन चिह्न (2005 - वर्तमान)
इस अवधि के दौरान, अजित की फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर लगातार बढ़ते आरंभिक शक्ति के लिए जानी जाने लगी, जो कि उनकी मजबूत पुरुष प्रधान प्रशंषकों के कारण था। वह अपने प्रशंसकों और मीडिया में न सिर्फ एक एक्शन हीरो, बल्कि एक सामूहिक प्रतीक (जन चिन्ह) के रूप में देखे जाने लगे।
2006 के दौरान, पी.वासु की फिल्म परमसिवन (Paramasivan) में अजित अपने अंतराल से लौटे, जिसमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाने के लिए बीस किलोग्राम वज़न कम किया। इसी प्रकार उनकी अगली फिल्म, AVM प्रोडक्शन की पेरारासु द्वारा निर्देशित तिरुपति (Thirupathi) को सकारात्मक मीडिया समीक्षाएँ मिलीं। अजित की एक कामयाब वापसी हुई, लम्बे समय से रुकी ब्लाक बस्टर फिल्म वरलारू (Varalaru) के रिलीज़ से, जिसने बॉक्स ऑफिस पर 12 लाख डॉलर का कारोबार करके एक नइ चोटी छु ली। फिल्म ने अजित को अपना तीसरा फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिलवाया.
2007 में अजित की पहली फिल्म आलवर (Aalwar) रिलीज़ हुई जिसे आलोचकों द्वारा काफी आलोचना बर्दाश्त करनी पड़ी. जब की किरीदम जो 1989 में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मलयालम फिल्म का रीमेक थी, उसे भारी सकारात्मक समीक्षाएँ मिली। फिर अजित ने 1980 के दशक में रजनीकान्त अभिनीत फिल्म की रीमेक, बिल्ला (Billa) में अभिनय किया जिसने बॉक्स ऑफिस पर 14 करोड़ डॉलर की कमाई की और उनके प्रतिद्वंद्वियों पर दबाव बढ़ा दिया। [18] फिल्म ने अजित को समालोचनात्मक प्रशंसा दिलाई और भारत में स्टाइलिश कला निर्देशन और छायांकन का एक चलन बन गया।
2008 में उन्होंने अय्न्गरण अंतर्राष्ट्रीय निर्माण, एगन (Aegan) में अभिनय किया, जो कोरियोग्राफर से निर्देशक बने राजू सुंदरम द्वारा निर्देशित किया गया था। फिल्म 2004 की हिन्दी कॉमेडी मैं हूं ना (Main Hoon Na) का रीमेक थी।
एक अच्छे फिल्म निर्माण वर्ष के बाद, अजित की नवीनतम रिलीज़ आसल (Aasal), एक सजीव रोमांचक फिल्म थी। उनके सह निर्देशन में बनी इस फिल्म में सहोदर स्पर्द्धा को दर्शाया गया। फरवरी 2010 में रिलीज़ हुई इस फिल्म ने अब तक की सबसे व्यापक ओपनिंग की और बॉक्स ऑफिस पर 15 मिलियन डॉलर की कमाई की। वह एक अनुबंध के तहत काम कर रहे थे, जिस से उन्हें पारिश्रमिक के तौर पर 1.25 मिलियन डॉलर नकदी के अलावा फिल्म के अधिकारों की बिक्री से 30 प्रतिशत हिस्से का लाभ मिलना था।
एक महान दक्षिण भारतीय अभिनेता के रूप में।[19]
रेसिंग करियर
अजित एक पेशेवर "कार रेसर" हैं और उन्होंने भारत के कई जगहों जैसे मुंबई, चेन्नई और दिल्ली की परिक्रमा की है। वह कई दौड़ में भाग लेने के लिए विदेश भी गए हैं, जिनमे जर्मनी और मलेशिया शामिल हैं। उन्होंने 2003 में फार्मूला एशिया बीएमडब्ल्यू चैंपियनशिप में भाग लिया।[20]
निजी जिन्दगी
अजित कई धर्मों के मानने वाली संस्कृति से आते हैं, कियोंकि उनके पिता पी. सुब्रमण्यम, पलक्कड़ के एक तमिल ब्राह्मण थे और उनकी माँ मोहिनी, कोलकत्ता, पश्चिम बंगाल से सिंधी मूल की थी।[2][2][21] अजित ने बाद में, अपने माता पिता के नाम पर 'मोहिनी-मणि "फाउंडेशन, एक गैर मुनाफे वाला संगठन बनाया ताकि स्वयं स्वच्छता और नागरिक चेतना को बढ़ावा मिले जो शहरी फैलाव की समस्याओं को सहज बनाने में मदद करे.[22] अजित कुमार तीन भाइयों में मझले बेटे थे, जिनमे दुसरे अनिल कुमार, जो न्यूयॉर्क में शेयर दलालहैं और अनूप कुमार जो एक मद्रास आईआईटी स्नातक हैं और सिएटल में काम करते हैं। इसके अलावा, अजित की दो जुड़वाँ छोटी बहनों थीं, जो दोनों कम उम्र मैं ही चल बसीं.[2] अभिनेत्री शालिनी से शादी करने पर वह अभिनेता रिचर्ड ऋषिऔर अभिनेत्री शामिली के बहनोई बन गए जो राजीव मेनन की फिल्म कण्डुकोण्डेन कण्डुकोण्डेन (Kandukondain Kandukondain), में उनकी साली के किरदार में दिखीं थी।[23][24]
3 जनवरी 2008 को चेन्नई में उनकी बेटी, अनुष्का का जन्म हुआ।[25]
2010 की शुरुआत में, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री द्वारा अजित को अचूक बताया गया।[26]
पुरस्कार और नामांकन
जीता:
- फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (वाली के लिए) (1999)
- फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार विल्लैन के लिए (2002)
- फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार वरलारू:हिस्टरी ऑफ़ गौडफादर के लिए (2006)
- तमिलनाडु राज्य फिल्म विशेष पुरस्कार पूवेल्लम अन वासम के लिए (2001)
- विजय पसंदीदा हीरो पुरस्कार : वरलारू:हिस्टरी ऑफ़ गौडफादर के लिए (2006)
मनोनीत
- ज़ी सिने 2001 (अशोका के लिए एक नकारात्मक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार)
- विजय 2008 (Aegan के लिए पसंदीदा हीरो के लिए पुरस्कार)
फिल्मोग्राफी
| वर्ष
|
फिल्म
|
भूमिका
|
नोट्स / पुरस्कार
|
| 1992
|
प्रेम पुस्तकम
|
सिद्धार्थ
|
पहली तेलुगु फिल्म
|
| 1993
|
अमरावती
|
अर्जुन
|
पहली तमिल फिल्म
|
| 1994
|
पासमलर्गल
|
कुमार
|
अतिथि उपस्थिति
|
| पवित्रा
|
अशोक
|
| 1995
|
राजाविन पारवयिले
|
चंद्रू
|
अतिथि उपस्थिति
|
| आसई
|
जीवा
|
| 1996
|
वानमति
|
कृष्ण
|
| कल्लूरी वासल
|
वसंत
|
| माइनर मप्पिल्लई
|
सुनील
|
| कादल कोटई
|
सूर्य
|
| 1997
|
नेसम
|
नाथन
|
| रेटई जाडई वयसु
|
शिवकुमार
|
| राशि
|
कुमार
|
| उल्लासम
|
गुरु
|
| पगईवन
|
प्रभु
|
| 1998
|
कादल मन्नन
|
शिवा
|
| अवल वरुवाला
|
जीवा
|
| उन्निदात्तिल ऐन्नेइ कोडूतेन
|
संजय
|
अतिथि उपस्थिति
|
| वुयिरोडू वुयिरागा
|
अजय
|
| 1999
|
तोड़रुम
|
आनंद
|
| उन्नई तेडी
|
रघु
|
| वाली
|
शिवा, देवा
|
विजेता : फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ तमिल अभिनेता पुरस्कार
|
| आनंद पुन्गाट्रे
|
जीवा
|
| नी वरुवई ऐना
|
सुब्रमणि
|
अतिथि उपस्थिति
|
| अमर्कलम
|
वासु
|
| 2000
|
मुगवरी
|
श्रीधर
|
| कण्डुकोण्डेन कण्डुकोण्डेन
|
मनोहर
|
| उन्नई कोडु एन्नइ थरूवेण
|
सूर्य
|
| 2001
|
दीना
|
दीना
|
| सिटिज़न
|
अरिवानन्दम, सुब्रमणि
|
| पूवेल्लाम उन वासम
|
चिन्ना
|
विजेता, तमिलनाडु राज्य फ़िल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार
|
| अशोका
|
सुसीमा
|
नामजद, ज़ी सिने एक नकारात्मक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार हिन्दी फिल्म
|
| 2002
|
लाल
|
लाल
|
| राजा
|
राजा
|
| विल्लैइन
|
शिव, विष्णु
|
विजेता: फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ तमिल अभिनेता पुरस्कार
|
| 2003
|
एन्नेइ तालाट वरुवाला
|
सतीश
|
अतिथि उपस्थिति
|
| अन्जनेया
|
परमगुरु
|
| 2004
|
जाना
|
जाना
|
| अट्टगासम
|
गुरु जीवा
|
| 2005
|
जी
|
वासु
|
| 2006).
|
परमसिवन
|
परमसिवन (सुब्रमनिया शिवा)
|
| तिरुपति
|
तिरुपति
|
| वरलारू
|
शिवशंकर, विष्णु, जीवा
|
विजेता : फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ तमिल अभिनेता पुरस्कार विजेता, फिल्म फ़ेअर सर्वश्रेष्ठ तमिल अभिनेता पुरस्कार विजेता, विजय पुरस्कार पसंदीदा हीरो के लिए
|
| 2007
|
आलवर
|
शिवा
|
| किरीदम
|
सक्तिवेल राजाराजन
|
| बिल्ला
|
डेविड बिल्ला, सरावना वेलू
|
| 2008
|
एगन
|
शिवा
|
नामजद, विजय पसंदीदा हीरो के लिए पुरस्कार
|
| 2010
|
आसल
|
शिवा, जीवनन्दम
|
चलचित्र की पटकथा लिखनेवाला, सह निर्देशक
|
| 2011
|
थूप्परियुम आनंद
|
पूर्व उत्पादन (अजित की ५० वीं फिल्म) दयानिती अलागिरी द्वारा निर्मित क्लाउद नाइन सिनेमा तले गौतम मेनन द्वारा निर्देशित
|