धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (जन्म 4 जुलाई 1996, धीरेंद्र कृष्ण गर्ग ) [2] [3] , जिन्हें बागेश्वर धाम सरकार या महाराज के नाम से भी जाना जाता है, [4] [5] भारत के मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक धार्मिक तीर्थ स्थल बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश हैं। [6] वह छतरपुर के बागेश्वर धाम में कथा वाचन करते हैं। [7] [8] [9] [10] प्रारंभिक जीवन परिवार उनका जन्म 4 जुलाई 1996 को छतरपुर जिले के गढ़ा गांव में एक गर्ग (ब्राम्हण) कुल में हुआ था। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री गर्ग का बचपन उनके ही गांव में बीता है। वह एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। [11] [12] [13] उन्होंने अपनी…
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (जन्म 4 जुलाई 1996, धीरेंद्र कृष्ण गर्ग)[2][3], जिन्हें बागेश्वर धाम सरकार या महाराज के नाम से भी जाना जाता है,[4][5] भारत के मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक धार्मिक तीर्थ स्थल बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश हैं।[6] वह छतरपुर के बागेश्वर धाम में कथा वाचन करते हैं।[7] [8][9][10]
प्रारंभिक जीवन
परिवार
उनका जन्म 4 जुलाई 1996 को छतरपुर जिले के गढ़ा गांव में एक गर्ग (ब्राम्हण) कुल में हुआ था। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री गर्ग का बचपन उनके ही गांव में बीता है। वह एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। [11] [12] [13] उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से प्राप्त की। [14] [15]अपने बचपन में आस-पास के गाँवों में वे दान मांगकर,रामचरितमानस और सत्यनारायण कथा सुनाकर जीविकोपार्जन करते थे। वर्तमान में वह अविवाहित हैं परन्तु शीघ्र ही विवाह करने का विचार कर रहे हैं | उन्होंने ये भी बताया की जयाकिशोरी Archived 2023-09-03 at the वेबैक मशीन उनकी बहन है जिसकी तथा उनके और जयाकिशोरी के विवाह की खबर अफवाह मात्र है।
आध्यात्मिक जीवन
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्म और पालन-पोषण एक हिंदूगर्ग ब्राह्मण परिवार में हुआ, जहां उनके पिता एक पुजारी के रूप में काम करते हैं। उनके अनुसार न ही वो किसी देवता के अवतार हैं न ही वो कोई तांत्रिक हैं, मात्र एक साधारण मानव हैं जिनके पास हनुमान और सन्यासी बाबा के आशीर्वाद से सिद्धियां प्राप्त हैं| वे इन शक्तियों को जनकल्याण और मानव सेवाहितार्थ काम में लेते है और उनकी मानसिक,शारीरिक समस्याओ का निदान करते है | पंडित धीरेंद्र शास्त्री के परिवार द्वारा बागेश्वर धाम की सेवा 3 पीढ़ियों से की जा रही है।
संपत्ति
शास्त्री के अनुसार उनके पास निजी संपत्ति के रूप में एक मोटरसाइकिल हैं उसके अलावा जितने भी दान दक्षिणा इत्यादि प्राप्त होता है वह सेवा में उपयोग होता है | उनके अनुसार उन्होंने नौ एकड़ जमीन खरीदी है जिसपर वह कैंसर अस्पताल का निर्माण कर रहे हैं |[16] धाम में आया दान मंदिर विस्तार , जन कल्याण कार्य जैसे कन्याओ का विवाह , रोगों के निदान के लिए और अन्नपूर्णा भंडारा में लगाया जाता है |[17]जिसमे प्रतिदिन कई हजार भक्त प्रसाद ग्रहण करते है |
बागेश्वर धाम सरकार
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पीठाधीश्वर और बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख हैं, जो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ा गाँव में भगवान हनुमान को समर्पित एक हिंदू तीर्थ स्थल है। धाम में शास्त्री एक दिव्य दरबार का आयोजन करते हैं जहाँ ऐसा माना जाता है कि वह अपनी दैवीय शक्तियों से लोगों की सभी शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक पीड़ाओं को ठीक करते हैं जो उन्हें दादा गुरु से मिली थी। लल्लनटॉप के साथ एक साक्षात्कार में शास्त्री ने बताया कि वह अपने दादा गुरु के बाद धाम के प्रमुख के रूप में सेवा करने वाली तीसरी पीढ़ी हैं।
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विवाद
अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के श्याम मानव ने चुनौती देते हुए कहा था कि अगर वो लोगों का दिमाग़ पढ़ लेने के अपने दावे को साबित करते हैं तो उन्हें 30 लाख रुपये का ईनाम दिया जाएगा, इसके साथ मानव ने शास्त्री पर अंध विश्वास को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। परन्तु धीरेंद्र शास्त्री ने इस चुनौती को स्वीकार नहीं किया और वो नागपुर का कार्यक्रम छोड़कर चले गए।[22] इसके पश्चात शास्त्री ने मानव को मध्य प्रदेश स्थित दरबार में आमंत्रित किया और वह जो भी जानना चाहते हैं उनसे पूछने के लिए कहा। परन्तु वहाँ फिर श्याम मानव वहां नहीं गये[23] [24]। इस विषय पर उनेह कई प्रमुख हिंदू नेताओं का भी समर्थन मिला[25] [26] [27]। 22 जनवरी, 2023 को कई हिंदू संगठनों ने बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख पुजारी शास्त्री का समर्थन किया।[28] [29] [30] 25 जनवरी, 2023 को नागपुर पुलिस ने धीरेंद्र शास्त्री को नागपुर में उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों में अंधविश्वासी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप में क्लीन चिट दे दी। पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने कहा कि शिकायत की जांच और 'अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति' के संस्थापक शिकायतकर्ता श्याम मानव द्वारा प्रस्तुत "सबूत" की जांच के दौरान, ऐसा कुछ भी नहीं पाया गया जो महाराष्ट्र अंधविश्वास कानून के तहत कार्रवाई को आकर्षित कर सके।[31][32][33][34][35]
आध्यात्मिक जीवन
शास्त्री,जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य हैं। वह वर्तमान में मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक हिंदू तीर्थ स्थल बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर और प्रमुख के रूप में सेवा कर रहे हैं। शास्त्री को रामचरितमानस और शिव पुराण के उपदेश के लिए जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि साधना के माध्यम से उन्हें कुछ दिव्य शक्तियाँ प्राप्त हुई हैं। उन्होंने अपने धाम में अन्नपूर्णा रसोई की स्थापना की है जहां उनके अनुयायियों के लिए निःशुल्क भोजन प्रसाद की व्यवस्था की जाती है। धीरेंद्र शास्त्री गरीब और बेसहारा लड़कियों की शादी का वार्षिक समारोह भी रखते हैं। वह प्राचीन वैदिक अध्ययन और संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए एक वैदिक गुरुकुल की स्थापना कर रहे हैं |[36]
कथित तौर पर, शास्त्री ने 2021 में एक घर वापसी कार्यक्रम के दौरान ईसाई धर्म में परिवर्तित 300 हिंदू लोगों को वापस हिंदू धर्म में लाया। 25 जनवरी, 2023 को मध्य प्रदेश सरकार ने शास्त्री को मिली मौत की धमकी के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी।[37]
23 जनवरी 2023 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर, शास्त्री ने भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए "हमें अपना समर्थन दो, हम हिंदू राष्ट्र देंगे" का नारा दिया।[38][39][40][41] इंडिया टीवी के आपकी अदालत कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि वह सभी धर्मो का सम्मान करते हैं और किसी भी धर्म के प्रति दुर्भावना नहीं रखते परन्तु वह अपने धर्म के लिए आपत्तिजनक टिप्पणियां और कृत्य बर्दाश्त नहीं करेंगे |[42] [43]
दुर्घटना
दिसंबर 2025 के अंत में, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के काफिले के साथ एक सड़क दुर्घटना हुई। भिलाई क्षेत्र में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति अचानक काफिले के अग्रिम वाहन के सामने आ गया, जिससे आगे की गाड़ियों ने अचानक ब्रेक लगाए और पीछे चल रही गाड़ियाँ आपस में टकरा गईं।[44]
Dhirendra Shastri Katha Incident (December 2025) के दौरान, दुर्ग जिले के भिलाई में एक महिला ने कथाक्रम के दौरान अपने हाथ की नस काट ली। बताया गया कि महिला पंडित Dhirendra Shastri से मिलना चाहती थी, लेकिन मुलाकात न हो पाने के कारण उसने यह कदम उठाया।
इस घटना के तुरंत बाद पंडित शास्त्री ने मंच से अपील की कि कोई भी इस तरह के कदम न उठाए। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत मुलाकात के लिए नहीं बल्कि भगवान हनुमान की पूजा और कथा के लिए आए हैं।
इन्हें भी देखे
- बागेश्वर धाम बालाजी मंदिर