रामदेव (जन्म: रामकृष्ण यादव ; 25 दिसम्बर 1965), जिन्हें सामान्यतः बाबा रामदेव के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय योग-गुरु और व्यवसायी हैं। [1] उन्होंने योगासन व प्राणायाम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रामदेव विभिन्न स्थानों पर योग-शिविरों का आयोजन करते हैं और अब तक देश-विदेश के करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योग सिखा चुके हैं। [2] उन्होंने अपने सहयोगी बालकृष्ण के साथ मिलकर बहुराष्ट्रीय एफएमसीजी कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की सह-स्थापना की है। वर्ष 2010 में उन्होंने 2014 के आम चुनाव के लिए एक राजनीतिक दल बनाने की घोषणा की…
रामदेव (जन्म: रामकृष्ण यादव; 25 दिसम्बर 1965), जिन्हें सामान्यतः बाबा रामदेव के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय योग-गुरु और व्यवसायी हैं।[1] उन्होंने योगासन व प्राणायाम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रामदेव विभिन्न स्थानों पर योग-शिविरों का आयोजन करते हैं और अब तक देश-विदेश के करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योग सिखा चुके हैं।[2] उन्होंने अपने सहयोगी बालकृष्ण के साथ मिलकर बहुराष्ट्रीय एफएमसीजी कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की सह-स्थापना की है।
वर्ष 2010 में उन्होंने 2014 के आम चुनाव के लिए एक राजनीतिक दल बनाने की घोषणा की थी।[3] हालाँकि, बाद में वे भारतीय जनता पार्टी के मुखर समर्थक बन गए।[4][5]
प्रारंभिक जीवन
रामदेव का जन्म 1965 में हरियाणा राज्य के महेन्द्रगढ़ जिले में स्थित सैयद अलीपुर नामक गाँव में गुलाबो देवी और रामनिवास यादव के घर हुआ था। उनका वास्तविक नाम रामकृष्ण यादव था।[6] समीपवर्ती गाँव शहजादपुर के सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने खानपुर गाँव के एक गुरुकुल में आचार्य प्रद्युम्न और योगाचार्य बल्देव से वेद, संस्कृत और योग की शिक्षा प्राप्त की। युवावस्था में ही उन्होंने संन्यास लेने का संकल्प लिया और अपना नाम बदलकर 'रामदेव' रख लिया।
सार्वजनिक जीवन
रामदेव ने 1995 में दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की। 2003 से आस्था टीवी पर उनके योग कार्यक्रमों का प्रसारण शुरू हुआ, जिससे उन्हें व्यापक लोकप्रियता मिली। योग को जन-जन तक पहुँचाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत और विदेशों में आयोजित उनके योग शिविरों में आम लोगों के साथ-साथ अभिनेता अमिताभ बच्चन और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी जैसी कई जानी-मानी हस्तियों ने भी भाग लिया है।[7] 2009 में उन्होंने देवबंद (उत्तर प्रदेश) में मुस्लिम समुदाय के एक कार्यक्रम को भी संबोधित किया था।[8]
पतंजलि आयुर्वेद और योगपीठ
योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए रामदेव ने हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ की स्थापना की। वर्तमान में ब्रिटेन, अमेरिका, नेपाल, कनाडा और मॉरीशस में भी इसकी शाखाएं मौजूद हैं। 2006 में उन्होंने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड नामक अत्याधुनिक औषधि निर्माण इकाई स्थापित की। वित्त वर्ष 2015-16 में पतंजलि आयुर्वेद का कारोबार 5000 करोड़ रुपये को पार कर गया था।[9]
उनके प्रवचन विभिन्न टेलीविज़न चैनलों जैसे आस्था टीवी, ज़ी-नेटवर्क और इंडिया टीवी पर प्रसारित होते हैं। उन्होंने 'स्वच्छ भारत अभियान' में भी सक्रिय रूप से भाग लिया और हरिद्वार तथा ऋषिकेश को स्वच्छ करने की पहल की।[10]
भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन
भारत में भ्रष्टाचार और विदेशी बैंकों में जमा "काले धन" को स्वदेश वापस लाने की माँग करते हुए रामदेव ने देशभर में अभियान चलाया। 27 फ़रवरी 2011 को रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा में स्वामी अग्निवेश और अन्ना हजारे भी शामिल हुए थे। 4 जून 2011 को रामदेव ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन शुरू किया। 4 जून की रात को पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद रामदेव को अपने समर्थकों के बीच से निकलना पड़ा और वे बाद में हरिद्वार पहुँचकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मीडिया के सामने आए।[11]
विवाद और आलोचना
श्रम कानून का उल्लंघन
मार्च 2005 में, दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन और कर्मचारी राज्य बीमा योजनाओं जैसे अधिकारों के लिए आंदोलन शुरू किया। प्रशासन, प्रबंधन और श्रमिकों के बीच एक समझौता हुआ जिसमें प्रबंधन न्यूनतम वेतन देने पर सहमत हुआ। हालाँकि, बाद में ट्रस्ट ने कुछ कर्मचारियों को वापस काम पर लेने से इनकार कर दिया, जिसके बाद भारतीय व्यापार संघ 'सीटू' ने इस मामले को उठाया।[12]
रूचि सोया ऋण डिफ़ॉल्ट
अप्रैल 2020 में रिज़र्व बैंक द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, पतंजलि आयुर्वेद द्वारा 2019 में अधिग्रहित कंपनी 'रुचि सोया इंडस्ट्रीज' भारत के शीर्ष 50 विलफुल डिफ़ॉल्टर्स में शामिल थी। आरबीआई ने इसका 2,212 करोड़ रुपये का ऋण बट्टे खाते में डाल दिया था।[13][14]
छद्म विज्ञान और कोविड-19 विवाद
रामदेव की उनके कई अवैज्ञानिक दावों के लिए आलोचना की जाती रही है। कोरोना वायरस महामारी के दौरान उन्होंने दावा किया था कि सांस रोकने के अभ्यास और सरसों के तेल से वायरस को खत्म किया जा सकता है, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था।[15]
जून 2020 में, पतंजलि ने 'कोरोनिल' नामक आयुर्वेदिक दवा लॉन्च की और इसे COVID-19 का "सफल इलाज" बताया। इसके तुरंत बाद, केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें इसे 'इलाज' के रूप में विज्ञापित करने से रोक दिया। बाद में मंत्रालय ने इसे केवल 'इम्यूनिटी बूस्टर' (प्रतिरक्षा बढ़ाने वाली दवा) के रूप में बेचने की अनुमति दी।[16] महाराष्ट्र सरकार ने भी प्रारंभ में राज्य में 'कोरोनिल' की बिक्री पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया था कि वे नकली दावों वाली दवा को नहीं बिकने देंगे।[17]
मई 2021 में, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और डॉक्टरों को लेकर की गई उनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने रामदेव का कड़ा विरोध किया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।[18]
सम्मान
- जनवरी, २००७ में कलिंग औद्योगिक प्रौद्योगिकी संस्थान, भुवनेश्वर ने वैदिक प्रणाली को लोकप्रिय बनाने के उनके प्रयासों को देखते हुए उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की। [19]
- इंडिया टुडे पत्रिका द्वारा लगातार दो वर्षों तक उन्हें भारत के 50 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया गया।
- सितम्बर २००७ में एसोचैम द्वारा उन्हें 'ग्लोबल नॉलेज मिलेनियम ऑनर' प्रदान किया गया।
- राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति द्वारा उन्हें 'महामहोपाध्याय' की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।
- ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय और डी॰वाई॰ पाटिल विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें क्रमशः 'ऑनरेरी डॉक्ट्रेट' और 'डी॰एससी॰ (ऑनर्स) इन योगा' की उपाधि प्रदान की गई।
- जनवरी 2011 में महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल के० शंकरनारायणन द्वारा उन्हें 'चन्द्रशेखरानन्द सरस्वती अवार्ड' प्रदान किया गया।
- जुलाई २०१२ में भारत के प्रधानमंत्री ने उन्हें अहमदाबाद में "तरुण कांति पुरस्कार" से सम्मानित किया। यह पुरस्कार प्रसिद्ध जैन सन्त तरुण सागर जी द्वारा स्थापित है।[20]
- जनवरी २०१५ – में भारत सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित करने की घोषणा की, किन्तु उन्होंने यह कहते हुए यह सम्मान लेने से मना कर दिया कि वे एक संन्यासी हैं।[21][22][23]
- अप्रैल २०१५ – हरियाणा सरकार ने उन्हें योग और आयुर्वेद का ब्राण्ड अम्बेस्डर नियुक्त किया। उन्हें हरियाणा के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया किन्तु उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया।[24][25]
- मई २०१६ - अमेरिका की 'फास्ट कम्पनी' नामक व्यावसायिक पत्रिका ने स्वामी रामदेव को २०१६ के सबसे सृजनशील व्यवसायी व्यक्तियों में २७वें स्थान पर रखा।[26]
- अप्रैल २०१७ - इंडिया टुडे ने भारत के २०१७ के सर्वाधिक शक्तिशाली लोगों में उन्हें ५वें स्थान पर रखा। [27]
- २०२६ के 'जी-संवाद वास्तविक नायक' से सम्मानित किया[28][29][30]
इन्हें भी देखें
- बालकृष्ण
- पतंजलि आयुर्वेद
- भारत स्वाभिमान न्यास
- स्वदेशी आन्दोलन
- प्राकृतिक चिकित्सा
- पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट
- पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क
- पतंजलि फुड्स
- पतंजलि विश्वविद्यालय
- भारतीय शिक्षा बोर्ड
- आचार्यकुलम्
बाहरी कड़ियाँ