भाविश अग्रवाल भारतीय उद्यमी हैं, जिनका काम ओला, ओला इलेक्ट्रिक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े उद्यम कृत्रिम से संबंधित है। उन्होंने यातायात सेवाओं के डिजिटल मंच के रूप में शुरुआत की और आगे चलकर इलेक्ट्रिक वाहनों तथा तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में काम किया। [2] शिक्षा और शुरुआती अनुभव अग्रवाल का जन्म 28 अगस्त 1985 को हुआ। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे से पढ़ाई की। उद्यम शुरू करने से पहले वे माइक्रोसॉफ़्ट रिसर्च में काम कर चुके थे। उनकी तकनीकी पृष्ठभूमि बाद के व्यावसायिक प्रयासों का एक हिस्सा रही। [4] ओला की शुरुआत अग्रवाल ने अंकित भाटी के…
भाविश अग्रवाल भारतीय उद्यमी हैं, जिनका काम ओला, ओला इलेक्ट्रिक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े उद्यम कृत्रिम से संबंधित है। उन्होंने यातायात सेवाओं के डिजिटल मंच के रूप में शुरुआत की और आगे चलकर इलेक्ट्रिक वाहनों तथा तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में काम किया।[2]
शिक्षा और शुरुआती अनुभव
अग्रवाल का जन्म 28 अगस्त 1985 को हुआ। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे से पढ़ाई की। उद्यम शुरू करने से पहले वे माइक्रोसॉफ़्ट रिसर्च में काम कर चुके थे। उनकी तकनीकी पृष्ठभूमि बाद के व्यावसायिक प्रयासों का एक हिस्सा रही।[4]
ओला की शुरुआत
अग्रवाल ने अंकित भाटी के साथ मिलकर ओला शुरू की। यह सेवा ग्राहकों और वाहन चालकों को डिजिटल मंच के माध्यम से जोड़ने पर केंद्रित थी। शहरों में यात्रा की बुकिंग, उपलब्धता और भुगतान को एक सेवा के रूप में संगठित करना इसके कारोबार की मुख्य गतिविधि बनी।[1]
ओला का विस्तार भारत के विभिन्न शहरों तक हुआ। इसके साथ कंपनी ने सुरक्षा, परिचालन और ग्राहकों की अपेक्षाओं से जुड़े सवालों का सामना किया। अग्रवाल ने सार्वजनिक साक्षात्कारों में यात्री सुरक्षा को महत्वपूर्ण चुनौती माना।[1]
इलेक्ट्रिक वाहन
ओला इलेक्ट्रिक के माध्यम से उनका काम विद्युत चालित वाहनों की ओर बढ़ा। वाहन निर्माण, बिक्री और उससे संबंधित तकनीकी व्यवस्था, पहले के यात्रा-बुकिंग कारोबार से अलग कार्यक्षेत्र हैं। अगस्त 2024 में ओला इलेक्ट्रिक का शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध होना कंपनी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।[5]
कृत्रिम और तकनीकी सेवाएँ
अग्रवाल ने कृत्रिम नाम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी उद्यम भी स्थापित किया। जनवरी 2024 में निवेश मिलने के बाद इसके मूल्यांकन पर टेकक्रंच ने रिपोर्ट प्रकाशित की। आगे चलकर इस उद्यम ने अपनी क्लाउड सेवाएँ प्रस्तुत कीं।[2]
कृत्रिम का काम ओला की यातायात सेवा और ओला इलेक्ट्रिक के वाहन कारोबार से अलग क्षेत्र में है। इन उद्यमों को एक ही व्यक्ति से जुड़ा होने के बावजूद उनके अलग उत्पादों और सेवाओं के आधार पर समझना आवश्यक है।[3]
कार्य संस्कृति पर बहस
अग्रवाल ने लंबे कार्य सप्ताह और काम-जीवन संतुलन के विषय पर सार्वजनिक विचार रखे हैं। उनके विचारों की आलोचना भी हुई और कर्मचारियों के काम के माहौल को लेकर रिपोर्टें प्रकाशित हुईं। वे अपने काम करने के तरीके को महत्वाकांक्षी उद्यम बनाने की चुनौती से जोड़ते रहे हैं।[20]
2025 में ओला इलेक्ट्रिक के एक कर्मचारी की मृत्यु से संबंधित मामले में उनके और कुछ अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने की खबर आई। कंपनी ने आरोपों को चुनौती दी। किसी प्राथमिकी या आरोप को दोष सिद्धि के बराबर नहीं माना जा सकता; मामले का वर्णन आरोप, जवाब और कानूनी कार्रवाई के अलग-अलग रूपों में किया जाना चाहिए।[25]