गौतम शान्तिलाल अदाणी (गुजराती: ગૌતમ શાંતિલાલ અદાણી ; जन्म 24 जून 1962) एक भारतीय उद्यमी और स्वयं निर्मित अरबपति हैं, जो अदाणी समूह के अध्यक्ष हैं। अदाणी समूह कोयला व्यापार, कोयला खनन, तेल एवं गैस खोज, बंदरगाहों, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, बिजली उत्पादन एवं पारेषण और गैस वितरण में फैले कारोबार को सम्भालने वाला विश्व स्तर का एकीकृत बुनियादी ढाँचा है। [2] 33 वर्षों के व्यापार अनुभव के साथ गौतम अदाणी प्रथम पीढ़ी के उद्यमी हैं, जिन्होंने अपेक्षाकृत लघु समय में $200 अरब का पेशेवर कारोबारी साम्राज्य अदाणी समूह का नेतृत्व करने वाले एक मामूली पृष्ठभूमि के व्यक्ति…
गौतम शान्तिलाल अदाणी (गुजराती: ગૌતમ શાંતિલાલ અદાણી; जन्म 24 जून 1962) एक भारतीय उद्यमी और स्वयं निर्मित अरबपति हैं, जो अदाणी समूह के अध्यक्ष हैं। अदाणी समूह कोयला व्यापार, कोयला खनन, तेल एवं गैस खोज, बंदरगाहों, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, बिजली उत्पादन एवं पारेषण और गैस वितरण में फैले कारोबार को सम्भालने वाला विश्व स्तर का एकीकृत बुनियादी ढाँचा है।[2] 33 वर्षों के व्यापार अनुभव के साथ गौतम अदाणी प्रथम पीढ़ी के उद्यमी हैं, जिन्होंने अपेक्षाकृत लघु समय में $200 अरब का पेशेवर कारोबारी साम्राज्य अदाणी समूह का नेतृत्व करने वाले एक मामूली पृष्ठभूमि के व्यक्ति हैं।[3] उन्हें व्यापार-परिवहन एवं परिवहन सम्बंधी बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए विश्व भर के 100 सबसे प्रभावशाली व्यवसायियों में गिना जाता है।
12 अप्रैल 2022 को गौतम अदाणी दुनिया के छठे सबसे अमीर शख़्स बन गए थे। अदाणी समूह के शेयरों में ज़बरदस्त तेज़ी की वजह से उनकी संपत्ति में यह उछाल देखने को मिला था [4]।
2022 में अपने जन्मदिन और पिता की 100वीं पुण्यतिथि पर अदाणी ने अपनी संपत्ति में से $7.7 अरब (क़रीब ₹60 हज़ार करोड़) सामाजिक कार्यों के लिए दान करने का संकल्प लिया हैं [5]। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट प्रकाशित होने बाद अदाणी की संपत्ति में भारी गिरावट देखने को मिली। 24 फ़रवरी 2023 तक इनकी संपत्ति गिरकर $33 अरब के क़रीब बची। इस प्रकार अदाणी दुनियाभर के टॉप 30 अरबपतियों की सूची से बाहर हो गए।
पूर्व का जीवन
गौतम अदाणी का जन्म 24 जून 1962 को अहमदाबाद के रतनपोल में स्थित सेठ नी पोल क्षेत्र के गुजराती जैन परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम शान्तिलाल जैन एवं माता का नाम शान्ता जैन अदाणी है और उनके सात भाई-बहन हैं। उनके माता पिता आजीविका के लिए थराड़ कस्बे से गुजरात के उत्तरी हिस्से बस गये, अदाणी इनका एक गौत्र है। नब्बे के दशक में गौतम अदाणी का अपहरण हुआ था। कहा जाता है कि फ़िरौती के लिए उनका अपहरण किया गया था[6]।
करियर
गौतम अदाणी को सिर्फ़ 16 साल की उम्र में कारोबार में हाथ आज़माने के लिए मुंबई जाना पड़ा। साल 1978 में वह मुंबई गए और हीरे का कारोबार शुरू किया। लेकिन 1981 में वह गुजरात लौट गए और अपने भाई की प्लास्टिक की फ़ैक्ट्री में काम शुरू किया। साल 1988 में उन्होंने कमोडिटी का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट करने वाली कंपनी के रूप में अदाणी इंटरप्राइज़ेज़ की शुरुआत की[7]। साल 1991 में हुए आर्थिक सुधारों की बदौलत अदाणी का बिज़्निस जल्द ही डायवर्सिफ़ाईड हुआ और वह एक मल्टीनैशनल बिज़्निसमैन बन गए[8]। साल 1995 का साल गौतम अदाणी के लिए बेहद सफल साबित हुआ, जब उनकी कंपनी को मुंद्रा बंदरगाह के संचालन का कॉन्ट्रैक्ट मिला। 1996 में अदाणी पावर लिमिटेड अस्तित्व में आई। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में माइंस, पोर्ट और रेलवे जैसे कारोबार में कदम रखा। साल 2010 में उन्होंने इंडोनेशिया में माइनिंग का कारोबार शुरू किया। साल 2011 में अदाणी ग्रुप ने ऑस्ट्रेलिया के अबॉट पॉइंट कोल टर्मिनल को $2.72 अरब में ख़रीदा।
आज अदाणी ग्रुप का कारोबार एनजी, पोर्ट, लॉजिस्टिक्स, माइनिंग, गैस, डिफ़ेंस एवं एयरोस्पेस और एयरपोर्ट जैसे विविध क्षेत्रों तक फैला है। अदाणी समूह की शेयर बाज़ार में लिस्टेड कंपनियों में शामिल हैं–अदाणी इंटरप्राइज़ेज़, अदाणी ग्रीन एनजी, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन, अदाणी पावर, अदाणी ट्रांसमिशन, अदाणी टोटल गैस लिमिटेड और अदाणी विल्मर।
27 अप्रैल 2022 को गौतम अदाणी दुनिया के चौथे सबसे अमीर शख़्स बन गए थे। उनकी संपत्ति माइक्रोसॉफ़्ट के बिल गेट्स के बराबर हो गई थी[9]। लेकिन अब वह दुनिया की अमीरों की सूची में चालीसवें स्थान पर लुढ़क गये हैं।
बाहरी कड़ियाँ