गुकेश दोम्मराजु (तेलुगु: దొమ్మరాజు గుకేష్, हिन्दी लिप्यान्तरण: दॊम्मराजु गुकेष् ; जन्म: 29 मई 2006) एक भारतीय शतरंज ग्राण्डमास्टर हैं। वह "ग्राण्डमास्टर" ख़िताब हासिल करने वाले इतिहास में तीसरे सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं। डी. गुकेश 18 साल की उम्र में शतरंज विश्व चैम्पयन बनने वाले सबसे युवा खिलाड़ी है। [1] जन्म और प्रारम्भिक बाल्यावस्था गुकेश का जन्म 29 मई 2006 को चेन्नई में एक तेलुगु परिवार में हुआ, जिसका सम्बन्ध आन्ध्र प्रदेश से है। [2] [3] [4] उनके पिता, रजनीकान्त एक ई.एन.टी. सर्जन हैं और उनकी माँ पद्मा एक सूक्ष्म जीवविज्ञानी हैं। [5] उन्होंने सात…
गुकेश दोम्मराजु (तेलुगु: దొమ్మరాజు గుకేష్, हिन्दी लिप्यान्तरण: दॊम्मराजु गुकेष्; जन्म: 29 मई 2006) एक भारतीय शतरंज ग्राण्डमास्टर हैं। वह "ग्राण्डमास्टर" ख़िताब हासिल करने वाले इतिहास में तीसरे सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं। डी. गुकेश 18 साल की उम्र में शतरंज विश्व चैम्पयन बनने वाले सबसे युवा खिलाड़ी है। [1]
जन्म और प्रारम्भिक बाल्यावस्था
गुकेश का जन्म 29 मई 2006 को चेन्नई में एक तेलुगु परिवार में हुआ, जिसका सम्बन्ध आन्ध्र प्रदेश से है।[2][3][4] उनके पिता, रजनीकान्त एक ई.एन.टी. सर्जन हैं और उनकी माँ पद्मा एक सूक्ष्म जीवविज्ञानी हैं। [5] उन्होंने सात वर्ष की उम्र में शतरंज सीखा। [6] वे वेलमाला विद्यालय, मेल अयनाम्बक्कम, चेन्नई में पढ़ते हैं। [7]
गुकेश का परिवार आन्ध्र प्रदेश के तिरुपति ज़िले के सत्यवेडु के पास स्थित चेंचुराजु कण्ड्रिगा गाँव से है।[3][4] उनके दादा शंकर राजू का जन्म और पालन-पोषण चेंचुराजु कण्ड्रिगा में हुआ था और उन्होंने भारतीय रेल में काम किया। उनके बेटे रजनीकान्त ने चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के लिए चेन्नई में बसने का निर्णय लिया और उधर पद्मावती से विवाह किया। परिवार के पास चेंचुराजु कण्ड्रिगा में सम्पत्तियाँ हैं, जिधर वर्तमान में शंकर राजू निवास कर रहे हैं।[3][4]
शतरंज का करियर
डी. गुकेश ने इतिहास रचते हुए 18 वर्ष की उम्र में विश्व शतरंज चैम्पियनशिप का खिताब जीत लिया। गुकेश विश्व चैंपियन बनने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड रूस के महान शतरंज खिलाड़ी गैरी कास्परोव के नाम था, जिन्होंने 22 साल की उम्र में यह खिताब जीता था। गुकेश शतरंज का विश्व खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले विश्वनाथन आनंद ने पाँच बार यह खिताब जीतकर भारत का नाम रोशन किया था। [8]
उन्होंने 2015 में एशियन स्कूल शतरंज चैम्पियनशिप, [9] और अंडर-12 (अथवा U-12) श्रेणी [10] में 2018 में विश्व युवा शतरंज चैम्पियनशिप का अंडर-9 वर्ग जीता। U-12 व्यक्तिगत रैपिड और ब्लिट्ज, U-12 टीम रैपिड और ब्लिट्ज, और U-12 व्यक्तिगत शास्त्रीय प्रारूपों में 2018 एशियाई यूथ शतरंज चैम्पियनशिप में गुकेश ने पांच स्वर्ण पदक जीते। [11] वह मार्च 2018 में फ़्रान्स के [12] में 34 वें ओपन डे कैपले ला ग्रांडे शतरंज टूर्नामेंट के समापन पर एक अन्तर्राष्ट्रीय मास्टर बन गया।
सर्गेई कर्याकिन को हराकर गुकेश इतिहास में सबसे कम उम्र के ग्राण्डमास्टर बनने की कगार पर थे, [13] लेकिन एक महीने से भी कम समय में यह रिकॉर्ड बनाने से चूक गए। वह 12 साल, 7 महीने और 17 दिनों की उम्र में 15 जनवरी, 2019 को इतिहास में दूसरे सबसे कम उम्र के ग्राण्डमास्टर बने।[14] 2019 तक वे दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्राण्डमस्टर और भारत के अब तक के सबसे युवा ग्राण्डमास्टर हैं।
बाहरी कड़ियाँ
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