के. सुरेन्द्रन केरल के भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं। उनका पूरा नाम कुन्नुम्मल सुरेन्द्रन है। उनका राजनीतिक कार्य छात्र राजनीति, युवा संगठन और केरल में पार्टी के चुनाव अभियानों से जुड़ा रहा है। [1] प्रारंभिक जीवन और शिक्षा उनका जन्म 10 मार्च 1970 को केरल के कोझिकोड ज़िले के उल्लियेरी में हुआ। उनके पिता कुंजिरामन और माता कल्याणी अम्मा थीं। उन्होंने कोझिकोड के ज़मोरिन गुरुवायुरप्पन कॉलेज से रसायन विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की। [2] संगठन में शुरुआती काम सुरेन्द्रन ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से राजनीतिक…
के. सुरेन्द्रन केरल के भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं। उनका पूरा नाम कुन्नुम्मल सुरेन्द्रन है। उनका राजनीतिक कार्य छात्र राजनीति, युवा संगठन और केरल में पार्टी के चुनाव अभियानों से जुड़ा रहा है।[1]
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
उनका जन्म 10 मार्च 1970 को केरल के कोझिकोड ज़िले के उल्लियेरी में हुआ। उनके पिता कुंजिरामन और माता कल्याणी अम्मा थीं। उन्होंने कोझिकोड के ज़मोरिन गुरुवायुरप्पन कॉलेज से रसायन विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की।[2]
संगठन में शुरुआती काम
सुरेन्द्रन ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से राजनीतिक काम शुरू किया। आगे चलकर वे भारतीय जनता युवा मोर्चा में सक्रिय हुए। अपने शुरुआती सार्वजनिक जीवन में वे सहकारिता और सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से भी जुड़े रहे।[2]
कासरगोड क्षेत्र में काम करने के दौरान स्थानीय लोगों से संवाद के लिए उन्होंने तुलु और कन्नड़ सीखी। केरल के इस हिस्से की बहुभाषी स्थिति उनके चुनावी और संगठनात्मक काम की पृष्ठभूमि रही।[3]
प्रदेश अध्यक्ष
15 फ़रवरी 2020 को उन्हें भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इससे पहले वे राज्य में पार्टी के प्रमुख प्रचारकों और संगठन के नेताओं में शामिल थे। उनका कार्यकाल विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी के अभियानों से जुड़ा रहा।[1]
चुनावी भागीदारी
उन्होंने 2009 और 2014 में कासरगोड लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। 2011 के विधानसभा चुनाव में वे मंजेश्वर से दूसरे स्थान पर रहे। 2016 में इसी सीट पर वे पी. बी. अब्दुल रज़ाक से 89 मतों से हारे।[14]
2019 में पार्टी ने उन्हें पथनमथिट्टा लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में वे तीसरे स्थान पर रहे। उसी वर्ष उन्होंने कोन्नी विधानसभा उपचुनाव में भी भाग लिया।[17]
2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कोन्नी और मंजेश्वर, दो सीटों से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों जगह जीत नहीं मिली। 2024 के लोकसभा चुनाव में वे वायनाड से भाजपा उम्मीदवार थे और तीसरे स्थान पर रहे।[18]
सबरीमला आंदोलन और सार्वजनिक भूमिका
सुरेन्द्रन सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख चेहरों में रहे। आंदोलन के दौरान उनकी गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई को लेकर सार्वजनिक विवाद हुआ। सुरेन्द्रन और राज्य सरकार ने घटनाओं के बारे में अलग-अलग दावे किए; इन घटनाओं पर राजनीतिक और कानूनी बहस हुई।[35]
उनकी राजनीतिक यात्रा में संगठन का विस्तार, चुनाव लड़ना और राज्य के धार्मिक तथा सांस्कृतिक मुद्दों पर अभियान चलाना प्रमुख गतिविधियाँ रही हैं। वे केरल की भाजपा राजनीति से जुड़े नेता हैं; इसी नाम के मलयालम उपन्यासकार से उनकी पहचान अलग है।